कोरोना पर सोनिया गांधी ने बुलाई विपक्षी दलों की बैठक, केंद्र सरकार और मजदूरों पर होगी चर्चा

  • कांग्रेस जल्द करेगी विपक्षी दलों के साथ बैठक
  • सोनियां गांधी ने सभी विपक्षी दलों को भेजा न्यौता
  • बैठक में 20 से अधिक दलों के शामिल होने की उम्मीद
  • केंद्र सरकार और मजदूरों पर होगी चर्चा 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी के बीच मजदूरों को लेकर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। इसी बीच खबर आ रही है कि अब कांग्रेस सभी विपक्षी पार्टियों के साथ एक बैठक करने जा रही है। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को दोपहर 3 बजे यह बैठक हो सकती है। इस बैठक में करीब 28 पार्टियां भाग ले सकती हैं। कांग्रेस की तरफ से सभी विपक्षी दलों को इसकी जानकारी दे दी गई है जिसमें से कुछ दलों ने इस पर सहमति भी जता दी है जबकि कुछ दल अभी भी इस पर अपना अंतिम फैसला नहीं दे सके हैं।
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, एनसीपी नेता शरद पवार, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, डीएमके नेता एम के स्टैलिन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित तमाम नेता इस बैठक में भाग लेंगे। हालांकि अभी तक उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी की तरफ से कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। कांग्रेस की तरफ से यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी जिसमें वर्तमान में श्रमिकों के पैदल चलने का मुद्दा उठाया जाएगा। कांग्रेस काफी समय से केंद्र सरकार के कामकाज से नाखुश है और हमेशा यह मांग कर रही है कि देश में मजदूरों के साथ अन्याय हो रहा है। कांग्रेस की तरफ से यह भी आरोप लगाया जाता है कि लॉक डाउन के दौरान केंद्र सरकार राज्यों के साथ सहयोग नहीं कर रही है साथ ही केंद्र का लॉक डाउन लगाने का फैसला भी सही नहीं है क्योंकि बिना किसी पूर्व सूचना के लॉक डाउनलोड आया गया है जिससे श्रमिक बुरी तरह से परेशान हो रहे हैं।
देश में जारी लॉक डाउन के दौरान अलग-अलग राज्यों से मजदूर पैदल ही अपने घरों को जा रहे हैं क्योंकि उनके पास अब खाने और पीने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। वह हजारों किलोमीटर की पैदल यात्रा करने को मजबूर हो चुके हैं उन्हें सरकार या स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं दी जा रही है और जो मदद दी जा रही है तो वह काफी नहीं है। इस दौरान तमाम हादसे भी सामने आए हैं जिसमें मजदूरों की मौत हुई है। वही लगातार बड़े राज्यों से मजदूरों के पलायन को लेकर सरकारें भी चिंतित हैं कि अगर शहरों से सभी मजदूरों का पलायन हो जायेगा तो इसका बुरा असर उद्योग पर पड़ेगा।

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