क्रीएटिव फ़्रीडम के नाम पर बॉलीवुड का षड्यंत्र

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आज समझ में आता है कि.... क्रीएटिव फ़्रीडम के नाम पर कोई षड्यंत्र चल रहा है ! अब यह षड्यंत्र असहय हो गया है ! महिला पायलट के जीवन पर उन्ही के नाम से बनी फ़िल्म  में ही वायुसेना अधिकारी महिला छेड़ते हैं।  महिला चीख चीख कर कह रही है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई ! पर निर्लज्ज बोलिवुड हंस कर कहता है ,”क्रीएटिव फ़्रीडम है !!“ दुख इस बात का नहीं पैसे के लिए बालीवुड बिक गया  भोली जनता पैसे खर्च कर  बालीवुड के पास  जो भी जाता है उसे देशद्रोह प्यारा और देशभक्ति त्याज्य लगने लगती है !

तू हाँ कर या ना कर…..तू है मेरी किरन…..

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टीनएज की दहलीज पर हारमोनल बदलावों से गुजरती लड़कियों को ऐसे आक्रामक स्टॉकर्स सैक्सुअली भी अधिक अट्रैक्ट करते हैं। 'इतना गुस्सैल है तो बैड में कितना हॉट होगा' यह डिस्कसन कॉलेज नहीं, स्कूल कैंटीन में प्रतिदिन ही सुनती हूँ। आठवीं,दसवीं की छात्राएं बेचारी ये बच्चियाँ ये नहीं जानतीं कि ज्यादा 'हॉट' इतना 'हॉट' होता है कि अंकिता जैसी निर्दोष,निष्पाप बच्ची किसी नशेड़ी की एकतरफा 'हॉटनैस' में जलकर भस्म हो जाती है।

दाऊदवुड फिल्मों की ही देन है…’लव जिहाद’

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फ़िल्म डर में शाहरुख का किरदार, लड़की के करीबियों को डराता है, उन पर हमला करता है, लड़की को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करता है, क्योंकि वो उससे एकतरफा प्रेम करता है, दोनों ही फिल्मों में नायक से अधिक प्रेम जनता ने खलनायक पर लुटाया था, जिससे अपराधी प्रवृत्ति के युवाओं को मानसिक बल मिला, वो पहले से ही अपने कृत्य को सही मानते थे, और शाहरुख के किरदारों को जनता से इतना प्रेम मिलता देख उनका हौसला, उनका पागलपन और बढ़ गया,

बॉलीवुड ने हमेशा हिन्दू धर्म को बदनाम किया है

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फहरान ने पूरी मक्कारी के साथ कप्तान का नाम बदल कर इस्तियाक रख दिया और कोच मुखर्जी को एक वेबड़ा दिखा दिया जो अपने घर पर पत्नी से पिटता है और दारू पीकर कहीं भी लोट जाता है। जबकि असलियत यह थी कि कोच मुखर्जी ने जिंदगी में कभी शराब नहीं पी और उससे भी बड़ी बात मुखर्जी ने कभी विवाह ही नहीं किया था। बहुत लोग कहेंगे तो क्या हुआ मूवी में तो यह सब चलता है, बस यहीं पर गड़बड़ है आज के पहले कितने लोग इन दोनों का नाम जानते थे? नई पीढ़ी तो बिल्कुल भी नहीं जानती, वह मूवी देख कर क्या जानेगी, यही न कि भारत के लिए पहला गोल्ड जीतने वाली टीम के कैप्टन इस्तियाक था और कोच वेबड़ा। फिर भी यदि लोग कहें कि क्या फर्क पड़ता है तो उनसे कहिएगा कि कल को तुम्हारे पोते को यह बताया जाए कि तुम्हारे दादा का नाम किशनलाल नहीं बल्कि इस्तियाक था तो उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी?

हिन्दू त्योहारों पर गन्दा और भद्दा नाच-गाना क्यों ?

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कभी ईद में मुसलमानो को मस्ज़िद के सामने नशा करके अश्लील गानों पर नाचते हुए देखा है क्या ? कभी यीशु मसीह के सामने क्रिस्चियन लोगो को शांताबाई गाने पर नाचते हुए देखा है क्या ? कभी जैन लोगो को उनके भगवान के सामने, आला बाबुराव गाना लगाकर नाचते हुए देखा है क्या ? ये सब समाज अपने अपने इष्ट का मान सम्मान बड़ी ईमानदारी से करते है । क्योकि उनको उनका धर्म उनकी संस्कृति को टिकाना है । फिर हमारे हिन्दू धर्म के भगवान के सामने नशा करके और डीजे लगाकर अश्लील गाने लगाकर ये भद्दा नाच क्यों ?

‘आदर्श’ की तरह प्रस्तुत हों आदर्श

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कहा जाता है कि सिनेमा समाज को दर्पण दिखाता है परंतु यदि उसे माध्यम बनाने वालों का ध्येय शुद्ध ना हो तो वे समाज को गलत इतिहास और कथावस्तु से परिचित कराने का प्रयास करते हैं। तथ्यों से अपरिचित किशोर  और युवा उसी असत्य को सत्य मानकर आचरण करने लगते हैं।

…ऑस्कर, नाम तो सुना ही होगा !!

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विश्व का शायद ही कोई कोना हो जहां इंसान  रहते हों और फिल्में ना देखी  जाती हों। कहीं बड़े धूमधाम से बनती हैं और लोग उनके रिलीज होने का महीनों या सालों इंतजार करते हैं, तो कहीं पर लोग तमाम प्रतिबंधों के बावजूद चोरी-छिपे देख ही लेते हैं। कट्टप्पा ने बाहुबली…

स्वर यात्री जुथिका रॉय

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जो लोग कला जगत में बहुत ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं, उनमें से अधिकांश को आचार-व्यवहार की अनेक दुर्बलताएं घेर लेती हैं; पर भजन गायन की दुनिया में अपार प्रसिद्धि प्राप्त जुथिका राॅय का जीवन इसका अपवाद था। इसका एक बहुत बड़ा कारण यह था कि उनका परिवार रामकृष्ण मिशन…

ब्रूस ली एक दार्शनिक महान योद्धा

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वो महानतम मार्शल आर्टिस्ट था। वो पंद्रह सौ पुशअप कर सकता था,दो सौ टू फिंगर्स पुशअप। वो एक इंच दूर से पंच कर किसी फाइटर को धराशायी कर सकता था। कोक कैन में अपनी उंगली के प्रहार से छेद कर सकता था । वो एक बार में नौ पंच कर…

कॉमेडी के बहाने कब तक होगा महिलाओं का अपमान

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भारतीय समाज स्त्रियों के सम्मान के बारे मे बड़ी बड़ी बातें करता है । स्त्री को देवी का रूप माना गया है । पत्नी को आधा अंग का दर्जा दिया गया है, लेकिन वास्तविकता क्या है ? वास्तविकता यह है, की कपिल शर्मा नाम का एक शो बनता है, जिसका…

बकाया वसूल किए बिना ही आईपीएल को सुरक्षा प्रदान

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बारबार पत्राचार करने के बाद भी मुंबई पुलिस बकाया पैसा वसूल करने के लिए गंभीर नहीं हैं। बकाएदार मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को बार बार नए क्रिकेट मैच के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने मुंबई पुलिस का 14.82 करोड़ रुपए अदा नहीं किया हैं जबकि…

रंगमंच में प्रेम का राग है, तो जुदाई का दर्द भी !

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रंगमंच को अभिनय कला का नशा माना जाता है। जिसने भी इस दुनिया में कदम रखा, रंगमंच उसकी रूह में उतर गया। फिर वह चाहकर भी रंगमंच की दीवानगी से खुद को जुदा नहीं कर सकता। दरअसल, रंगमंच इश्क का एक ऐसा दरिया है जिसकी गहराइयों में जिंदगी बसती है।…

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