वामपंथी एकोसिस्टम द्वारा रचे गए झूठे मिथ-प्रपंच

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वामपंथियों के एकोसिस्टम ने इतने इतने प्रपंच रचे हैं कि यदि बिलकिस बानो वास्तव में पीड़ित भी होगी तो 11 दोषियों की रिहाई का पाप भी इन्हीं वामपंथियों के माथे पर चढ़ेगा। विषैली विचारधारा वाली ये इकोसिस्टम तभी जगती है जब किसी बानो को मिले न्याय में थोड़ी कमी बच जाती है। ये लोग अजमेर की सूफी दरगाह में सैकड़ों अबोध हिंदू छात्राओं के साथ जघन्य अपराध और दर्दनाक मौत की घटना पर जग गए होते तो इन्हें आज संघर्ष नहीं करना पड़ता। गिरिजा टिक्कू को आरा मशीन में चीर कर दर्दनाक मौत देने वालों के खिलाफ मामला अदालत में भी नहीं पहुंच पाया। क्योंकि इनके अपराधी कहीं फारुख चिश्ती हैं तो कहीं यासीन तो कहीं गिलानी। अपराधियों का धर्म जात देखने की परंपरा यदि बनाई ना गई होती तो आज बिलकिस बानो को न्याय मांगना नहीं पड़ता।

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