महाराष्ट्र: राज्यपाल से उद्धव ठाकरे को झटका, चुनाव आयोग को लिखा पत्र कहा…

  • राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से उद्धव ठाकरे को झटका
  • राज्यपाल ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र 
  • महाराष्ट्र में खाली पड़ी है 9 सीटें 
  • कोरोना से पहले 24 अप्रैल को होना था चुनाव 
महाराष्ट्र में कोरोना की लड़ाई के साथ साथ अब सियासी लड़ाई भी नजर आने लगी है और इसके लिए सियासी मैदान भी तैयार होता नजर आ रहा है। उद्दव ठाकरे के सामने दो दो चुनौतियां पैदा हो गयी है उन्हे जनता के लिए कोरोना से लड़ाई लड़नी है और सीएम की कुर्सी बचाने के लिए खुद का भी बचाव करना है। उद्दव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर 28 मई को 6 महीने पूरे हो जायेगें लेकिन अभी तक वह उन्होने किसी भी सदन की सदस्यता नहीं ली है जिससे अब उनकी कुर्सी पर खतरे का बादल नजर आ रहा है क्योंकि कोरोना वायरस की वह से चुनाव रद्द हो गये है जिसके बाद उद्धव ठाकरे के पास आखिरी मौका राज्यपाल से सिफारिश करने का था क्योकि राज्यपाल के पास किसी को भी मनोनीत करने का अधिकार होता है लेकिन उद्धव मंत्रीमंडल के दो बार सिफारिश करने के बाद भी राज्यपाल ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया जिससे उद्धव ठाकरे की चिंता बढ़ गयी है।
उद्धव मंत्रिमंडल के निवेदन के बाद भी राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे को सदन का सदस्य मनोनीत नहीं किया बल्कि गुरुवार को चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर चुनाव कराने की सलाह दे दी है और इसी के साथ ही राज्यपाल ने चुनाव आयोग के पाले में गेंद डाल दी अभी तक जहां सभी को राज्यपाल के फैसले का इंतिजार था वहीं अब फिर से फैसला चुनाव आयोग के पास चला गया। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने चुनाव आयोग को पत्र में लिखा कि राज्य की खाली पड़ी 9 सीटों पर चुनाव की तारीख घोषित करें। राज्यपाल ने कहा कि केंद्र सरकार लॉक डाउन के दौरान कई तरह की छूट दे रही है वहीं 3 मई के बाद से लॉक डाउन में कमी भी देखने को मिल सकती है जिससे चुनाव की तारीख पर विचार किया जाना चाहिए। उद्धव ठाकरे अभी तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं है और उन्हे 27 मई से पहले किसी भी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है जिससे चुनाव आयोग को खाड़ी पड़ी सीटों पर चुनाव कराना होगा।

इससे पहले 24 अप्रैल को महाराष्ट्र में खाली पड़ी 9 सीटों पर चुनाव होना था जिसके लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने तैयारी भी की थी लेकिन अचानक से शुरु हुआ कोरोना वायरस की वजह से चुनाव आयोग ने यह चुनाव निरस्त कर दिया। उद्धव ठाकरे चाहते थे कि राज्यपाल उनके अधिकार के तहत आने वाली दो सीटों पर उन्हे मनोनीत कर दें और इसके लिए उद्धव मंत्रिमंडल की तरफ से दो बार राज्यपाल के पास सिफारिश की गयी लेकिन राज्यपाल ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया। जिसके बाद अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर बने रहने के लिए उद्धव ठाकरे के पास चुनाव आखिरी रास्ता बचा हुआ है। वहीं इस मामले को लेकर उद्धव ठाकरे ने बुधवार को पीएम मोदी से भी फोन पर बात की थी।
सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल की तरफ से मौखिक रुप से यह कहा गया कि उन्हे मनोनीत करने का अधिकार है लेकिन उसके लिए व्यक्ति का खेल, कला, सामाजिक क्षेत्र और लेखन जैसे क्षेत्र से होना जरुरी है और उद्धव ठाकरे इसमें से किसी भी क्षेत्र से ताल्लुक नहीं रखते है इसलिए उन्हे मनोनीत नहीं किया जा सकता। वहीं सरकार के गठबंधन के एक नेता की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया कि राज्यपाल जानबूझ कर मनोनीत नहीं कर रहे है क्योकि उद्धव ठाकरे को पद से हटाने पर बीजेपी का फायदा हो सकता है इसलिए यह पूरा खेल जानबूझ कर खेला जा रहा है।

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