मातृत्व

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फूल-सा नाजूक, जल-सा पवित्र, चांदनी-सा निर्माल होता है, शिशु का नाजुक स्पर्श और उससे भी कहीं पवित्र, महान और अनमोल होता है मां बनने का एहसास, जिसे सिर्फ एक मां ही समझ सकती है।

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