प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बाद देश के सबसे लोकप्रिय नेता एवं मुख्य मंत्री के तौर पर योगी आदित्य नाथ सबकी पसंद बने हुए हैं। मोदी के बाद योगी ही प्रधान मंत्री के एकमात्र प्रबल दावेदार माने जाते हैं और जनता की भी यही इच्छा है। उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होने के कारण जनता का उन पर विश्वास बना हुआ है।
क्या योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य के कलंक से उबरने के बाद 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा और क्या उप्र में रामराज्य का सपना पूरा होगा? एक मीडिया सर्वे में लगातार दो बार देश का सबसे लोकप्रिय मुख्य मंत्री चुने जाने वाले योगी की लोकप्रियता अब उत्तर प्रदेश की सीमाओं को लांघकर देशव्यापी हो चुकी है, जिसके कारण उन्हें भविष्य में प्रधान मंत्री पद के एक प्रबल दावेदार के रूप में भी देखा जाने लगा है।
’इंडिया टुडे-सी वोटर मूड ऑफ द नेशन’ 2025 सर्वे के अनुसार योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरे वर्ष भारत के सबसे लोकप्रिय मुख्य मंत्री के तौर पर अपनी जगह बनाए रखी। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में लगातार दो बार पूर्ण कार्यकाल की दायित्व सम्भालने वाले वे पहले मुख्य मंत्री हैं। योगी के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी निर्णायक क्षमता, कड़ा प्रशासनिक नियंत्रण, दृढ़ता और परिणाम-उन्मुख कार्यशैली है। सांसद रहते हुए उन्होंने जिन मुद्दों की लड़ाई लड़ी, मुख्य मंत्री बने तो उन्हें धरातल पर उतार दिया।
गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर के रूप में उनके धार्मिक और राजनीतिक जीवन में कोई स्पष्ट विभाजन नहीं है बल्कि वे धार्मिक शुचिता को ही शासन का आधार मानते हैं। उनका कोई निजी पारिवारिक एजेंडा नहीं है। यही कारण है कि भारतीय राजनीति में जहां प्राय: मुख्यमंत्रियों के परिवारों पर भ्रष्टाचार या प्रभाव के आरोप लगते हैं, योगी आदित्यनाथ की छवि बेदाग और निष्पक्ष बनी हुई है। मुख्य मंत्री आवास में रहने के बाद भी उनकी दिनचर्या प्रतिदिन सुबह 4:00 बजे योग और पूजा-पाठ से ही शुरू होती है। वे भगवा वस्त्र धारण करते हैं, न्यूनतम सुविधाओं का उपयोग करते हैं और बेहद सादा भोजन करते हैं। समय के पाबंद हैं और केवल लखनऊ मुख्यालय से सरकार नहीं चलाते। संकट के समय (जैसे बाढ़ या महामारी) या विकास कार्यों के निरीक्षण के लिए वे लगातार जिलों का तूफानी दौरा करने के लिए जाने जाते हैं। ’जनता दर्शन’ कार्यक्रमों के माध्यम से वे सीधे प्रदेश के सुदूर गांवों से आए नागरिकों से नियमित अंतराल पर मिलते हैं और अधिकारियों को मौके पर ही फाइलें निपटाने के आदेश देते हैं।

अपराध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुख्य मंत्री की ’जीरो टॉलरेंस’ नीति और ’बुलडोजर कार्रवाई’ ने देश भर में ’योगी मॉडल’ को स्थापित किया है। वे किसी भी राजनीतिक, सामाजिक या माफिया दबाव के आगे नहीं झुकते। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने संगठित अपराध को समाप्त करने, माफियाओं की आर्थिक कमर तोड़ने और महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। गैंगस्टरों और माफियाओं की अवैध रूप से कमाई गई हजारों करोड़ रुपये की सम्पत्ति को जब्त या ध्वस्त किया गया है। अवैध निर्माणों और सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करने वाले अपराधियों के घरों-कार्यालयों पर बुलडोजर चलाकर कड़ा संदेश दिया गया है। महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण बनाने के लिए कई विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इनमें महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन के लिए राज्यव्यापी अभियान मिशन शक्ति, स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं से छेड़छाड़ रोकने के लिए एंटी-रोमियो स्क्वाड, हर पुलिस स्टेशन में महिलाओं की शिकायतों की त्वरित और गोपनीय सुनवाई के लिए ’महिला हेल्प डेस्क’ शामिल है। इन अभियानों के कारण गम्भीर अपराधों जैसे अपहरण (62.8% की कमी) और छेड़छाड़ के मामलों में भारी गिरावट देखी गई है। बड़े माफिया गिरोहों को जेल भेजा गया है या उनके नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में तेजी से सजा दिलाने के लिए फॉस्ट-ट्रैक न्यायालयों को सक्रिय किया गया है।

कड़े अभियोजन और गवाहों की सुरक्षा के चलते माफियाओं और गम्भीर अपराधियों के विरुद्ध न्यायालयों में 93% से अधिक की दंड दर प्राप्त की गई है। उत्तर प्रदेश पुलिस को ’त्रिनेत्र’ जैसी आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है, जिसमें लाखों अपराधियों का डिजिटल डेटाबेस और फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) शामिल है। इससे संदिग्धों को पकड़ने में सहायता मिलती है। राज्य के प्रमुख शहरों और चौराहों को सेफ सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत स्मार्ट कैमरों के नेटवर्क से जोड़ा गया है। दंगों और साम्प्रदायिक हिंसा पर पूरी तरह रोक लगाकर सामान्य नागरिकों और व्यापारियों को सुरक्षित वातावरण दिया गया है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश की अपराध दर राष्ट्रीय औसत (252.3) की तुलना में 28.5% कम (180.2 मामले प्रति लाख जनसंख्या) दर्ज की गई है। विशाल जनसंख्या होने के बाद भी प्रति व्यक्ति अपराध के मामले में यूपी देश में 21वें स्थान पर है।
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 13.30 लाख करोड़ से बढ़कर 30.25 लाख करोड़ से अधिक पहुंचा, जिससे राज्य देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना। राज्य का लक्ष्य शीघ्रातिशीघ्र 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 83 लाख करोड़) की अर्थव्यवस्था बनने का है। प्रदेश में ’निवेश मित्र’ पोर्टल के जरिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली लागू की गई, जिससे उद्योगों को लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलना बहुत आसान हो गया। उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे हब में बदल दिया गया है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेस वे जैसी 22 बड़े एक्सप्रेसवे परियोजनाओं ने माल ढुलाई और आवागमन की गति बदल दी है। राज्य में हवाई अड्डों का तेजी से विस्तार किया गया। जेवर (नोएडा) और अयोध्या सहित उत्तर प्रदेश अब 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला देश का अग्रणी राज्य बन गया है। लखनऊ, कानपुर, आगरा और नोएडा में मेट्रो रेल के जाल के साथ-साथ दिल्ली-मेरठ के बीच देश की पहली रैपिड रेल (नमो भारत) परियोजना को अमलीजामा पहनाया गया। नोएडा और ग्रेटर नोएडा भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण हब बन चुके हैं, जहां देश के कुल मोबाइल उत्पादन का 60% से अधिक हिस्सा निर्मित होता है। बुंदेलखंड और कानपुर क्षेत्र में भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता के लिए डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर स्थापित किया जा रहा है।
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का ऐतिहासिक निर्माण, वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और मथुरा-वृंदावन का सुनियोजित विकास योगी आदित्य नाथ के सबसे प्रमुख सांस्कृतिक कार्यों में शामिल हैं। प्रयागराज में आयोजित कुम्भ और महाकुम्भ मेलों ने वैश्विक स्तर पर स्वच्छता, सुरक्षा और उत्कृष्ट प्रबंधन के नए मानक स्थापित किए। फलस्वरूप सांस्कृतिक पुनरुत्थान के चलते उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन के मामले में देश का नम्बर-1 राज्य बन चुका है, जिससे लाखों स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला है। सरकारी नौकरियों में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को समाप्त कर 6 लाख से अधिक युवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया के जरिए सरकारी नौकरियां दी गईं। एक जिला एक उत्पाद योजना के माध्यम से राज्य के पारम्परिक और स्थानीय हस्तशिल्प उद्योगों (जैसे मुरादाबाद का पीतल, अलीगढ़ के ताले, भदोही के कालीन) को बढ़ावा देकर ग्रामीण और कस्बाई अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन (शौचालय निर्माण) और मुफ्त राशन वितरण जैसी केंद्रीय योजनाओं को उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर सबसे पहले और सबसे तेजी से लागू करने का श्रेय भी योगी सरकार को जाता है।
19 वर्ष तक सांसद रहने के कारण योगी को केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली, विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, नौकरशाही के दृष्टिकोण और संसदीय नियमों का व्यापक अनुभव है। इसी अनुभव का लाभ उन्हें मुख्य मंत्री बनने के बाद उत्तर प्रदेश की विशाल और जटिल प्रशासनिक व्यवस्था को तुरंत नियंत्रित करने में मिला। संसद के भीतर बहस और विधायी प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी का रिकॉर्ड राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक था। सांसद रहते हुए योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल के बच्चों के लिए जो लड़ाई लड़ी थी, मुख्य मंत्री बनने के बाद उन्होंने उसे जमीनी स्तर पर एक बड़ी सफलता में बदल दिया। मस्तिष्क ज्वर से जहां पहले अस्पतालों में बच्चों के शवों के ढेर लगते थे, वहीं वर्ष 2021-22 आते-आते इस बीमारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा 95% से 98% तक कम होकर लगभग शून्य के करीब पहुंच गया। योगी आदित्यनाथ ने 1998 से 2017 के बीच कई ऐसे बिल पेश किए, जो उनके वैचारिक दर्शन और भविष्य के विजन को दिखाते हैं, जैसे समान नागरिक संहिता विधेयक, जनसांख्यिकी नियंत्रण विधेयक, गौ-संरक्षण और धर्मांतरण विरोधी कानून इत्यादि।
मुख्य मंत्री बनने के बाद योगी ने उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को तुरंत बंद कराया और ’गौ-आश्रय स्थलों’ का निर्माण कराकर इस एजेंडे को राज्य स्तर पर सख्ती से लागू किया। उन्होंने वर्ष 2020 में ’उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’ पास कराया, जिसे आम बोलचाल में ’लव जिहाद विरोधी कानून’ भी कहा जाता है। योगी आदित्यनाथ के संसदीय कार्यकाल और उनके मुख्यमंत्रित्व काल की इस तुलना से सिद्ध होता है कि जिन मुद्दों को वे संसद में विपक्ष में या एक सांसद के रूप में उठाते थे, सत्ता मिलने पर उन्होंने उन विचारों को केवल फाइलों में बंद नहीं रखा।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बाद योगी आदित्यनाथ राष्ट्रीय चुनावों (जैसे, त्रिपुरा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, बिहार, प. बंगाल आदि) में भाजपा के सबसे प्रभावी और मांग में रहने वाले स्टार प्रचारक रहे। उनकी रैलियों में जुटने वाली भीड़ उनकी अखिल भारतीय स्वीकार्यता को दर्शाती है। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट नेता के रूप में देखा जा रहा है। राजनीति के दो-मुंहेपन वाली संस्कृति में उनके समर्थक उनकी दृढ़ता और साहसिक, परिणाम-उन्मुख नेतृत्व को ’रामराज्य’ की दिशा में बढ़ता कदम बताते हैं।
रामेंद्र सिन्हा

