हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

पुणे. अपंग कल्याणकारी संस्था के ६३ वें वर्धापन दिन के उपलक्ष्य में बीते दिनों पूर्व छात्रों ने मिलकर स्नेह सम्मलेन का आयोजन किया. सम्मलेन का शुभारंभ भारत माता के पूजन और संस्था के संस्थापक डॉ. रघुनाथ राव काकडे जी के अभिवादन से हुआ. संस्था के कार्याध्यक्ष एड. मुरलीधर कचरे ने संस्था द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न उपक्रमों के बारे में संक्षेप में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने कर्तव्य परायण प्रतिभाशाली पूर्व दिव्यांग छात्रों का सम्मान भी किया. इससे अभिभूत होकर छात्रों ने भी अपनी मनोभावना जाहिर करते हुए कहा कि अपंग कल्याणकारी शिक्षण संस्था द्वारा स्वावलंबन और आत्मविश्वास की शिक्षा मिलने के कारण ही हम आज समाज जीवन में स्वाभिमान के साथ जीवनयापन कर रहें है. सम्मानजनक जीवन जीने की प्रेरणा हमें संस्था द्वारा मिली है. इसके लिए हम संस्था और शिक्षकों का सदा ही आभारी रहेंगे.

प्रमुख अतिथि नितिन महिन्द्रकर ने पूर्व दिव्यांग छात्रों के साहस, परिश्रम एवं आत्मविश्वास की सराहना करते हुए उन्हें सलाम किया और कहा कि दिव्यांग होते हुए भी यह युवा सब कुछ कर सकते है जो एक सामान्य व्यक्ति कर सकता है. उन्होंने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना की और उनके कार्यो का खूब बखान किया. प्रमुख वक्ता सुहास राव हिरेमठ ने अपने वक्तव्य में कहा कि व्यक्ति स्वाभिमानी और स्वावलंबी होना चाहिए. उत्तम शिक्षा, परिश्राम, कला, कौशल आदि गुण होने पर व्यक्ति को परावलम्बी नहीं होना चाहिए.

इस सम्मलेन में आभार प्रदर्शन सौ. लता ताई बने ने किया और एकात्मता मन्त्र से कार्यक्रम का समापन किया गया.

संस्था के उपाध्यक्ष दिलीप भाई मेहता, मानद सचिव सौ. लता ताई बने, सहसचिव शंकर राव जाधव, कोषाध्यक्ष प्रकाश तिलेकर, बापू साहेब जगदाले, उप कोषाध्यक्ष किशोर मेहता, सदस्य रविन्द्र हिरवे, मारुती राउत, दिनेश होले, बाला साहेब कचरे, तथा सक्षम संस्था के पदाधिकारी सहित संस्था के अन्य मान्यवर बड़ी संख्या में उपस्थित थे.

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu

विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

स्वंय के लिए और अपने परिजनों के लिए ग्रंथ का पंजियन करें!
ग्रंथ का मूल्य 500/-
प्रकाशन पूर्व मूल्य 400/- (30 नवम्बर 2019 तक)

पंजियन के लिए कृपया फोटो पर क्लिक करें

%d bloggers like this: