26 फरवरी 1937 को जन्मे मनमोहन देसाई हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे सफल व्यावसायिक निर्देशकों में से एक थे। उनकी फिल्मों की खासियत थी एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी, भावनाएं और संगीत का अद्भुत संगम। उन्होंने दर्शकों को कुछ समय के लिए वास्तविकता से दूर ले जाकर संपूर्ण मनोरंजन देने का मंत्र दिया। ‘अमर अकबर एंथनी’ (1977) उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है।

तीन भाइयों की कहानी, अलग-अलग धर्मों में पले-बढ़े बच्चे और अंत में परिवार का पुनर्मिलन—इस ‘लॉस्ट एंड फाउंड’ फॉर्मूले को उन्होंने इतने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया कि वह उनकी शैली की पहचान बन गया। ‘सुहाग’, ‘नसीब’, ‘कुली’ जैसी फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं। ‘कुली’ (1983) की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को गंभीर चोट लगी थी।


उस घटना के बाद पूरे देश में उनकी सेहत के लिए प्रार्थनाएं की गईं। मनमोहन देसाई और बच्चन की जोड़ी उस दौर में सफलता की गारंटी मानी जाती थी। देसाई दर्शकों की नब्ज़ बखूबी पहचानते थे। “फिल्म मतलब तीन घंटे की स्वप्नयात्रा” यह उनका विश्वास था। उनकी फिल्मों ने केवल कमाई ही नहीं की बल्कि एक विशेष ‘मसाला’ परंपरा को जन्म दिया, जिसका प्रभाव आज भी कई व्यावसायिक फिल्मों में दिखाई देता है।
-सूर्यकांत आयरे
