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इंट्रो : राष्ट्रीय सेवा भारती समविचारी सेवा संस्थाओं का छत्र संगठन है, जो विभिन्न सेवा कार्यों में जुटी संस्थाओं का राष्ट्रव्यापी समन्वय करती है। राष्ट्रीय सेवा भारती एवं उससे जुड़ी सभी सेवा संस्थाओं का प्रमुख लक्ष्य है समाज की प्रत्येक कमजोर कड़ी को मजबूती प्रदान करते हुए सशक्त राष्ट्र के निर्माण में योगदान करना।

 

भारत सरकार ने वर्ष २०१५ में सोसायटीज एक्ट के तहत पंजीकृत देशभर के एनजीओ यानि सेवा संगठनों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया। उस अभियान में जो तथ्य उभर कर सामने आए उनके अनुसार देशभर में ३१ लाख से अधिक एनजीओ पंजीकृत हैं। ये संगठन विभिन्न क्षेत्रों में अपने-अपने स्तर पर कुछ न कुछ सेवा कार्य कर रहे हैं। इनमें बहुत बड़ी संख्या ऐसे स्वैच्छिक संगठनों की है जो शुद्ध राष्ट्रवादी भाव से अपने समाज के निर्बल वर्ग को सबल बनाने हेतु ईमानदार प्रयास कर रहे हैं।
सेवा क्षेत्र पर गहराई से नजर डालें तो पता चलता है कि एक ही स्थान पर राष्ट्रवादी भाव वाले समविचारी संगठन ही कई बार एक ही प्रकार की सेवा गतिविधियां संचालित करते हुए दिखाई देते हैं। यदि स्वावलंबन हेतु सिलाई केन्द्र, कंप्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र, आदि एक संगठन द्वारा संचालित हैं तो दिखाई देता है कि दूसरे समविचारी सेवा संगठन भी उसी प्रकार के सेवा प्रकल्प उसी स्थान पर शुरू कर देते हैं। परंतु किसी भी स्थान की आवश्यकता सिर्फ स्वावलंबन तो नहीं हो सकती। वहां स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कार आदि की आवश्यकताएं भी हो सकती हैं। यदि एक समविचारी संगठन स्वास्थ्य गतिविधियां संचालित कर रहा है तो दूसरे समविचारी संगठन को इस बात के लिए प्रेरित किया जाए कि वह शिक्षा, स्वावलम्बन, संस्कार अथवा दूसरी जरूरी सेवा गतिविधियां संचालित करें। यह कार्य तभी हो सकता है जब समविचारी सेवा संगठनों के मध्य समन्वय हो और वे किसी एक छत्र संस्था के बैनर तले एकजुट हों। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वर्ष २००३ में दिल्ली में राष्ट्रीय सेवा भारती का गठन किया गया। इसका पंजीकरण ८ दिसम्बर २००३ को हुआ। यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है जिसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता कि आज देशभर की ९५९ संस्थाएं राष्ट्रीय सेवा भारती से संबद्ध होकर आपस में मिल कर सेवा कार्य कर रही हैं। उम्मीद है कि इसी साल २०१८ में यह संख्या एक हजार को पार कर जाएगी। यहां एक बात का उल्लेख करना आवश्यक है कि राष्ट्रीय सेवा भारती स्वयं कोई सेवा प्रकल्प नहीं चलाती। यह सिर्फ सेवा संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए उन्हें एक मंच पर एकत्र करती है।
राष्ट्रीय सेवा भारती का उद्देश्य है, ‘‘राष्ट्रीय विचार वाली पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं और समर्पित कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास द्वारा देश के पिछड़े, पीड़ित और अभावग्रस्त बंधुओं को शिक्षित, स्वावलंबी और सशक्त कर सुदृढ़, समरस एवं संस्कारित समाज का निर्माण करने में सक्रिय सहयोग करना।’’ इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु अपने साथ आए स्वयंसेवी संगठनों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के साथ-साथ उनमें जागरण, सहयोग, प्रशिक्षण एवं अध्ययन जैसी गतिविधियों के माध्यम से सामूहिकता का भाव जाग्रत कर उनके कौशल विकास का कार्य वर्ष २००३ से ही जारी है। इस प्रयास के माध्यम से सेवा का एक विशाल चित्र उभरना शुरू हो गया है। देश के सभी राज्यों में सेवा संस्थाएं राष्ट्रीय सेवा भारती के साथ संबद्ध हुई हैं। यदि आंकड़ों की बात करें तो वर्ष २०१६-१७ की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देशभर में शिक्षा के १५,१७८, स्वास्थ्य के १९,८५७, सामाजिक के १९,८०४ और स्वावलंबन के २१,९७५ प्रकल्पों सहित कुल ७६ हजार सेवा प्रकल्प देश के सुदूर अंचलों में संचालित राष्ट्रीय सेवा भारती से संबद्ध संस्थाओं द्वारा संचालित हैं। इस वर्ष २०१७-१८ में यह संख्या और बढ़ेगी। समविचारी सेवा संस्थाओं को एक मंच पर एकजुट करने का सब से बड़ा लाभ यह हुआ है कि अब जिस स्थान पर एक संस्था कोई सेवा प्रकल्प संचालित कर रही है तो उसी स्थान पर दूसरी समविचारी संस्था उसी प्रकार का प्रकल्प संचालित करने की बजाए वह प्रकल्प शुरू करती है, जिसकी उस क्षेत्र में आवश्यकता है। यह एक बहुत बड़ा परिवर्तन है जिसके माध्यम से समाज की हर कमजोर कड़ी को मजबूती प्रदान करने में मदद मिलेगी।
जागरण: राष्ट्रीय सेवा भारती ने अपने कार्य को मुख्यत: चार प्रकार की गतिविधियों पर केन्द्रित किया है। इनमें शामिल हैं जागरण, सहयोग, प्रशिक्षण और अध्ययन। जागरण हेतु कई प्रकार की गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इनमें प्रमुख है प्रकाशन। इसके तहत ‘सेवा सागर’ पत्रिका का त्रैमासिक प्रकाशन किया जाता है और ‘सेवा साधना’ का वार्षिक अंक किसी न किसी खास बिन्दु पर केन्द्रित रहता है। इसके अलावा ‘सेवा दिशा’ का पांच वर्ष में एक बार प्रकाशन होता है। इसके अलावा ‘सेवा कुंज’ में अपने साथ जुड़ी सेवा संस्थाओं के सफल और प्रेरक प्रयोगों की जानकारी प्रकाशित की जाती है। साथ ही कुछ अन्य पुस्तकों तथा जागरण हेतु डिजिटल सामर्ग्री का प्रकाशन किया जाता है। ‘सेवा परमो धर्म’ में प्रेरणास्पद कहानियों का संग्रह किया जाता है। किशोरियों की समस्याओं पर केन्द्रित एक पुस्तक ‘समर्थ किशोरी’ का भी प्रकाशन किया गया। राष्ट्रीय सेवा भारती की वेबसाइट भी है जिसके माध्यम से नवीनतम जानकारी सभी लोगों के लिए उपलब्ध रहती है। जागरण का ही एक अन्य प्रमुख अंग है सेवा संगम का आयोजन। सभी प्रांतों में समविचारी सेवा संस्थाओं को एकजुट करते हुए समय समय पर सेवा संगम आयोजित किए जाते हैं और पांच वर्ष में एक राष्ट्रीय सेवा संगम आयोजित किया जाता है। अभी तक दो राष्ट्रीय सेवा संगम आयोजित हो चुके हैं। इस प्रयोग से सभी संस्थाओं का उत्साहवर्धन तो होता ही है साथ ही उन्हें एक साथ लेकर आगे बढ़ने में भी मदद मिलती है।
सहयोग: राष्ट्रीय सेवा भारती की गतिविधियों का दूसरा प्रमुख आयाम है सहयोग। इसके तहत प्रतिवर्ष दो ऐसे बिन्दुओं को चिन्हित किया जाता है जिनके कारण कार्य करने में कठिनाई हो रही है। फिर उन बिन्दुओं पर उन सभी संस्थाओं और उस विषय के विशेषज्ञों तथा यदि संभव हो सके तो सरकारी अधिकारियों को साथ बैठाकर विचार-विमर्श कर समाधान निकालने का प्रयास होता है। उदाहरण के लिए पिछले साल मातृछाया से जुड़े कुछ विषयों को लेकर कठिनाई महसूस की जा रही थी। इसकी जटिलताओं को दूर करने हेतु ६ फरवरी, २०१७ को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें केन्द्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री श्रीमती मेनका गांधी और उनके मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिल कर विस्तृत चर्चा की गई। गोष्ठी में १८ प्रांतों से ४८ संस्थाओं के ८६ प्रतिनिधि उपस्थित हुए। इसी प्रकार देशभर में चल रहे स्वयं सहायता समूहों को एकजुट करते हुए उन्हें दृढ़ता प्रदान की जा रही है। साथ ही इस प्रयोग को मजबूत करने के लिए देशभर में उनके विस्तार हेतु कार्यक्रम संचालित किये जाते हैं। नए प्रकल्प प्रांरभ करने और उन्हें व्यवस्थित करने तथा प्रभावी बनाने के लिए ‘वैभवश्री’ पुस्तिका तैयार की गई है। वर्ष २०१६-१७ के आंकड़ों के अनुसार देश के १८ प्रांतों में १४,८४० वैभवश्री प्रकल्प चल रहे हैं तथा २०२० तक हर प्रांत में स्वयं सहायता समूह प्रांरभ करने की बृहद योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राष्ट्रीय सेवा भारती से जुड़ी संस्थाएं सदैव सक्रिय रहती हैं। पिछले दिनों नेपाल में आए भूकंप तथा असम की बराक वैली में आए तूफान एवं बाढ़ से प्रभावित तीन जिलों में राहत कार्य किया गया। नेपाल में विद्यालय निर्माण हेतु चार करोड़ रुपये की मदद की गई।
प्रशिक्षण: राष्ट्रीय सेवा भारती के कार्य का तीसरा प्रमुख आयाम है प्रशिक्षण। इसके तहत कार्यकर्ता प्रशिक्षण और संबद्ध संस्थाओं के प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण हेतु विशेष प्रयास किए जाते हैं। ये प्रशिक्षण वर्ग देशभर में आयोजित किए जाते हैं। दिसम्बर २०१६ में अखिल भारतीय महिला प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन देहरादून में किया गया, जिसमें १७ प्रांतों से ४५ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का दूसरा महत्वपूर्ण बिन्दु है कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी यानि सीएसआर के संबंध में प्रशिक्षण। सीएसआर के तहत सेवा प्रकल्पों को वित्तीय मदद मिल सकती है। राष्ट्रीय सेवा भारती की सीएसआर समिति विभिन्न स्थानों पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करके संस्था प्रतिनिधियों को शिक्षित करती है। ऐसे प्रशिक्षण वर्ग गत वर्ष सात स्थानों यानि जम्मू, गोरखपुर, मेरठ, कानपुर, प्रयाग, बेंगलुरू एवं पुडुचेरी में आयोजित किए गए, जिनमें २९१ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। राष्ट्रीय सेवा भारती की कौशल विकास समिति भारत सरकार के राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के साथ प्रशिक्षण सहभागी के रूप में पंजीकृत है, जिसके तहत दस स्थानों पर प्रशिक्षण केन्द्र प्रारंभ करने की तैयारी है।
अध्ययन: यह राष्ट्रीय सेवा भारती के कार्य का महत्वपूर्ण आयाम है। देशभर में विभिन्न विषयों को लेकर अध्ययन कार्य चल रहे हैं। पिछले दिनों सुदूर पूर्वांचल के राज्यों से आकर देश के विभिन्न छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के अपने स्वयं के जीवन तथा उनके माध्यम से उनके अपने गांव अथवा आसपास के क्षेत्र में आने वाले परिवर्तन को लेकर एक अध्ययन किया गया था। इसी प्रकार देशभर में महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर एक विशेष अध्ययन देशभर में इस समय जारी है। यह अध्ययन मार्च तक संपन्न हो जाएगा। अध्ययन प्रारंभ करने से पूर्व १८-१९ मार्च २०१७ को नई दिल्ली में एक महिला प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं को १५ से ३५ आयु वर्ग की महिलाओं की सद्यस्थिति पर अध्ययन हेतु व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उस प्रशिक्षण वर्ग में देशभर से चयनित ६६ महिला कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
इन सब गतिविधियों के अलावा कुछ अन्य प्रकार की गतिविधियां भी राष्ट्रीय सेवा भारती द्वारा संचालित हैं। इनमें प्रकाशानंद सेवा धाम नाम से वजीराबाद स्थित (दिल्ली) में एक शोध एवं प्रशिक्षण केन्द्र प्रारंभ करने की योजना है।
राष्ट्रीय सेवा भारती एवं उससे जुड़ी सभी सेवा संस्थाओं का प्रमुख लक्ष्य है समाज की प्रत्येक कमजोर कड़ी को मजबूती प्रदान करते हुए सशक्त राष्ट्र के निर्माण में योगदान करना। इस दिशा में अभी तक के प्रयास निश्चित रूप से संतोषजनक कहे जा सकते हैं। इन प्रयासों को मजबूती प्रदान करते हुए निकट भविष्य में सशक्त समाज, सशक्त राष्ट्र के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा, यह विश्वास है।

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