थप्पड़

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  उस दिन मुझे मेरी गलतियां, मेरी नादानियां समझ आ गईं। उस दिन के बाद मैंने न तो किसी का मजाक बनाया और न किसी की तबीयत की हंसी ही उड़ाई। जिंदगी को मुझे कुछ सिखाना ही था तो ऐसे थप्पड़ मार कर सिखाने की क्या जरूरत थी। यह कहानी किसी को सच नहीं लगेगी। सब

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