डा. कलाम: पायलट के सपने से राष्ट्रपति तक का सफर

‘सपने वो नहीं होते जो नींद में देखे जाते है, सपने वो होते है जो आप को सोने नहीं देते है’ यह प्रसिद्ध कथन पूर्व राष्ट्रपति और मिशाइल मैन डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम का है। वैसे तो सभी लोग जीवन में सपने देखते है लेकिन कम ही ऐसे लोग है जो उसे पूरा कर पाते है क्योंकि सपने को पूरा करने के लिए लोगों में जूनून नहीं होता और वह अपने अभाव को इसका कारण बताते है लेकिन जिसके मन में सपनों को पूरा करने का जूनून होता है वह उसे पूरा करते है ऐसा कहना था डाक्टर अब्दुल कलाम का।

डाक्टर अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडू के रामेश्वर शहर में एक साधारण से परिवार में हुआ था। डाक्टर अब्दुल कलाम का जीवन बहुत ही सादगी भरा रहा है। डाक्टर अब्दुल कलाम को उनके महान कार्यों के चलते प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने उन्हे भारतरत्न से सम्मानित करने का ऐलान किया लेकिन 1 मार्च 1997 को जब डाक्टर अब्दुल कलाम राष्ट्रपति भवन में समारोह में पहुचे तो वह पूरी तरह से नर्वस थे क्योंकि उन्हे इस तरह के कार्यक्रमों से दूर रहना पसंद था। डाक्टर अब्दुल कलाम सूट पहनने का आदी नहीं थे उन्हे सिर्फ साधारण कपड़े ही पसंद थे लेकिन समारोह में उन्हे सूट पहनकर आना था जिससे वह अपनी टाई को लेकर असहज महसूस कर रहे थे।

डाक्टर अब्दुल कलाम ने फिजिक्स और ऐरोस्पेस में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में सभी को एक प्रोजेक्ट मिला था जिसमें कम उंचाई पर उड़ने वाला एक विमान बनाना था। अब्दुल कलाम ने इसे तय समय से कम में तैयार किया था और यही से उनका फाइटर पायलट बनने का सपना जग गया उन्होने कड़ी मेहनत की और इसका टेस्ट दिया लेकिन उनकी 9वीं रैंक आयी जबकि सिर्फ 8वीं रैंक तक के ही लोगों को पायलट बनने का मौका मिला। इस असफलता से डाक्टर अब्दुल कलाम को झटका लगा लेकिन उन्होने हिम्मत नहीं हारी और वैज्ञानिक बनने के रास्ते पर निकल पड़े। डाक्टर अब्दुल कलाम ने समय से साथ बहुत सफलता और नाम हासिल किया। देश के लिए योगदान देने वाले मिशाइल मैन को सन 2002 में देश का राष्ट्रपति बनाया गया जिसके बाद सन 2006 में कलाम का फायटर प्लेन में उड़ने का सपना भी पूरा हो गया और उन्होने फाइटर जेट सुखोई में उड़ान भरी। डा. अब्दुल कलाम ने जिस समय सुखोई में उड़ान भरी उस समय उनकी उम्र 74 साल थी। अपनी 40 मिनट की उड़ान के बाद उन्होने अपना अनुभव साझा करते हुए बड़ी ही अच्छी लाइन लिखी थी कि ‘मैं विमान को काबू करने में इस कदर खो गया था कि मुझे डरने का मौका ही नहीं मिला’

मिशाइल मैन नाम से मशहूर डाक्टर अब्दुल कलाम देश के 11वें राष्ट्रपति भी बने थे और उन्होने सन 2002-2007 तक देश की बागडोर संभाली थी। डा. अब्दुल कलाम को ISRO और DRDO में उनके योगदान को लेकर पद्म भूषण और पद्म विभूषण अवार्ड से भी सम्मानित किय गया था। 11 मई 1998 में राजस्थान के पोखरण में परमाणु परीक्षण डा. कलाम के मार्ग दर्शन में ही हुआ था। भारत द्वारा किये गये इस परीक्षण ने पूरी दुनिया को हिला दिया था और कई देशों ने इसका विरोध किया था और भारत को धमकी भी दी थी। इस परीक्षण के बाद भारत भी परमाणु शक्ति वाला देश बन गया था।

पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर अब्दुल कलाम बहुत की साधारण व्यक्तित्व के इंसान थे जिससे उनके जीवन से जुड़ी बहुत की घटनाएं है जो अक्सर देखने को मिलती रहती है। उनके जीवन के आखिरी दिनों की एक घटना है जब वह सन 2015 में शिलांग गये थे वहां उन्होने देखा कि सेना का एक जवान उनकी कार के सामने काफी समय से राइफल लेकर खड़ा है जिसके बाद डा. कलाम ने वायरलैस पर उस सैनिक को मैसेज भेजा और कहा कि वह बैठ जाये और आराम कर ले जिस पर उस सैनिक ने आदरपूर्वक उनका आदेश यह कहते हुए ठुकरा दिया कि उनकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उस पर इसलिए वह बैठ नहीं सकता है। डाक्टर अब्दुल कलाम सैनिक की इमादारी से बहुत प्रभावित हुए जिसके बाद कलाम ने उस सेना के जवान को अपने पास बुलाया और कहा Thank you buddy। एक राष्ट्रपति से किसी सैनिक के लिए यह शब्द किसी अवार्ड से कम नही था। शिलांग में ही डा. कलाम लेक्चर देते समय स्टेज पर गिर पड़े थे जिसके बाद उन्हे अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 27 जुलाई 2015 को डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया था।

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