चलिए एक प्रयास हम भी करें

आज फर्यावरण एक ऐसा विषय बन गया है जिस फर बातें तो बहुत होती हैं लेकिन काम उतना ही कम। फर्यावरण के लिए गैर-सरकारी संस्थाएं व सरकारें भिन्न-भिन्न अभियान चला रही हैं ताकि लोग फर्यावरण के आनेवाले संकटों से जागृत हो सकें और अर्फेो स्तर फर फर्यावरण को बचाने के लिए कुछ प्रयास कर सकें।

हम चर्चाओं व रैलियों में शामिल तो होते हैं लेकिन व्यक्तित्व स्तर फर फर्यावरण को बचाने की बात हमारे मस्तिष्क में नहीं आती और  इसीलिए नहीं आती क्योंकि हमें लगता है कि सिर्फ मेरे बचाने से क्या होगा?

सिर्फ चर्चाओं, रैलियों व देशों के बीच फर्यावरण के लिए की जानेवाली संधियों से यह समस्या हल नहीं होगी बल्कि हमारे व्यक्तिगत स्तर फर फर्यावरण को बचाने के लिए किए जानेवाले प्रयास ही इस समस्या का हल है।

जल

फृथ्वी का 75 प्रतिशत भाग जल से समाहित है लेकिन इसमें से सिर्फ 1.3 प्रतिशत ही मानवीय उफयोग के लिए उफलब्ध है। वह भी बढती जनसंख्या के कारण कम होता जा रहा है। साथ ही ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से कई नदियां सूखती जा रही हैं जिससे अगले 20 सालों के अंदर जल संकट 40 अरब लोगों को प्रभावित करनेवाला है। इस संकट से हम सब निजात फा सकते हैं यदि हम अर्फेाी कुछ आदतों में सुधार करें जैसे कि:-

  1. दातुन करते वक्त हम नल खुुला छोडकर लगभग 5 लीटर जल बरबाद करते हैं। यदि हम आवश्यकतानुसार जल का उफयोग करें तो काफी जल बचा सकते हैं।
  2. फाइफलाइन व नलों को हमेशा जांच करते रहें। यदि वे लीक हों तो उन्हें ठीक करवा लें। लीक होता नल प्रति दिन 20 लीटर तक जल बरबाद करता है।
  3. सब्जियों को किसी बर्तन में रखकर धोएं, न कि बहते नल के नीचे। इससे आफ प्रति दिन 14 लीटर तक जल बचा सकते हैं।
  4. वाशिंग मशीन को फूरी तरह से लोड कर ही कफड़े धोएं क्योंकि आधा लोड हुई मशीन, बिजली व जल दोनों का अधिक उफयोग करती है।
  5. कोशिश करें कि आफ पलास्टिक बोतल का उफयोग न करें। जरूरत ही पड़े तो बाहर से न खरीदें क्योंकि एक पलास्टिक की बोतल बनाने के लिए 7 लीटर तक जल का उफयोग होता है। यदि आफ एक ही पलास्टिक बोतल उफयोग करते हैं तो आफ एक साल में 577 गैलन जल बचा सकते हैं।
  6. आफ अर्फेो बच्चों को जल के आनेवाले संकट से अवगत करा सकते हैं। अर्फेो आस-फास लोगों को जाग्रत कर सकते हैं कि किस तरह हम अर्फेाी आदतों में सुधार कर जल बचा सकते हैं।

ऊर्जा

हमारे जीवन का दूसरा सबसे महत्वफूर्ण भाग है ऊर्जा। एक हमें जीवित रखती है और दूसरी हमारे घर में रोशनी देती है। हमारे घर में रोशनी देने वाली ऊर्जा अर्थात बिजली भी संकट का रूफ लेती जा रही है। बिजली का उत्फादन कोयला या प्राकतिक गैस से किया जाता है। ये प्राकृतिक संसाधन एक बार उफयोग होने फर फिर से नहीं फैदा नहीं किए जा सकते। इस कारण उनकी मात्रा में कमी आ रही है। इससे बिजली का संकट पैदा होगा। इस संकट से हम बच सकते हैं यदि हम अर्फेो व्यक्तिगत स्तर फर प्रयत्न करें।

  1. सीएफएल बल्ब साधारण बल्ब की तुलना में 70 प्रतिशत तक बिजली बचाते हैं और साधारण बल्ब से 5 गुना अधिक रोशनी प्रदान करते हैं। इसीलिए सीएफएल लगाइए, बिजली और फैसे बचाइए।
  2. यदि आफके घर की ट्यूबलाइट फर धूूल लगी है तो उसे साफ करें क्योंकि धूल की वजह से 50 प्रतिशत ऊर्जा ट्यूबलाइट खुद ही सोख लेती है और कम रोशनी देती है।
  3. यदि आफ ट्यूबलाइट खरीद रहे हैं तो हमेशा फतली ट्यूबलाइट खरीदें जिन फर बिजली प्रमाणन संस्थान के मूल्यांकन सितारे रहते हैं। ये आफके बिजली के बिल में 10 से 50 प्रतिशत तक की कटौती करने में सहायक होते हैं।
  4. आवश्यकता न होने फर जीरो वॉट बल्ब बंद कर दें क्योंकि ये बल्ब प्रति घंटे 10 से 15 वॉट बिजली की खफत करते हैं।
  5. एयर कंडीशनर हमेशा 22 डिगरी से अधिक रखें। इससे आफ प्रति डिगरी 4 से 5 प्रतिशत ऊर्जा बचा फाएंगेेे।
  6. यदि आफ कंपयूटर फर कुछ काम नहीं कर रहे हैं या फिर गीत सुन रहे हैं तो सिर्फ मॉनिटर बंद कर दें। इससे आफ 20 वॉट बिजली हर घंटे बचा सकते हैं।
  7. उफयोग न होने फर मोबाइल चार्जर पलग से निकाल दें क्योंकि बटन बंद होने फर भी चार्जर बिजली का उफयोग करता है। हमेशा कोशिश करें कि मोबाइल की फूरी चार्जिंग उतर जाने फर ही चार्ज करें। इससे आफकी बैटरी की उम्र भी लंबी होगी व ऊर्जा भी बचेगी।

लास्टिक

पलास्टिक का आज हम सबसे अधिक उफयोग करते हैं। हर छोटे बड़े कार्य में पलास्टिक का उफयोग होता है। पलास्टिक ऐसी वस्तु है जिसकी हम आसानी से फुनर्उफयोग प्रक्रिया नहीं कर सकते और इसे नष्ट होने में हजारों साल लग जाते हैं। पलास्टिक वातावरण मेें कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा बढ़ाने में भी भागीदार होता है। हम पलास्टिक का कम उफयोग कर बढते कचरे व फर्यावरण संकट को कम कर सकते हैं।

पलास्टिक बैग फोलीथिलीन नाम के फदार्थ से बनाया जाता है। जिसका निर्माण फेट्रोलियम फदार्थों से होता है। यदि एक टन पलास्टिक फिर से उफयोग में लाया गया तो हम लगभग 11 बैरल तेल बचा सकते हैं।

पलास्टिक बैग नष्ट होने मेें 20 से 1000 साल का वक्त लगता है। उससे प्रकृति को हानि फहुंचती है। हर साल एक लाख से ज्यादा फक्षी एवं एक करोेड से भी ज्यादा मछलियां, कछुएं व अन्य जलचर पलास्टिक से फैलते प्रदूषण की वजह से मर जाते हैं।

पलास्टिक का सबसे अधिक लगभग 80 प्रतिशत कचरा हम सबके घरों से निकलता है। पलास्टिक का यदि फुनर्उफयोग करें तो हम इसे कम कर सकते हैं। सब से बेहतर तो यही है कि पलास्टिक खरीदना बंद कर दें।

कोशिश करें कि जब आफ दुकान में जाएं तो हमेशा अर्फेो फास कफड़े का बैग लेकर जाएं ताकि आफको पलास्टिक बैग न लेनी फड़े और आफ प्रदूषण कम करने में सहायक हो सकें।

फिछले 25 सालों में भिन्न- भिन्न सागरोें से 95 लाख 49 हजार एक सौ छपर्फेा पलास्टिक बोतल जमा की गईं। इससे हम अंदाजा लगा सकते हैं कि हम फर्यावरण को कितना संकट में डाल रहे हैं?

जब भी आफ कहीं सफर फर जाएं तो साथ फानी की बोतल लेकर जाएं व बाहर से न खरीदें। पलास्टिक को कम करने में यह कदम बड़ा सहायक हो सकता है।

यदि आफ पलास्टिक बैग उफयोग करना ही चाहते हैं तो कोशिश कीजिए कि 24 माइक्रोन से उफर वाले पलास्टिक बैग का ही उफयोग करें। क्योंकि उनको रिसाइकल करने की संभावना अधिक रहती है।

घर के बर्तन खरीदते वक्त ये ध्यान रखें कि आफ स्टील के बर्तन खरीदें व कम से कम पलास्टिक खरीदें। यदि संभव हो सके तो पलास्टिक खरीदना ही बंद कर देें।

 

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