तोहफा

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समय को कौन रोक सकता है? वह अपनी रफ्तार में आगे बढ़ता जाता है। हम लाख उसे पकड़ कर रखना चाहें पर वह रेत की मानिंद हाथ से फिसल ही जाता है। और पीछे छूट जाती है यादें। ऐसी ही एक याद जब-तब मुझे सताती थी। गांव का वह घर, चूल्हे में चढ़ी बटलोई की दाल, भुने आलू का भ

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