विश्व हिंदी परिषद, नई दिल्ली के तत्वावधान में दिनांक 30 एवं 31 अक्टूबर 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में ‘भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी : हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया था। सम्मेलन में भारत सहित 20 से अधिक देशों के प्रवासी हिंदी साहित्यकारों, विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं हिंदी प्रचारकों ने सहभागिता की।

सम्मेलन का मूल उद्देश्य भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के हिंदी भाषा के प्रति योगदान, उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा, लोकतांत्रिक दृष्टि, सांस्कृतिक चेतना तथा सुशासन की अवधारणा को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रेखांकित करना था। सम्मेलन में हिंदी की वैश्विक स्थिति, भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रबोध के निर्माण में हिंदी की भूमिका, प्रवासी भारतीयों के बीच हिंदी का प्रचार-प्रसार तथा समकालीन वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में हिंदी साहित्य की प्रासंगिकता पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। दो विभिन्न अकादमिक सत्रों में शोधार्थियों एवं विद्वानों ने शोधपत्रों का वाचन किया।
इसी सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश के अतरौली जिला अलीगढ़ की निवासी और पिछले 25 वर्षों से खाड़ी के देश दोहा कतर में निवास कर रही प्रवासी साहित्यकार शालिनी वर्मा को हिंदी सेवा के लिए सम्मानित किया गया। अपने हिंदी सेवा के लिए शालिनी वर्मा को अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
उन्हें २७ अक्टूबर को रमेश पोखरियाल निशंक जी और बाबा रामेदव जी के हाथों लेखक गांव देहरादून में प्रवासी साहित्य क्षेत्र में दीर्घ अनुभव और सेवा के लिए लेखक गाँव सृजन सम्मान भी प्रदान किया गया।

विज्ञान भवन में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू के कर-कमलों द्वारा उनकी पुस्तक ‘धीरे धीरे उजाला ‘का लोकार्पण किया गया। इससे पूर्व उनकी पुस्तक का लोकार्पण विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस में वहाँ के राष्ट्रपति द्वारा किया गया।
प्रवासी भारतीयों साहित्यकारों में शालिनी वर्मा को हिंदी भाषा, साहित्य, शिक्षण में उल्लेखनीय योगदान हेतु फिजी के राजदूत जगन्नाथ सामी, भारत सरकार के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी, राष्ट्रीय महामंत्री विश्व हिंदी परिषद डॉ. विपिन कुमार और वरिष्ठ राजनेता के.सी. त्यागी, रवि शंकर अय्यर के कर-कमलों द्वारा प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर प्रतिष्ठित ‘विश्व हिंदी सेवी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्म भूषण यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद, वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, अश्विनी कुमार चौबे, संजय पासवान, प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, डॉ. अशोक कुमार भार्गव, प्रो. राजारत्नम, प्रो. अर्जुन चौहान डॉक्टर डीपी मिश्र, रश्मि सलूजा अनिल ठाकुर, मनीष कुमार पांडेय, प्रो. मनु प्रताप, डॉ. सुनील कुमार चम्पारणी सहित अनेक प्रवासी साहित्यकार और बुद्धिजीवी मौजूद रहे।

