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****नंदिनी त्रिपाठी****
गंगा, भारत की महज एक नदी नहीं बल्कि संस्कृति है इसलिए उसे सांस्कृतिक नदी की संज्ञा प्राप्त है। उसके जल
में मां की ममता समाई है। हर भारतीय के लिए सर्वप्रिय है; हर भारतीय के जीवन के ताने-बाने में उसकी स्मृतियां जुड़ी हैं; वह सदियों पुरानी संस्कृति एवं सभ्यता की प्रतीक रही है; हर क्षण परिवर्तन, हर क्षण प्रवाहमान होने के बावजूद गंगा अपने दामन में करोड़ों की आस्था समेटे है, प्रकृति का सौंदर्य संजोये है।
मानवीय इतिहास की सबसे प्राचीनतम नदियों में से एक मां गंगा भारतीय जीवन के हर पहलू से गहराई से जुड़ी हुई है। ५० करोड़ लोगों की जीवन रेखा मानी जाने वाली गंगा अपने आप में समग्र पारिस्थितिकी तंत्र है जिसमें विविध प्रकार के असंख्य पादप एवं जीव प्रजातियां प्रवास करती हैं। अत: यह हमारी समृद्धि, संस्कृति, विरासत, सभ्यता एवं दर्शन का प्रतिबिम्ब भी है। यह भारतीय जीवन का वर्तमान, भूत और भविष्य है। गंगा के बिना भारत अपूर्ण है। भारत की संस्कृति अपूर्ण है, इतिहास अपूर्ण है, दर्शन अपूर्ण है। जिस देश का दर्शन एवं इतिहास अपूर्ण होता है वह देश अस्तित्व विहीन हो जाता है। अगर भारत का अस्तित्व बचाना है तो गंगा का अस्तित्व बचाना, उसकी अस्मिता की रक्षा करना हर भारतीय का राष्ट्रीय कार्य होना चाहिए।
कल-कारखानों का अधिकाधिक निर्माण हो रहा है, उनसे निकलने वाला अपशिष्ट नदियों में डाला जाता है जिससे नदियों का जल जहरीला होता जा रहा है। अपने अवतरण से लेकर पिछले ५० वर्ष पहले तक गंगा, मां गंगा ही रही। प्रदूषित कभी नहीं हुई किन्तु गंगा अब पूर्ण संकट मेंं है। उसका अस्तित्व खतरे में है। मां गंगा के इस खतरे को देखकर तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गंाधी ने १९७६ में केन्द्रीय जल प्रदूण एवं नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंगा नदी का व्यापक सर्वेक्षण करवाया जिसकी रिपोर्ट के आधार पर प्रधान मंत्री बनने के बाद राजीव गांधी ने १९८५ में गंगा एक्शन प्लान शुरू करवाया। फलस्वरूप गंगा के प्रदूषण में ३९ प्रतिशत कमी आई थी, किन्तु जन-सहभागिता के अभाव में गंगा एक्शन प्लान आशा के अनुरूप सफल नहीं हो पाया और गंगा की स्थिति दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही थी। २००१ में सम्पन्न इलाहबाद महाकुम्भ के दौरान गंगा कराह रही थी। गंगा के दर्द को कुम्भ के दौरान कुछ संतों ने अपना दर्द समझा; उस दर्द को दिल से महसूस किया। गंगा के दर्द के निवारण की वीणा उठाई, जिसका नाद २०१० में हरिद्वार महाकुम्भ मेें सुनाई दी।
वीणा उठाने वाले संतों में अग्रणी संत हैं परमार्थ निकेतन ॠषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ‘मुनि जी’। पूज्य स्वामी जी का जीवन ईश्वर एवं मानवता की सेवा में समर्पित है। मात्र आठ वर्ष की उम्र में उन्होंने ईश्वरीय शक्ति की प्रेरणा से अपना घर छोड़ कर ईश्वर एवं मानवता की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। लम्बे अर्से तक हिमालय में ध्यान साधना की। ९ वर्षों तक अटूट साधना के पश्चात १७ वर्ष की आयु में अपने गुरू के आदेश से शिक्षा ग्रहण करने के लिए वापस आए। संस्कृत एवं दर्शन में स्नात्तकोत्तर की उपाधि ग्रहण की एवं कई भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। एकता, सद्भावना एवं ईश्वरीय मार्ग पर अटूट आस्था स्वामी जी के धर्म की बुनियाद है। उनका लक्ष्य है जाति, धर्म, लिंग का भेदभाव किए बिना सभी को ईश्वर के नजदीक ले जाना। इन्ही आदर्शो के आधार पर पूज्य स्वामी जी ने मां गंगा की स्वच्छता को लेकर हरिद्वार महाकुम्भ २०१० के दौरान परमार्थ निकेतन ॠषिकेश में ‘स्पर्श गंगा’ का शुभारम्भ किया जिसमें सभी वर्गों एवं धर्मों के अनुयायी सम्मलित हुए। इसका उद्देश्य सामूहिक, समग्र्र एवं समाधान युक्त कदम उठाने हेतु जन जागरूकता लाना है ताकि प्रदूषित होने वाली पवित्र नदियों के प्रति सभी धर्म, वर्ग, व्यवसाय के लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
गंगा एक्शन परिवार – व्यवसाइयों, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों एवं समर्पित सेवकों का परिवार है, जो मां गंगा की सेवा के लिए समर्पित है। इसका कार्य है मां गंगा एवं इसकी सहायक नदियों की अविरलता, निर्मल धारा को पुर्नस्थापित करना एवं मां गंगा की रक्षा करना। इसके अतिरिक्त मां गंगा में व्याप्त प्रदूषण को हटाना है। गंगा एक्शन परिवार की स्थापना के पश्चात हजारों की संख्या में समर्थक मां गंगा की रक्षा हेतु क्रियाशील हो गए हैं; गंगा प्रदूषण के समाधान के लिए एकजुट हो रहे हैं। गंगा एक्शन प्लान की खामियों को पूरा करने का काम गंगा एक्शन परिवार कर रहा है। प्रेम, एकता एवं सहयोग से लोगों की सोच मेें स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है। परिवार के सदस्यों ने संकल्प किया है कि लोगों के आपसी मतभेदों को मिटाएंगे तथा एक परिवार के रूप में सभी को गले लगाएंगे।
उद्देश्य
-गंगा के अविरल प्रवाह एवं प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्स्थापित करना।
-नदी के प्राकृतिक एवं अवरोध मुक्त प्रवाह की रक्षा करना।
द्रव एवं ठोस प्रकार के अपशिष्ठ का नदी में जाने से रोकना।
उच्च एवं निम्न दोनों स्तरों पर योजनाबद्ध कार्य करना।
-टिकाऊ समाधान निकालना।
-नस्ल, लिंग, जाति, धर्म, राष्ट्रीयता एवं आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी को पावन कार्य हेतु सम्मिलित करना।
-एक साथ मिलकर कार्य करना।
-गंगा प्रदूषण से जुड़ी समस्याएं कई स्तरों पर हैं। इसी जटिलता के कारण गंगा एक्शन परिवार ने स्वीकार किया कि किसी पर दोषारोपण करने अथवा दूसरों की आलोचना करने के बजाय सभी को हर स्तर पर एक साथ लेकर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करना बेहतर साबित होगा। इस दृष्टिकोण के तहत जोड़ने के निम्न प्रयास किए गएः
*२१ अप्रैल २०१२ को नितिन गडकरी एवं पूज्य स्वामी जी के बीच गंगा की समस्या एवं समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा हुई कि किस प्रकार सरकार जनता के साथ मिलकर गंगा के लिए कार्य कर सकती है। २६ अप्रैल २०१२ को सुश्री उमा भारती के साथ भी गंगा को लेकर स्वामी जी ने चर्चा की कि कैसे सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक एवं राष्ट्रीय नेटवर्क का प्रयोग गंगा संरक्षण के लिए किया जाए। इन चर्चाओं का दूरगामी परिणाम ही है कि केन्द्र में भाजपा सरकार के आने पर गंगा संरक्षण हेतु अलग मंत्रालय बना कर ‘नमामि गंगा’ कार्मक्रम शुरू किया गया।
*१२ अप्रैल २०१२ को भारतीय धार्मिक नेताओं के महासंघ-‘गुरू संगम’ सभा में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सभी धर्म गुरूओं को अवगत कराया की गंगा एवं उसकी सहायक नदियों की सुरक्षा की आवश्यकता है। सभी धर्म गुरूओं ने अधिकारिक तौर पर गंगा एक्शन परिवार की पुस्तिका का विमोचन किया तथा कहा- मां गंगा की रक्षा एवं संरक्षण के कार्य में हम सब एक हैं।
*१० अप्रैल २०१२ को गंगा एक्शन परिवार द्वारा परमार्थ निकेतन ॠषिकेश में राष्ट्रीय गंगा-यमुना कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. आर. के. पचौरी, मैगसेसे पुरस्कार विजेता जलपुरूष श्री राजेन्द्र सिंह ने भाग लिया।
*नवम्बर २०१२ को गंगा एक्शन परिवार एवं गंगा महासभा द्वारा वाराणसी के आसी घाट में ‘एक शाम गंगा के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें मौलाना कल्बे सादिक व जनाब मौलाना फजलुर रहमान भी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के द्वारा गंगा की नाजुक स्थिति के प्रति लोगों को अवगत कराया गया।
गंगा एवं पर्यावरण की समस्याओं को लेकर गंगा एक्शन परिवार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योजनाएं बनाने का कार्य कर रहा है तो जमीनी स्तर पर स्थानीय जागरूकता एवं जनसहभागिता का कार्य कर रहा है। गंगा एक्शन परिवार द्वारा संचालित निम्न परियोजनाएंं हैं-
१. सम्बन्धित प्राधिकारियों के साथ मिलकर प्रयास किया जा रहा है कि ऊपरी गंगा क्षेत्र को अधिकारिक तौर पर यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत क्षेत्र घोषित किया जाए।
२. राष्ट्रीय नदी गंगा अधिकार अधिनियम का निर्माण किया गया है ताकि गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के अधिकार सुरक्षित किए जा सकें।
३. जी पी पी पी का निर्माण-सरकार, जनता एवं निजी साझेदारी को बढ़ावा देना ताकि इस अभियान में सभी की भूमिका सुनिश्चित की जा सके। एस टी पी के निर्माण में गर्वमेन्ट पब्लिक प्राइवेट पाटर्नशिप की अहम भूमिका होती है।
४. सोलर इंडिया प्लान- सन २०५० तक देश की ऊर्जा जरूरत को सौर ऊर्जा से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
५. चार धाम एवं अन्य पवित्र स्थलों का सौंदर्यीकरण – गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के किनारे स्थित सभी धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण की विस्तृत योजना है। इसमें अपशिष्ट प्रबंधन एवं निस्तारण भी सम्मिलित हैेे।
६. स्वच्छ, हरित एवं शांत कुम्भ मेला इलाहबाद २०१३- इलाहबाद कुम्भ मेला को पर्यावरण अनुकूल कुम्भ मेला के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया। सभी संतों एवं आध्यात्मिक गुरूओं को ग्रीन कुम्भ आयोजन के लिए एकमत किया गया। हरिद्वार अर्द्धकुम्भ २०१६ को ग्रीन कुम्भ के रूप मेंं मनाया जाएगा।
७. ६ टी कार्यक्रम – अर्थात टायलेट, टैप (नल), ट्रेक, ट्रेस, ट्री, कार्यक्रम की शुरूआत की गई, जिसके तहत गंगा किनारे स्थित स्कूलों में शौचालय बनवाना एवं पेड़ लगाना प्रमुख हैं।
८. गावों के विकास हेतु ३ जी कार्यक्रम – अर्थात ग्राम, गौरी और ग्रामीण कार्यक्रम शुरू किया गया।
उपरोक्त कायक्रमों के अतिरिक्त पूरे वर्ष भर वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों, आंदोलनकारियों, अधिकारियों एवं आध्यात्मिक नेताओं के साथ मिलकर गंगा की समस्याओं के समाधान के लिए सभा एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। करोड़ों लोगों को जागरूक एवं सक्रिय करने के लिए सफाई अभियान, सामाजिक एवं शैक्षिक गतिविधियां, गंगा पर्व एवं गंगा आरती का आयोजन किया जाता है।

मो. : ७५७९०२९२२५

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