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फिर उसी विश्वास के साथ वापस आऊंगा

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महाराष्ट्र में विधान सभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। लोकसभा चुनावों की तरह इस चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी की भारी विजय संभावित है। इसका संकेत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विधान सभा के अंतिम सत्र में किए भाषण में पढ़ी एक कविता से मिलता है-  फिर एक बार उसी विश्वास के साथ, मैं वापस आऊंगा..।

बिन पानी सब सून..

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कुछ दिन पहले टी.व्ही. पर एक विज्ञापन देखा | जिसमें एक सूखे गाँव में पानी का शावर लगाया गया था, और गाँव के सब लोग उसी से पानी पी रहे थे | उसमें एक महिला की आवाज पीछे से चल रही थी, वह कहती हैं “ एक शावर में हमारे आधे गाँव ने पानी पी लिया, एक शहर वाले का नहाना खत्म ना हुआ | पानी का महत्व समझेंगे नहीं तो बचाएँगे कैसे ?” कितना सही कहा ना उसने ? उस विज्ञापन ने मेरा दिल छू लिया |

प्रभावी संदेश देने में सफल हुए मोदी

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दो दिन पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काशी में एक भव्य रोड शो हुआ | इस रोड शो में लगभग ६ लाख से भी अधिक लोग शामिल हुए. इस रोड शो की कई  तस्वीरे आज पूरे सोशल मीडिया पर व्हायरल हुई हैं, और जहां तक नजर जाती है केवल लोग ही लोग दिखाई पड़ते हैं |

आप क्या चुनेंगे प्रधानमंत्री या सांसद

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पिछले कई  दिनों से पूरे देश में जनता देश के सबसे बड़े त्यौहार की तैयारी में जुट गयी है | आप सोशल मीडिया खंगाल के देंखे तो आपको ९०% से अधिक पोस्ट्स चुनाव से संबंधित ही मिलेंगे | लेकिन इन सभी पोस्ट्स में एक समानता देखी गयी है और वह समानता यह है कि, इन पोस्ट्स पर आने वाले कमेंट्स में अधिकतर लोग एक - दूसरे से वाद - विवाद करते हुए दिखाई देते हैं |

क्या टुकडे टुकडे गैंग के हाथ देश बेचना चाहती है काँग्रेस ? 

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कुछ दिन पूर्व काँग्रेसने अपना मॅनिफेस्टो जारी किया | और पुन: एक प्रश्न उठ गया, कि क्या काँग्रेस को देश की सुरक्षा से कोई दरकार नहीं? क्या काँग्रेस के लिये देश से प्यारी ये टुकडे टुकडे गैंग हो गयी? या देश और गरीबों के लिये काम करने का काँग्रेस का सिर्फ दिखावा है | ये सब इसलिये क्यूँ कि, काँग्रेस ने अपने मॅनिफेस्टो में यह लिखा है कि, यदि इस चुनाव में काँग्रेस जीतती है, और सरकार बनाती है तो देशद्रोह के लिये सजा देने वाला कानून याने की धारा १२४ ‘अ’ को वे हटा देंगे |

ऑनलाइन  युवाओं की नजरों में अबकी बार किसकी सरकार?

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आने वाले कुछ दिनों में चुनाव है| पुन: एकबार चुनावी रणसंग्राम शुरु हो जाएगा| पुन: एकबार जनता को कई तरह के प्रलोभन दिये जाएँगे, पुन: एकबार ‘अगर हम सरकार में आये तो जनता को यह मिलेगा, वह मिलेगा’ की रट लगना शुरु हो जाएगी| लेकिन सरकार चुनने का अर्थ प्रलोभनों को देखकर देश की सत्ता चुनना नहीं है| चुनाव का अर्थ है, अपना भविष्य चुनना| और देश का भविष्य देश के युवाओं के हाथ में हैं| यदि सोशल मीडिया का ठीक से अध्ययन किया जाए, तो युवाओं के मन में क्या है, इसका आपको अच्छे से आंकलन हो जाएगा|

आईना झूठ न बोले

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मैं आईना...वैसे मेरा और आपका रिश्ता तो सदियों पुराना है। मुझे देखे बिना आपका एक दिन भी गुजरता नहीं, और मुझ से बातें किए बिना आपको चैन भी नहीं पड़ता। तो अगर कभी श्रृंगार में कोई कमीं रह जाए तो खरी-खोटी मुझे ही सुननी पड़ती है, और कभी आप अति सुंदर लगें तो डिठूला कभी-कभी आपके साथ मुझे भी लग जाता है। तो ऐसा है हमारा रिश्ता सदियों पुराना। आज इसी रिश्ते की एक कहानी सुनाने जा रहा हूं... मेरी और उसकी कहानी...

बदलता हुआ शॉपिंग ट्रेंड

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ऑनलाइन शॉपिंग आज की दौड़ती जिंदगी की एक जरूरत बन गई है। इसके कई फायदे और कुछ नुकसान भी हैं, लेकिन यदि सावधानी बरती जाए, तो यह एक सुखद अनुभव भी हो सकता है। अत: सावधान रहें और खरीदारी का खूब आनंद लें। कल ही मेरी एक सहेली का फोन आया। कह रही थी, ‘क्या बात है बड़े दिन हुए हम गंजीपुरा नहीं गए खरीददारी करने, कब चलोगी?’ मैंने कहा, ‘हां भई दिवाली है अब तो जाना बनता ही है, चलो दो तीन दिन में हो आते हैं’ और हमने फोन रख दिया। लेकिन फोन रखने के बाद मैं सोच में पड़ गई। कुछ साल पूर्व हर त्यौहार क

लो आ गई स्टाइलिश ठंड

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      ठंड आते ही धूप सुनहरी लगने लगती है। कुनकुना पानी नहाते समय आरामदायक लगता है, और रात को सोते वक्त रजाई हमारी सबसे अच्छी सहेली बन जाती है। लेकिन इन सब के अलावा ठंड में सुंदर दिखने के लिए हमारे पास ढेरों तरीके भी उपलब्ध हो जा

फैशन की शुरुआत गांवों से…

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गांव की मिट्टी की खुशबू कौन भूल सकता है भला? गांवों की बात ही निराली होती है। चाहे वह मिट्टी की सौंधी खुशबू हो, या फिर गांव की बोली, या वहां का पहनावा। वैसे भारत जैसे कृषि प्रधान देश में गांवों की संख्या भी अधिक है। हर गांव का रंग एक दूसरे से अलग और निर

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