न सुनवाई, न अपील, सीधे फैसला

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देश में, विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार में, गुंडाराज फैला हुआ था। गुंडों को राजनैतिक पार्टियों और पुलिस का आश्रय प्राप्त था। लोगों में डर फैलाने और अपना खौफ बनाने के लिए ये गुंडे कमर में तमंचे बांधे ऐसे घूमते थे, जैसे कोई बहुत बड़ा पराक्रम कर रहे हों। उनके इसी आतंक और दबदबे का फायदा राजनैतिक पार्टियां चुनावों तथा अन्य समय पर उठाती रहीं।

ग्रामीण भारत को सशक्त बनाएगी बीमा मंडी योजना

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कारोलकर उद्योग समूह बीमा मंडी व बीमा पाठशाला की अनोखी योजनाओं के साथ बीमा क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। ऐसी योजनाओं से ग्रामीण भारत में आने वाली क्रांति, छोटे-छोटे तबकों को बीमा कवच उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण भारत को प्रशिक्षित करने की योजना पर कारुलकर प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री प्रशांत कारुलकर से हुई अंतरंग बातचीत के कुछ खास अंश प्रस्तुत हैं।

नए उत्साह से आगे बढ़ने का समय

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सकारात्मक घटनाओं पर चिंतन करना आवश्यक है। साथ ही स्वयं से भी यह प्रश्न पूछना आवश्यक है कि हमें विगत तीन महीनों में जो नहीं हुआ उसे ही लिए बैठे रहना है या आने वाले समय में जो आशा की किरण दिखाई दे रही है, जो अवसर दिखाई दे रहे हैं, उनकी ओर नए उत्साह से मार्गक्रमण करना है।

राष्ट्रहित में नकार भी आवश्यक

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अब आम जनता ने घटनाओं का विश्लेषण करना शुरू कर दिया है, अत: यह आवश्यक है कि इस बात का भी विचार किया जाए कि जो घटनाएं घटित हो रही हैं उनमें हमारी क्या भूमिका हो सकती है। यह सही है कि देश का हर व्यक्ति सीमा पर जाकर युद्ध नहीं कर सकता और न ही बॉलीवुड में लॉबिंग कर रहे लोगों का गिरेबान पकड़कर यह नहीं पूछ सकता कि तुम्हें किसी की प्रतिभा को मारने का हक किसने दिया? परंतु आम नागरिक के पास सबसे अच्छा हथियार है, नकार।

जम्मू-कश्मीर की फिजां अब बदल रही है

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जम्मू-कश्मीर में सेना ने आतंकवादियों के आलां नेतृत्व के खात्मे की दिशा में कदम उठाकर उनके हौसलें पस्त कर दिए हैं। धारा 370 व 35(ए) को लेकर जो भ्रम और खौफ था वह अब खत्म हो चुका है। आतंकवादियों को शह देने वाली पार्टियों और उनका नेतृत्व करने वाले चुनिंदा परिवारों की लूटखसोट को लोग जान गए हैं। जम्मू- कश्मीर के भाजपा के पूर्व विधान परिषद सदस्य श्री अजय भारती ने राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर खुलकर बातचीत की। इसके कुछ महत्वपूर्ण अंश प्रस्तुत है-

शांतिदूतों को अब शांत रहना होगा

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हमारे यहां के तथाकथित कुछ बुद्धिजीवी नेता, राष्ट्रविरोधी मीडिया जिहादी आतंकवाद को समाप्त करने का रोना तो हर समय रोते हैं; परंतु स्वयं इस राष्ट्रविरोधी आतंकवाद के विरोध में कुछ ठोस कदम उठाने का साहस नहीं करते। यही क्यों, सदा पैंतरे बदलने वाले कुछ राजनीतिक नेता भी अपने स्वार्थ के कारण इस्लामीकरण को सहयोग देते नजर आते हैं।

विदेश से लौटना और माह भर का एकांतवास……

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'मिशन वंदे भारत ' के अंतर्गत विदेशों में फसें भारतीय नागरिकों को भारत लाने का कार्य केंद्र सरकार ने किया। विदेशों में हिन्दू स्वंयसेवक संघ का कार्य करने वाले कार्य करता नियमित रूप से भारत से विदेश प्रवास पर जाते रहते हैं। कोरोना कल में यूके के प्रवास पर गई राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय महाविद्यालयीन प्रमुख सुश्री चंदा (भाग्यश्री ) साठ्ये जी से उनके प्रवास और वापस भारत लौटने के अनुभवों के बारे में प्रदीर्घ चर्चा हुई। प्रस्तुत है उस चर्चा का प्रमुख अंश

चीनी शतरंज के नेपाली-पाकिस्तानी प्यादे

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एशिया महाद्वीप में चीन को टक्कर दे सकने वाला एक ही देश है भारत। चीन भारत से सीधा युद्ध बहुत कम करता है। वह हमेशा छुपकर वार करने की नीति अपनाता है। इस बार भी वह भारत को नुकसान पहुंचाने और वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिमा खराब करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए उसने अपने शतरंज के दो प्यादों नेपाल और पाकिस्तान को चुना है। इन देशों के माध्यम से वह ऐसे मुद्दे उठाने की कोशिश कर रहा है जिनका कभी अस्तित्व ही नहीं रहा है, चाहे वह भारत-नेपाल की विवादित भूमि का हो या इमरान खान के बयान का।

मजदूर : संवाहक या योद्धा

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अभी संम्पूर्ण देश एक तराजू की तरह है, जिसके एक पलड़े पर पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे विकसित राज्य हैं। ये राज्य खेती-किसानी या उद्योगों के कारण प्रगति कर रहे हैं। तराजू के दूसरे पलड़े पर वे राज्य हैं जो तुलनात्मक दृष्टि से पिछड़े माने जाते हैं। कालांतर में पिछड़े राज्य के मजदूर अपनी आजीविका और भविष्य संवारने के उद्देश्य से इन विकसित राज्यों में आते रहे तथा इस ओर के पलड़े को अधिक भारी करते गए। परिणाम यह हुआ कि एक पलड़ा जरूरत से ज्यादा झुक गया और दूसरा बिलकुल रीता हो गया। अब इस कोरोना की त्रासदी के कारण जबकि अधिकतर मजदूर अपने रीते पलड़े की ओर वापस लौट गए हैं तो आवश्यकता है कि उन्हें वहीं रोके रखने की जिससे तराजू के दोनों पलड़े फिर से समान हो जाएं।

सेवा परमो धर्म :

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अब ऐसी सेवा करने की आवश्यकता है जो समाज के हर तबके को आत्मनिर्भर बना सके। जब समाज का हर तबका आत्मनिर्भर बनेगा तभी देश आत्मनिर्भर बनेगा। सरकार के प्रयासों से अगर भारत में नए उद्योग आते हैं तो उन उद्योगों में काम करने वाले लोगों में जिन गुणों की आवश्यकता होगी उनका आंकलन कर ऐसे मानव संसाधनों का विकास करने का कार्य भी सेवाभावी संस्थाएं कर सकती हैं। यह सही मायने में समाज सेवा होगी; क्योंकि यह सेवा किसी को हाथ पसारने को मजबूर नहीं करेगी अपितु उन हाथों को परिश्रम और आत्म सम्मान से अपना भरण-पोषण करने और जीवन सम्पन्न बनाने के लिए प्रेरित करेगी।

 हुनर ही तारेगा भारत को

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कोविड-19 के लिए आज सारी दुनिया चीन को दोषी मान रही है। आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए उसने तीसरा विश्वयुद्ध छेड़ दिया है।

दो सितारों का टूटना

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“इरफान खान और ॠषि कपूर के रूप में हमने दो उम्दा कलाकारों को तो खोया ही दो ऐसे व्यक्तियों को भी खोया जो समाज की बुराइयों पर बेबाकी से अपनी राय रखते थे। वे दोनों ही अपनी तरह अकेले ही थे, उनके जैसा दूसरा होना संभव नहीं।”

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