राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने पालघर में साधुओं की निर्मम हत्या का किया विरोध

  • पालघर में दो साधुओं की हत्या का मामला गंभीर 
  • राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने की घटना की निंदा
  • महाराष्ट्र सरकार से संघ की अपील 
  • दोषियों के खिलाफ हो यथोचित कार्रवाई 
मुंबई से सटे पालघर में दो साधुओं की निर्मम हत्या के बाद अब यह मामला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। राजनीतिक बयानों के साथ साथ अब तमाम तरह के संगठन भी इस हत्या का विरोध करने लगे हैं। वही इस मामले में अब राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने भी दखल दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक बयान जारी कर इस घटना की घोर निंदा की और कहा ऐसे राह चलते किसी साधु की हत्या करना घोर निंदनीय अपराध है इस हत्या में शामिल सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। संघ की तरफ से सरकार से भी निवेदन किया गया कि इस घटना के पीछे की सच्चाई पता करना बहुत जरुरी है। इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाना आवश्यक है वर्ना समाज में विघटन की स्थिति पैदा हो सकती है।
जूना अखाड़े के दोनों साधुओं की हत्या पर नाराजगी जताते हुए संघ ने कार्यवाही की मांग की है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार के एक बयान को संघ ने अपने टि्वटर हैंडल पर भी शेयर किया है। संघ ने अपने टि्वटर हैंडल पर लिखा है “पालघर जिले में पूजनीय संतों की निर्मम हत्या पर अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री अरुण कुमार जी का वक्तव्य, महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक दूरस्थ गांव में जूना अखाड़े के पूज्य संतों महंत कल्पवृक्ष गिरी जी महाराज और पूजनीय सुशील गिरी जी के दुखद, निर्मम हत्या की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कठोर निंदा करता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाराष्ट्र सरकार से यह अपेक्षा करता है कि इस पूरे षडयंत्र को उजागर करते हुए वास्तविक दोषियों को गिरफ्तार कर यथोचित दंड सुनिश्चित करें”

मुंबई के कांदीवली के एक आश्रम से यह दोनों संत सूरत एक अंतिम संस्कार में भाग लेने जा रहे थे इसके लिए इन्होंने एक गाड़ी भी किराए पर ली थी लेकिन जैसे यह लोग पालघर के पास पहुंचे तो इन पर गांव वालों ने हमला कर दिया। गांव वालों के मुताबिक उन्होंने इन दोनों संतों को चोर समझा। इस घटना के दौरान पुलिस भी मौके पर पहुंच गई, पुलिस ने पहले तो दोनों साधुओ को भीड़ से बाहर निकाला और इन्हें लेकर जाने लगे लेकिन भीड़ का उन्माद देखकर पुलिस खुद की जान बचाने लगी और दोनो साधुओं को भीड़ के हवाले कर दिया। जिसके बाद भीड़ ने लाठी-डंडे और पत्थर से मार-मार कर दोनों साधुओं की हत्या कर दी। भीड़ ने साधुओं की गाड़ी के ड्राइवर को भी नहीं छोड़ा उसे भी पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया। वहीं पूरे देश में जारी विरोध के बाद महाराष्ट्र सरकार की आंखें खुली और उन्होंने दो पुलिसवालों को सस्पेंड किया और 110 लोगों को पुलिस हिरासत में रखा गया है।

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