एकात्मता की नींव का शिलान्यास

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भारत की संसदीय प्रणाली में हिंदुत्व के प्रस्थापन के भय से चलाए जाते थे। क्योंकि तथाकथित सेक्युलर इस बात से डरे हुए थे कि अगर भारत का मुखिया हिंदू है, हिंदुत्व उसकी आस्था का विषय है, यह स्थापित हो गया तो विश्वभर में भारत की छवि हिंदू राष्ट्र के रूप में उभरेगी और सभी तथाकथित सेक्युलर लोगों को अपनी दूकानें बंद करनी होंगी

पितांबरी की ओर से अयोध्या श्रीराममंदिर के लिए आर्थिक दान

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दि. 5 अगस्त 2020 यह दिन समस्त हिंदू बांधवों के लिए अत्यंत आनंद का, उत्साह का पावन, मंगल दिन है। 492 वर्षों के संघर्ष के बाद सभी हिंदुओं के श्रध्दास्थान मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभुश्रीरामचंद्रजी की जन्मभूमी पर इस दिन भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया।

राम मंदिर विश्व-बंधुत्व और मानवता के लिए वरदान

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 अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर प्रसिद्ध साध्वी ॠतंभरा से ‘हिंदी विवेक’ ने विस्तृत बातचीत की। साध्वीजी ने श्री राम के जीवन मूल्यों, जन जन की आस्था, वैश्विक परिवार भाव आदि भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों पर समेत नई शिक्षा नीति पर भी अपने विचार प्रकट किए। प्रस्तुत है इसी के महत्वपूर्ण अंशः

रामो राजमणि सदा विजयते

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जिस प्रकार रावण जैसी दुष्ट प्रवृत्ति पर विजय प्राप्त कर भगवान श्रीराम अयोध्या वापस लौटे थे, उसी प्रकार आज भी समाज की दुष्ट प्रवृत्तियों का अंत कर प्रभु श्रीराम फिर एक बार अयोध्या लौट रहे हैं। मंदिर के शिलान्यास का दिन करोड़ों हिंदुओं के लिए गर्व और खुशी का दिन होगा।

बाबरी विध्वंस से पड़ी भव्य श्रीराम मंदिर की नींव

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“इसका मुझे बहुत आनंद है कि मैं उस समय कार सेवा में गया था। वह मेरे जीवन का अविस्मरणीय गौरवमय दिन था। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे राम काज करने का मौका मिला। उस स्वर्णिम दिन को स्मरण कर गर्व की अनुभूति होती है।”

धारा 370 और 35A की समाप्ति की प्रथम वर्षगांठ

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जम्मू-कश्मीर में धारा 370 व 35-ए को खत्म होकर इस वर्ष 5 अगस्त को एक वर्ष हो जाएगा। इस अवसर पर प्रस्तुत है उसकी पृष्ठभूमि।

मर्यादा की हर कसौटि पर खरे उतरे राम

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’मर्यादा पुरुषोत्तम’ की उपाधि एक बहुत महान और कठिन कर्तव्य है, और प्रभु श्री राम जीवन के हर पड़ाव पर अपने इस कर्तव्य पर बिल्कुल खरे उतरे हैं।

राम मंदिर का निर्माण राष्ट्र के आत्मविश्वास का पुनर्जागरण

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अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर, 5 अगस्त को होने वाले उसके शिलान्यास, राम जन्मभूमि आंदोलन, और राम मंदिर को लेकर राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े प्रश्नों पर राम जन्मभूमि न्यास के कोषाध्यक्ष गोविन्ददेव गिरी महाराज से ‘हिंदी विवेक’ से हुई प्रदीर्घ और सीधी बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तुत है।

आओ मेरे राम तरस रही अखियां

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श्री राम जन्मभूमि मंदिर की और उसके फलस्वरूप उसके भूमि पूजन का भाव ही शरीर को रोमांचित करता है, मन को परमानंद की अनुभूति और बुद्धि को निर्मल करके कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अतः यह संपूर्ण श्री राम जन्मभूमि आंदोलन की घटनाएं आज के युग में त्रेता युग की उन घटनाओं की बिम्ब ही प्रतीत होती हैं।

राम के जीवन मूल्य ही वर्तमान समस्याओं का हल                                

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प्रभु रामच्रद्र के दिव्य जीवन का आविष्कार यदि आज के समय हो गया तो श्रीराम का अयोध्या में बन रहा भव्य मंदिर सम्‍पूर्ण विश्व के लिए वरदान साबित होगा। सम्‍पूर्ण विश्व का हित साधने वाली भारतीय जीवन दृष्टि इस तरह पुनः उदित होकर विश्व में पहुंची तो आज का अशांत वैश्विक मानव कुछ शांति पा सकेगा और वर्तमान समस्याओं का बहुत बड़ी मात्रा में निराकरण हो सकेगा।

रेशम की डोरी से संसार बांधा है

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राखी के ये गीत हमें एक ऐसी दुनिया में ले जाते हैं, जहां रिश्तों में ऊष्मा है, आत्मीयता है, अपनापन है, जीवन में छोटी छोटी खुशियां तलाशने की ललक है, अपनों से मिलने की आकांक्षा और न मिल पाने का दर्द है।

हिंदुत्व के पुनर्जागरण का शक्तिकेंद्र

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इस माह की पांच तारीख भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस लेकर आ रही है जिसका स्वप्न भारत में और भारत के बाहर रहने वाले लाखों हिंदुओं की आंखों में था। विगत कई वर्षों की लम्बी लड़ाई के बाद अंतत: अयोध्या में श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर बनने जा रहा है।

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