कार्यकर्ता निर्माण में अटलजी

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“वैसे तो अटल जी बहुत विनोदी स्वभाव के थे, लेकिन किसी नए व्यक्ति से मिलते समय जल्दी नहीं खुलते थे। कार्यकर्ता नया हो या पुराना, उनके सामने जाकर उनके बिना बोले भी उनके हाव-भाव से भी कुछ न कुछ सीख कर आता। थोड़े दिनों में ही बहुत खुल जाते थे।…

गांव की बेटी, सबकी बेटी

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दादी अपने जीवन में छुआछूत का विषेश व्यवहार करती थीं। दरवाजे और आंगन, खेत-खलिहान में काम करने वाली महिला-पुरुषों को कभी अपना शरीर नहीं छूने देतीं। पर उनसे मुहब्बत भी बहुत करती थीं। गांव में किसी जाति की बेटी का ब्याह हो, वे हम बहनों को लेकर पहुंच जातीं।

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