परीक्षाओं का लीक होना एक बड़ा मुद्दा है। यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और साफ-साफ वर्तमान सरकार की कमजोरी है। सरकार इसके लिए कोई भी तर्क दे, पर इसमें कोई संदेह नहीं कि यह उनका ही फेल्योर है और यही कारण है कि इस मुद्दे पर सरकार के समर्थक भी लगातार मुखर रहे, शिक्षा मंत्री का विरोध हुआ और अभी भी हो रहा है। यह भी तय है कि आज नहीं तो कल उन्हें पद से हटना ही पड़ेगा, वरना सरकार के समर्थक भी विरोध करते ही रहेंगे।

पर क्या इसी के कारण जंतर मंतर पर चल रहे तमाशे का समर्थन किया जाय? क्या सचमुच वह आंदोलन छात्रों के हित के लिए किया जा रहा है? इसका स्पष्ट उत्तर है, नहीं। इस आंदोलन का छात्र हित से कोई लेना देना नहीं है और यही कारण है कि वहां सौ-पचास छात्र भी नहीं दिख रहे।
उस आंदोलन से मुख्यतः वे ही लोग जुड़े हैं जिनकी मूल पहचान ही हिन्दू विरोधी की है। वह डेढ़ फुट वाली आंदोलन की दुकान जो नीट का फुलफॉर्म तक नहीं जानती, वह पहले ही दिन से मनुवाद, मनुस्मृति और ब्राह्मण विरोध का रोना रो रही है और आप बता रहे हैं कि यह छात्र आंदोलन है?
कौन और क्यों मानेगा आपकी बात?
एक ओर आप प्रेमानंद जैसे संत के लिए कह रहे हैं कि वह कहां का राजा है कि उसे महाराज कहें और दूसरी तरफ मंच पर “बस नाम रहेगा अल्ला का” गा रहे हैं। फिर हम क्यों न मानें कि आपका आंदोलन मूलतः हिंदू विरोध का आंदोलन है।

अनशन पर बैठी नेहा बोरा का हिंदू विरोधी चरित्र कौन नहीं जानता? वहां पहुंच रहे स्वरा भास्कर जैसे लोगों को पहचानने में किसी को दिक्कत होनी है क्या? कोई फूहड़ कॉमेडियन आ कर अभद्र तरीके से माता सीता का नाम ले रहा है, और आपको लगता है कि इसके बाद भी हिंदू जनता आपसे जुड़ेगी? कोई नहीं जुड़ेगा। अगर जुड़ रहा होता तो इतने बड़े मुद्दे के लिए वहां लाखों की भीड़ खड़ी होती।
इनको समाज का समर्थन मिलता, यदि ये केवल छात्रों की बात कर रहे होते। पर इन्होंने छात्रों के बहाने अपना एजेंडा थोपने का कार्यक्रम किया है। ये छात्रों के साथ खड़े नहीं हुए, बल्कि इन्होंने छात्रों का मुद्दा छीन कर उनका अहित ही किया है।
दरअसल छात्र हित से तो इनका कोई लेना देना है नहीं, ये यह भी जानते हैं कि सरकार इनकी सुनेगी नहीं। ये बस इसी बहाने तनिक चर्चा पा लेना चाहते हैं। हालांकि इन्हें जितने की उम्मीद थी, उतनी चर्चा भी नहीं मिली है।
शिक्षा मंत्री को हटाया जाना चाहिए, पर इनके आंदोलन के कारण नहीं। बेहतर होता कि इनकी नौटंकी के पहले ही शिक्षा मंत्री बदल दिए गए होते। पर अबतक नहीं हुआ तो कुछ दिनों बाद हो, पर अभी नहीं…
– सर्वेश तिवारी ‘श्रीमुख’

