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कुछ दिन पहले टी.व्ही. पर एक विज्ञापन देखा | जिसमें एक सूखे गाँव में पानी का शावर लगाया गया था, और गाँव के सब लोग उसी से पानी पी रहे थे | उसमें एक महिला की आवाज पीछे से चल रही थी, वह कहती हैं “ एक शावर में हमारे आधे गाँव ने पानी पी लिया, एक शहर वाले का नहाना खत्म ना हुआ | पानी का महत्व समझेंगे नहीं तो बचाएँगे कैसे ?” कितना सही कहा ना उसने ? उस विज्ञापन ने मेरा दिल छू लिया |

आज के समय में यदि देखें तो पानी की समस्या बड़े पैमाने पर हमारे सामने आ खड़ी है, लेकिन हम शायद अपने-अपने मोबाइल में इतने व्यस्त हैं कि इसे देख ही नहीं पा रहे | कुछ समय पहले संपूर्ण चेन्नई पानी के अभाव में धधक रहा था | दक्षिण अफ्रीका के केप टाऊन शहर के बारे में तो आपने सुना ही होगा, केप टाउन को पानी रहित घोषित कर दिया था | क्या आप सोच सकते हैं, कि ऐसा एक दिन के लिये भी हमारे साथ हुआ तो हम क्या करेंगे ? रोजमर्रा की जिंदगी में सुबह उठकर फटाफट काम निपटाना, खाना बनाना, ऑफिस जाना, आना और बाकी सारे काम करना, आप सोचिए हर चीज के लिये पानी की जरूरत होती ही है | लेकिन हमें यह ना मिले तो ? पूरा दिन बिगड़ जाता है | और जिनके साथ ये रोज हो रहा है, उनका क्या ? रहीम जी सही कह गये… “रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून…” बिना पानी के कुछ भी नहीं |

आज समय आ गया है कि सरकार के साथ-साथ हम भी पानी के संवर्धन में अपना योगदान दें | सरकार अपनी ओर से प्रयत्न कर ही रही है | यदि महाराष्ट्र को देखा जाए तो लातूर जैसे शहर, जहाँ पर एक समय में पानी के एक कुएँ पर ढेर सारे लोग अपनी जान की बाजी लगाए एक घड़े पानी के लिये खड़े रहते थे, सरकार के प्रयत्नों से ट्रेन के माध्यम से पानी प्राप्त कर रहे हैं | ‘जलयुक्त शिवार’ जैसी कई योजनाओं के माध्यम से लोगों के खेतों तक पानी पँहुच रहा है | केंद्र सरकार ने भी जल से संबंधित सभी समितियों को मिला कर जलशक्ति मंत्रालय की स्थापना की है, इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि पानी के लिए सरकार एक मंत्रालय स्थापन कर रही है | विविध राज्यों में सरकारें अपने-अपने तौर पर पानी के प्रश्न पर काम कर रही हैं | लेकिन कब तक हम केवल सरकार पर ही निर्भर रहेंगे ? वह तो अपना काम कर रही है लेकिन हम ?

कुछ समय पहले हुए ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जल के प्रश्न पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है | उन्होंने अपने इस कार्यक्रम में कहा “देश की जनता का एक ही लक्ष्य होना चाहिए, जल संवर्धन | पूरे देश में जल संवर्धन का कोई एक फॉर्म्यूला नहीं हो सकता, देश भर में अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग फॉर्म्यूले होने चाहिए, लेकिन सबका लक्ष्य एक होना चाहिए, जल संवर्धन | सामूहिक प्रयासों से बड़े परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं | हम एकजुट होकर मजबूती से प्रयत्न करें तो असंभव से असंभव कार्य भी संभव हो सकता है | जन-जन जुड़ेगा तब जल बचेगा | जिस प्रकार से स्वच्छ भारत अभियान एक आंदोलन बन गया, उसी तरह जल संरक्षण भी एक आंदोलन बनेगा तभी हम पानी बचा पाएँगे |” यदि इसका अमल किया जाए तो अवश्य ही इस समस्या का समाधान किया जा सकता है |

जल की स्थिती कैसी है ? आज पानी का प्रमाण कहाँ कितना है?, पहले  कितना था इस सबकी जानकारी आपको इंटरनेट पर मिल जाएगी, लेकिन जो नहीं मिलेगी वह है…. “पानी बचाने की प्रेरणा..” आज के समय में हमारी बिल्डिंग का ‘वॉटर सप्लाय’ एक दिन के लिये बंद हो जाए तो हम बिल्डिंग ऑफिस से लेकर सेक्रेटरी तक सबसे कंप्लेंट कर आते हैं, लेकिन खाना बनाते वक्त कभी सिंक में नल खुला रह जाए, या सब्जी धोने के लिये अधिक पानी लेकर वह बर्बाद हो जाए तो क्या हमारा ध्यान उसकी ओर जाता है ? उत्तर है नहीं | बाकी सब एक तरफ क्या हम पीने के लिये अधिक पानी ले कर बचे झूठे पानी को फेंक देते हैं ? क्या शादी पार्टी में जब हम ग्लास लेते हैं, तब बचा पानी बेकार हो जाता है, यह बूँद-बूँद पानी ही शायद हमारी भावी पिढी की जान बचा सकता है |

ज्यादा कुछ नहीं लेकिन हम एक बदलाव तो ला ही सकते हैं, जब घर पर मेहमान आए तो उन्हें छोटे ग्लास में या आधा ग्लास पानी दें | जब स्वयं भी पानी पीने के लिए लें तो आधा ग्लास ही लें, जरूरत पड़ने पर और लें लेकिन बर्बाद ना करें | तब ग्लास आधा भरा या आधा खाली प्रश्न नहीं रहेगा, पानी का संवर्धन होगा | शावर के स्थान पर बाल्टी, नल से पानी के बजाय मग्गे का उपयोग ऐसी कई चीजें हम कर सकते हैं |

यदि आज हमनें पानी बचाने के लिये कष्ट नहीं उठाए तो हमारी भावी पिढी शायद यह कहेगी :

“ पानी जो ढूँढन मैं चला, पानी मिलिया न कहूँ ओर,
  जो दो बूँद बचा लेता जल, होता चहुँ ओर |”

यदि भारत को केप टाउन बनाने से रोकना है, तो एक कदम उठाएँ, शुरुआत खुद से करें, तभी कुछ हो पाएगा अन्यथा परिस्थिती वही रह जाएगी.. ‘बिन पानी सब सून….”

 

This Post Has 3 Comments

  1. पानी इस विषय पर लेखक के विचार व शब्द समाज को प्रेरित करते है, इस प्रकार के लेख सतत। व सर्वत्र प्रकाशित हो ।

  2. लेखक ने भावनाओ से ओतप्रोत लेख लिखा है,देश के प्रत्येक नागरिक को समझना होगा कि जल हमारी अमूल्य धरोहर है,तभी हम पानी को बचा पाएंगे ।

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