कल का कार्यक्रम अद्भुत था। खचाखच भरा हुआ भव्य कुशाभाऊ ठाकरे सभागार। बाहर खडे डेढ़ – दो सौ लोग और जगह नहीं मिली, इसलिए वापस लौटे लगभग इतने ही लोग। उपस्थित सारे सुधी और प्रबुद्धजन। संघ के, विचार परिवार के अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता। लगभग आठ-दस कुलगुरु।

अनेक शिक्षाविद, अनेक प्रशासनिक अधिकारी, निगम-मंडलों के अध्यक्ष, मीडिया जगत के वरिष्ठतम पत्रकार। मध्य प्रदेश मंत्रीमंडल के २१ मंत्री… किसी पुस्तक के विमोचन के लिए इतना सब ? मैं शब्दशः अभिभूत हूं..!

प्रसंग था, मेरी पुस्तक इंडिया से भारत के विमोचन का। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी इस कार्यक्रम के प्रमुख अतिथी थे, तो पत्रकारिता के पितृपुरुष, लेखक / चिंतक और टीवी 9 के निदेशक हेमंत शर्मा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे।

वे इस कार्यक्रम के लिए विशेष रुप से भोपाल पधारे थे। विद्या भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष एवं म. प्र. नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कान्हेरे विशिष्ठ अतिथी थे। प्रकाशक प्रभात कुमार जी, दिल्ली से इस कार्यक्रम के लिए पधारे थे। कार्यक्रम ‘प्रज्ञा प्रवाह’ द्वारा आयोजित था। प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत युवा आयाम प्रमुख आशुतोष कार्यक्रम का संचालन कर रहे थे। प्रांत संयोजक धीरेंद्र चतुर्वेदी मंचासीन थे।
प्रारंभ में प्रज्ञा प्रवाह के अ. भा. सह-संयोजक दीपक शर्मा जी ने पुस्तक का परिचय दिया। हेमंत शर्मा जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि “यह पुस्तक केवल एक वैचारिक रचना नहीं, बल्कि भारत को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जोड़ने का सशक्त प्रयास है।” उन्होंने कहा कि ‘इंडिया से भारत’ पुस्तक के लेखक प्रशांत पोळ निरंतर भारतीय समाज को पाश्चात्य मानसिकता से बाहर निकालकर आत्मगौरव से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। यह पुस्तक नई पीढ़ी को यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि हम एक राष्ट्र के रूप में कौन हैं, हमारी पहचान क्या है और हमारी सांस्कृतिक जड़ें कहां हैं।

उन्होंने कहा कि “एक समय भारत की बात करना रूढ़िवादी माना जाता था, लेकिन आज देशभर में सांस्कृतिक चेतना का नया दौर शुरू हुआ है।” उन्होंने कहा कि अब “अंग्रेजों भारत छोड़ो” के बाद वैचारिक स्तर पर ‘इंडिया, भारत छोड़ो’ जैसे आत्मबोध की आवश्यकता है और यह पुस्तक उसी विचार का विस्तार है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘इंडिया से भारत’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि देश के वैचारिक, सांस्कृतिक और आत्मगौरवपूर्ण पुनर्जागरण की सजीव कथा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2026 तक का कालखंड भारत के लिए स्वर्णिम दौर है, जिसे आज देशवासी प्रत्यक्ष अनुभव कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “लेखक प्रशांत पोळ ने इस पुस्तक में भारत की उस यात्रा को दर्ज किया है, जिसमें औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर राष्ट्र ने अपने आत्मसम्मान, सांस्कृतिक चेतना और निर्णायक नेतृत्व को वापस प्राप्त किया है।” उन्होंने आगे कहा कि “स्वतंत्रता के बाद कई ऐतिहासिक अवसरों पर भारत ने अपने सामर्थ्य के अनुरूप निर्णय नहीं लिए, जिसका उल्लेख पुस्तक में अत्यंत साहसिक ढंग से किया गया है।”
कार्यक्रम अत्यंत सधा हुआ, व्यवस्थित और सटीक रहा। प्रज्ञा प्रवाह के कार्यकर्ताओंने इस हेतु अथक परिश्रम किये।
मेरे अभिन्न मित्र, प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री राकेश सिंह, पठन- पाठन में रुची रखने वाले संवेदनशील व्यक्ती हैं। वाचन संस्कृती का प्रसार होना चाहिए, लोगों ने अच्छा वैचारिक साहित्य पढना चाहिए यह उनका कन्विक्शन हैं। इस पर इनकी दृढ श्रध्दा हैं। जहां इस प्रकार की वाचन संस्कृती का जोर रहता हैं, वह भाग, वह क्षेत्र समृध्द रहता हैं, ऐसी राकेश जी की मान्यता हैं। इसलिए, कल के कार्यक्रम में राकेश जी का महती योगदान हैं।
कल के इस जबरदस्त सफल कार्यक्रम के लिए और बड़ी संख्या में पुस्तक का क्रय करने के लिए मैं आप सभी का शतशः कृतज्ञ हूं..!
– प्रशांत पोळ
