लम्पी त्वचा रोग का प्रकोप

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देश के कई राज्य लम्पी वायरस की चपेट में हैं। हजारों गायें काल कवलित हो चुकी हैं। जानवरों को टीका लगाने का कार्य बहुत तेजी से चल रहा है लेकिन अभी भी लम्पी वायरस से होने वाला त्वचा रोग अपने उफान पर है। किसानों की आर्थिक स्थिति पर इसका काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

इतिहासकार,बौद्धिक योद्धा डॉ. स्वराज्य प्रकाश गुप्त

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डा. गुप्त की प्रतिभा श्री रामजन्मभूमि आन्दोलन के दौरान खूब प्रकट हुई। जहाँ एक ओर वामपन्थी श्रीराम को कल्पना बता रहे थे, वहाँ कांग्रेस मन्दिर के अस्तित्व को ही नकार रही थी। ऐसे में जब हिन्दू तथा मुस्लिम पक्ष में वार्ताओं का दौर चला, तो डा0 गुप्त हिन्दू पक्ष की कमान सँभालते थे। उनके तर्कों के आगे दूसरा पक्ष भाग खड़ा होता था। छह दिसम्बर को बाबरी ध्वंस से जो अवशेष मिले, उन्होंने बड़े साहसपूर्वक उनके चित्र लिये और बाबरी राग गाने वालों को केवल देश ही नहीं, तो विदेश में भी बेनकाब किया।

स्वाभिमानी राजा विजय सिंह का शौर्य

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राजा विजय सिंह ने विदेशी और विधर्मी अंग्रेजों के आगे सिर झुकाने की बजाय उन्हें अपनी रियासत से बाहर निकल जाने का आदेश सुना दिया। वीर सेनापति कल्याण सिंह भी राजा के दाहिने हाथ थे। 1822 ई. में सेनापति के सुझाव पर राजा विजय सिंह ने अपनी जनता को आदेश दिया कि वे अंग्रेजों को मालगुजारी न दें, ब्रिटिश राज्य के प्रतीक सभी चिन्हों को हटा दें, तहसील के खजानों को अपने कब्जे में कर लें तथा जेल से सभी बन्दियों को छुड़ा लें। जनता भी अपने राजा और सेनापति की ही तरह देशाभिमानी थी। उन्होंने इन आदेशों का पालन करते हुए अंग्रेजों की नींद हराम कर दी।

वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत 40वें स्थान पर आया

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हालांकि दुनिया में वैज्ञानिक और अभियंता पैदा करने की दृष्टि से भारत का तीसरा स्थान है। लेकिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी साहित्य सृजन में केवल पाश्चात्य लेखकों का ही बोलबाला है। पश्चिमी देशों के वैज्ञानिक आविष्कारोंसे ही यह साहित्य भरा पड़ा है। भारत में भी इसी साहित्य का पाठ्य पुस्तकों में अनुकरण है। इस साहित्य में न तो हमारे प्राचीन वैज्ञानिकों की चर्चा है और न ही आविष्कारों की। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि हम खुद न अपने आविष्कारको को प्रोत्साहित करते हैं और न ही उन्हें मान्यता देते हैं। इन प्रतिभाओं के साथ हमारा व्यवहार भी कमोबेश उपहासपूर्ण अभ्रद रहता है।

जीती-जागती आभासी दुनिया मेटावर्स

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बहुत जल्दी ही हम सब एक नई वर्चुअल दुनिया में प्रवेश करने वाले हैं। मेटावर्स की दुनिया में आप हर तरह का व्यापार और मनोरंजन कर सकते हैं और वहां के व्यापार सेे पाया पैसा वास्तविक बैंकों में जमा भी करवा सकते हैं। वह दुनिया एक क्रांति लाएगी और साथ ही हम सब को कुछ परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। हमारी प्राइवेसी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी, लत लगने के अलावा सेहत से जुड़ी बहुत सारी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

जिनके घर शीशे के हों…

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अमेरिका अपने आपको दुनिया का चौधरी और लोकतंत्र का रक्षक समझता है। हर राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था पर उंगली उठाना उसकी नीति का हिस्सा रहा है लेकिन सलमान रूश्दी पर हुआ जानलेवा हमला वहां की सुरक्षा नीति पर सवाल उठाता है। अमेरिकी नीति नियंताओं को आगे से दूसरे पर उंगली उठाने से पहले अपने पहलू में झांकना चाहिए। 

मिटना ही चाहिए यह कलंक

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2 अक्टूबर 1985 को भले ही दहेज विरोधी कानून लागू किया गया लेकिन आज भी दहेज धड़ल्ले से जारी है, बल्कि अब ज्यादा खतरनाक रूप ले चुका है। कितने ही घरों की जीवन भर की जमापूंजी अपनी बेटी को बेहतर घर देने में समाप्त हो जाती है। साथ ही, 498 क के दुरुपयोग के मामलों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाया जाना भी आवश्यक है।

सरकता जाए है नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता

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लगातार पड़ रहे छापों से भ्रष्टाचारियों में खलबली मची हुई है। ईमानदारी का ढोल पीटने वाली आम आदमी पार्टी के मंत्रियों के भी सैकड़ों करोड़ के घोटाले पकड़ में आ रहे हैं। इनसे लोगों की नजर में केद्र सरकार की विश्वसनीयता बढ़ी है क्योंकि 8 सालों से केंद्र में घोटालाविहीन सरकार चल रही है।

भारत के क्रांति ऋषि का महाप्रयाण

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महान संत, भाषाविद्, लेखक और वक्ता के तौर पर विश्व भर में जाने जाने वाले आचार्य धर्मेन्द्र का जाना राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन संस्कृति के उत्थान में लगाया। उनके पूर्वज महात्मा गोपालदास ने जजिया कर के विरुद्ध औरंगजेब के दरबार में कटार से अपना पेट फाड़ लिया था। आपने रामजन्म भूमि के कार्य को सर्वोपरि माना सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए तमाम आंदोलनों और समाज सुधार के कार्यों में भाग भी लिया।

सावरकर को था डॉ. हेडगेवार पर अटल विश्वास

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नि:शस्त्र प्रतिरोध के प्रेरणा पुरुष स्वातंत्र्यवीर सावरकर थे। सावरकर और सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार में परस्पर स्नेह,आदर और सामंजस्य था। डॉ. हेडगेवार की भूमिका के बारे में सावरकरजी के क्या विचार थे? इसका अनुमान डॉ. हेडगेवार के जाने के बाद हिंदू महासभा के अध्यक्ष के रूप में सावरकर द्वारा 13 जुलाई, 1940 में  नए सरसंघचालक गोलवलकर गुरुजी को मूलत: अंग्रेजी में लिखे पत्र से होता है। डॉ. हेडगेवार के प्रति अत्यधिक स्नेह का उल्लेख करते हुए सावरकर लिखते हैं, "डॉ. हेडगेवार के जीवन काल में पूरे हिंदुस्तान में संघ की सैंकड़ों सभाओं को संबोधित करने का मुझे अवसर मिला। लेकिन संघ के विषय में कहना हो, तो किसी भी प्रश्न पर डॉ. हेडगेवार का ही शब्द अंतिम होना चाहिए और मुझे उनके बुद्धि विवेक पर पूर्ण आत्मविश्वास था"

भारत का 5G की दुनिया में प्रवेश

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5G उपरोक्त सारी क्रांतियों को बौना साबित करेगा. 4G के मुक़ाबले इसकी स्पीड 100 गुना होगी. यानी पलक झपकते 3 घंटे की मूवी 3 सेकण्ड में आपके मोबाइल में डाउनलोड हो जाएगी. डॉक्टर रोबोटिक सर्जरी कर सकेंगे. 3D वीडियो कॉलिंग की कल्पना शायद साकार हो जाएगी. 

खालिस्तान का प्रखर विरोधी ‘राष्ट्रीय सिख संगत’

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पंजाब भारत की खड्गधारी भुजा है। पंजाबियों ने सर्वत्र अपनी योग्यता और पौरुष का लोहा मनवाया है; पर एक समय ऐसा भी आया, जब कुछ सिख समूह अलग खालिस्तान का राग गाने लगे। इस माहौल को संभालने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ‘राष्ट्रीय सिख संगत’ का गठन कर इसकी जिम्मेदारी वरिष्ठ प्रचारक श्री चिरंजीव सिंह को दी।

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