भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं है। यह उस विचार की जीवंत अभिव्यक्ति है जो सदियों से इस देश की आत्मा में बसा है- राष्ट्र सर्वोपरि है, अंत्योदय हमारा धर्म है और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद हमारी पहचान है। जब 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई, तो यह केवल एक नए राजनीतिक संगठन का जन्म नहीं था- यह उस करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं का संगठन था, जो चाहते थे कि इस देश की राजनीति में ईमानदारी हो, विचार हो और राष्ट्र के प्रति समर्पण हो।
आज जब हम अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं, तो यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि उस यात्रा के स्मरण और उस संकल्प के नवीनीकरण का है जिसने भाजपा को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनाया।

भाजपा की वैचारिक जड़ें उस मिट्टी में हैं जिसे पं. दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानव दर्शन के रूप में सींचा। दीनदयाल जी ने यह स्पष्ट किया था कि भारत की राजनीति का केंद्र बिंदु वह अंतिम व्यक्ति होना चाहिए जो समाज की सबसे निचली पायदान पर खड़ा है। अंत्योदय की यह परिकल्पना भाजपा के लिए कोई चुनावी नारा नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है।

श्रध्येय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना से लेकर कश्मीर के लिए अपने प्राणों की आहुति देने तक, यह सिद्ध किया कि राष्ट्रीयता का अर्थ केवल वोट की राजनीति नहीं- बल्कि मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की तत्परता है। उनका बलिदान आज भी हर भाजपा कार्यकर्ता के हृदय में एक ज्वाला की तरह जलता है।
श्रध्येय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इस विचार को जन-जन तक पहुँचाया। उनकी वाणी में कविता थी, उनके कार्य में दृष्टि थी और उनके नेतृत्व में भारत को एक परमाणु शक्ति के रूप में विश्वपटल पर स्थापित करने का साहस था। आदरणीय लाल कृष्ण आडवाणी जी ने रथयात्रा निकाली तो सिर्फ मंदिर आंदोलन नहीं जगाया- उन्होंने उस समाज को जगाया जो दशकों से अपनी ही भूमि पर उपेक्षित था।
1984 का वह काला अध्याय हम नहीं भूले। जब पूरे देश में सहानुभूति की लहर में भाजपा को केवल 2 सीटें मिलीं, तो कई लोगों ने इस दल को इतिहास की धूल में दफन समझ लिया था। लेकिन जो विचार पर खड़ा हो, जो राष्ट्र के लिए समर्पित हो- उसे कोई पराजय स्थायी रूप से नहीं झुका सकती।
उस पराजय ने भाजपा के कार्यकर्ताओं को तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत किया। बूथ से लेकर राष्ट्र तक संगठन की नींव रखी गई, कार्यकर्ताओं ने मेहनत की पराकाष्ठा की और फिर वह दिन आया- 2014 जब आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने 282 सीटें जीतीं, 3 दशक बाद देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और भारत की राजनीति का कायाकल्प हो गया। 2019 में 303 सीटों के साथ यह सिद्ध हो गया कि यह लहर नहीं, जनता का स्थायी विश्वास है। 2024 में एनडीए के साथ तीसरी बार सत्ता में आना यह प्रमाण है कि भारत की जनता ने भाजपा को अपनी नियति के साथ जोड़ लिया है।

आज भाजपा 15 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है। यह संख्या नहीं- एक विचार की विजय है।
जब श्री नरेंद्र मोदी जी 2014 में प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने एक नई शासन संस्कृति की नींव रखी- न तुष्टिकरण, न परिवारवाद, न भ्रष्टाचार। उनका मंत्र था: सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास।
पिछले 12 वर्षों में जो काम हुआ है, वह भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।
500 वर्षों की प्रतीक्षा का अंत। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हुई और करोड़ों हिंदुओं की आँखें छलक उठीं। यह केवल एक मंदिर का उद्घाटन नहीं था- यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा की पुनर्प्रतिष्ठा थी।
जो काम दशकों से लंबित था, अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और मोदी जी के नेतृत्व में 5 अगस्त 2019 को संसद में एक ऐतिहासिक निर्णय हुआ। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग संवैधानिक रूप से भी बना। अलगाववाद की जड़ें काट दी गईं।
मुस्लिम महिलाओं के जीवन में न्याय का सूरज उगा। वह कानून जो पुरुष की तीन बोलियों पर एक स्त्री का जीवन बर्बाद कर देता था, मोदी सरकार ने उस ट्रिपल तलाक को समाप्त किया। यही असली महिला सशक्तिकरण है।
आयुष्मान भारत ने 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया। उज्ज्वला योजना से 10 करोड़ माताओं के चूल्हे गैस से जले। जल जीवन मिशन ने भारत के 15 करोड़ घरों में नल से जल पहुँचाया। पीएम आवास योजना से करोड़ों परिवारों को पक्की छत मिली। पीएम किसान सम्मान निधि से किसानों के खाते में सीधे पैसे पहुँचे। 80 करोड़ भारतीयों को भोजन, यह है अंत्योदय का व्यावहारिक स्वरूप।

जी20 की अध्यक्षता में भारत ने विश्व को नेतृत्व दिया। डिजिटल अर्थव्यवस्था में UPI एक वैश्विक मॉडल बन चुका है। रक्षा निर्यात में भारत नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। चंद्रयान-3 की सफलता ने दुनिया को दिखाया कि नए भारत का सामर्थ्य असीमित है।
भाजपा आज केवल उत्तर भारत की पार्टी नहीं है। यह एक राष्ट्रीय धारा है जो देश के हर कोने में प्रवाहित हो रही है।
पंजाब की बात करें तो हृदय भारी हो जाता है। गुरुओं और शहीदों की यह पवित्र भूमि आज जिस दर्द से गुजर रही है, उसे देखकर हर देशभक्त का सिर झुक जाता है।
आम आदमी पार्टी ने पंजाब की जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे। दिल्ली मॉडल की बात की थी। लेकिन आज पंजाब की सच्चाई क्या है? गैंगस्टर बेखौफ हैं, नशे की लत युवाओं को खोखला कर रही है, उद्योग पलायन कर रहे हैं और कानून-व्यवस्था की ऐसी दुर्दशा है कि अपराधी जेलों से वारदातें अंजाम दे रहे हैं।
पंजाब का किसान परेशान है। पंजाब का नौजवान बेरोजगार है। पंजाब की माँ अपने बेटे को नशे की गिरफ्त से निकालने के लिए तड़प रही है। यह दर्द भाजपा महसूस करती है- क्योंकि भाजपा के लिए पंजाब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि बलिदान की वह धरती है जिसने देश की रक्षा के लिए सबसे अधिक कुर्बानियाँ दी हैं।
भाजपा का पंजाब में बढ़ता जनाधार इस बात का प्रमाण है कि वहाँ की जनता परिवर्तन चाहती है- असली परिवर्तन, जो नशामुक्ति, कानून का राज और रोजगार के अवसर लाए। भाजपा यह प्रतिबद्धता लेकर पंजाब की गली-गली में जा रही है।

370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का कायापलट हो गया है। जहाँ कभी पत्थरबाजी होती थी, आज वहाँ स्कूल और अस्पताल बन रहे हैं। पर्यटन नई ऊँचाइयों पर है। युवाओं को केंद्र सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। अलगाववाद की आवाज़ें कमज़ोर पड़ी हैं और लोकतंत्र की जड़ें गहरी हो रही हैं। यह है मोदी जी का वह साहसिक नेतृत्व जिसने उस समस्या को सुलझाया जिसे पिछली सरकारें वोट बैंक की खातिर जीवित रखती थीं।
पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र घायल है। भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले होते हैं, उनके घर जलाए जाते हैं और सत्तारूढ़ दल के गुंडे संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देते हैं। लेकिन भाजपा का कार्यकर्ता डरा नहीं है। वह अपने बूते पर गुरुदेव रवींद्रनाथ, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की इस धरती पर सत्य और न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। भाजपा बंगाल की जनता के साथ खड़ी है और रहेगी।

केरल में भाजपा अब एक गंभीर राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है। वहाँ की जनता वामपंथी और कांग्रेसी विफलताओं से थक चुकी है। भाजपा की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा और मोदी सरकार की योजनाओं का लाभ अब केरल के मतदाताओं तक भी पहुँच रहा है। त्रिशूर लोकसभा सीट की जीत इस बदलाव की पहली झलक है।
भाजपा और अन्य दलों में जो सबसे बड़ा अंतर है, वह है शासन का दर्शन। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने दशकों तक वोट बैंक की राजनीति की। जाति, धर्म और भाषा के नाम पर समाज को बाँटा। अल्पसंख्यकों को सशक्त नहीं किया- उन्हें वोटों की भेड़ बनाकर रखा।
मोदी जी का रास्ता अलग है। उनके लिए हर गरीब समान है- चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, सिख हो या ईसाई। उज्ज्वला योजना की लाभार्थी हर माँ के लिए, पीएम आवास की हर छत के लिए, आयुष्मान कार्ड के हर मरीज के लिए सरकार का दरवाजा एक समान खुला है। यही असली धर्मनिरपेक्षता है- भेदभाव का नहीं, न्याय का।
जैसे-जैसे हम 2047 की ओर बढ़ रहे हैं- भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की ओर- भाजपा का संकल्प और दृढ़ होता जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विकसित भारत का जो स्वप्न देखा है, वह किसी एक नेता या एक दल का स्वप्न नहीं- वह 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प है।
अगले दो दशकों में भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। रक्षा में आत्मनिर्भरता प्राप्त करनी है। हर गाँव में बिजली, पानी और सड़क पहुँचानी है। हर युवा को शिक्षा और रोजगार देना है। यह केवल घोषणा नहीं- यह भाजपा का प्रतिबद्धता पत्र है।
भाजपा का कार्यकर्ता जब गाँव की गली में जाता है, जब वह किसी गरीब के दरवाजे पर दस्तक देता है, तो वह केवल वोट माँगने नहीं जाता- वह एक राष्ट्र निर्माण का संदेश लेकर जाता है। यही इस पार्टी की ताकत है, यही इसकी पहचान है और यही इसका भविष्य है।
आज, स्थापना दिवस पर, हम उन सभी कार्यकर्ताओं को नमन करते हैं जिन्होंने बिना किसी लोभ-लालच के, बिना किसी पद की आकांक्षा के इस विचार को जिंदा रखा। जिन्होंने 1984 की पराजय में भी मशाल बुझने नहीं दी। जिन्होंने बंगाल में लाठियाँ खाईं, जिन्होंने केरल में हमले सहे, लेकिन राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा नहीं छोड़ी।
भारतीय जनता पार्टी एक दल नहीं- एक आंदोलन है। एक विचार है। एक यज्ञ है- जिसमें हर कार्यकर्ता एक आहुति है और जिसकी लौ से विकसित भारत का निर्माण होना है।
जय हिंद।
जय भारत।
भारत माता की जय।
– तरुण चुग

