ग़ड़रिया बने हिंदू समाज

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लैंड जिहाद के माध्यम से ये लोग हिंदुओं की भूमि को हथियाने के लिए तरह-तरह के रास्ते अपनाते रहते हैं। किसी की जगह पर हरा कपड़ा डालकर मजार बना देना और धीरे-धीरे उसके आस-पास चबूतरा बना कर वह जमीन हथिया लेना या कैराना जैसी सुनियोजित घटना को अंजाम देना आदि उनके ‘मंसूबों’ को साफ करते हैं।

संस्कृति संजोने हेतु संकल्पित सरकार – वी. सुनील कुमार

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भारत में संस्कृति के विभिन्न आयामों जैसे भाषा, साहित्य, लोकगीत-लोकनृत्य आदि को राजाश्रय हमेशा ही मिलता रहा है। आज लोकतांत्रिक राजव्यवस्था होने के बाद भी प्रत्येक राज्य सरकार अपनी संस्कृति के संवर्धन हेतु विशेष प्रयत्न करती है। कर्नाटक भारत का वह राज्य है जिसे संस्कृति के रक्षक के रूप में जाना जाता है। आइए जानते हैं कर्नाटक के कन्नड़ और संस्कृति विभाग तथा ऊर्जा मंत्री मा. वी. सुनील कुमार जी से कि वे कर्नाटक में संस्कृति रक्षा के लिए क्या प्रयत्न कर रहे हैं।

संस्कृति: बहती धारा हो, रुका पानी नहीं

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संस्कृति ही राष्ट्र की पहचान होती है। उसकी विशालता, प्राचीनता और नवीनता के प्रति आग्रह ही उसे महान बनाती है। भारतीय संस्कृति में ये सभी गुण विद्यमान हैं। इसलिए भारतीय संस्कृति ने तमाम विदेशी संस्कृतियों को अपने में समेटने के साथ ही साथ ज्यादातर बाहरी संस्कृतियों पर व्यापक प्रभाव भी…

ग्रामीण विकास, कल-आज-कल

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भारत की आत्मा उसके ग्रामोें में बसती है। इसलिए यदि भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति को बचाए रखना है तो ग्राम की संस्कृति और वहां के निवासियों के शहर की ओर हो रहे पलायन को रोकना ही होगा। इसके लिए आवश्यक है कि एक बार फिर ग्राम का मौलिक विकास नवीन पद्धति के आधार पर लेकिन विशुद्ध भारतीय संस्कृति को बचाए रखते हुए किया जाए। इस संदर्भ में प्रस्तुत है भैयाजी जोशी (अ. भा. कार्यकारिणी सदस्य, रा. स्व. संघ) का साक्षात्कार...

शक्ति सम्पन्न भारत

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पिछले माह की 16 तारीख को भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन की शंघाई सहयोग संगठन की शिखर बैठक में हुई चर्चा में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से कहा था कि ‘यह समय युद्ध का नहीं है’ और पुतिन ने उत्तर में कहा था कि ‘हम आपकी चिंता को समझते हैं और इस दिशा में प्रयास करेंगे।’

‘आदर्श’ की तरह प्रस्तुत हों आदर्श

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कहा जाता है कि सिनेमा समाज को दर्पण दिखाता है परंतु यदि उसे माध्यम बनाने वालों का ध्येय शुद्ध ना हो तो वे समाज को गलत इतिहास और कथावस्तु से परिचित कराने का प्रयास करते हैं। तथ्यों से अपरिचित किशोर  और युवा उसी असत्य को सत्य मानकर आचरण करने लगते हैं।

मुसलमानों को भारतीयत्व अपनाना होगा

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भारत में रहने वाले हिंदुओं का अब यह कर्तव्य है कि वे अपने श्रद्धा स्थानों को दासता के चंगुल से मुक्त कराने का बीड़ा उठाएं, जिससे आनेवाली पीढ़ियां अपना सही इतिहास जान सकें। अब भी अगर हिंदू अपनी आंखें मूंदे बैठे रहे, अपने आस-पास रातभर में बन जाने वाली मजारों पर कुछ नहीं बोले और अपने श्रद्धा स्थानों और अपने प्रतीकों को मुक्त करने के लिए उद्यत नहीं हुए तो शिव को शव बनाने के जो प्रयत्न अभी असफल रहे हैं, वे आगे सफल भी हो सकते हैं। 

तनिक मुस्कुराइए

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इंसानों को जानवरों से अलग करने वाली बातों में मुस्कान का क्रमांक पहला कहा जाना चाहिए। बच्चे की पहली किलकारी सुनकर मां के चेहरे पर आई मुस्कान हो या पांच फुट दूर खड़े किसी व्यक्ति को पहचानते हुए आई मुस्कान... सभी का मन से सीधा नाता होता है।

चीन से दोस्ती, जी का जंजाल

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रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच भी चीन ने ताइवान पर हमले की बात कहकर विश्व को दो खेमों में बांटने की योजना बनाई थी परंतु वह उसे आगे नहीं ले जा सका क्योंकि वह चाहता था कि चूंकि चीन रूस के साथ है तो रूस भी ताइवान मुद्दे पर उसके साथ खड़ा रहेगा, परंतु यह बात अधिक आगे नहीं बढ़ी।

गोवंश के प्रति समाज अपना दायित्व समझे!-सुनील मानसिंहका

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पिछले लगभग तीन दशकों से गोसेवा के क्षेत्र में कार्य करनेवाली गो सेवा अनुसंधान केंद्र, देवलापार नामक संस्था अब केवल गो वंश को बचाने वाली गोशाला तक सीमित नहीं रही है, वरन अब वह एक बहुत बड़ा अनुसंधान केंद्र बन गई है, जो कि अन्य गोशालाओं के लिए आदर्श है और मार्गदर्शक भी है। प्रस्तुत हैं पिछले लगभग 25 वर्षों से इस केंद्र को सुनियोजित रूप से चलाने वाले संचालक सुनील मानसिंहका से हुई चर्चा के कुछ प्रमुख अंश-

भारतबोध जागृत हो रहा है

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पिछले कुछ महीनों से भारतीय समाज में एक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। इसे कुछ लोग सामाजिक ध्रुविकरण कह रहे हैं, कुछ लोग बंटवारे की राजनीति कह रहे हैं, कुछ लोग गंगा-जमुनी संस्कृति पर प्रहार मान रहे हैं। कर्नाटक में हिजाब प्रकरण के बाद हिंदू युवाओं द्वारा भगवा गमछे ओढ़ना,…

दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति है भारत – मेजर सुरेंद्र पूनिया

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पेशे से डॉक्टर, थल सेना में मेजर रैंक, पैराट्रूपर, म. राष्ट्रपति के सुरक्षाकर्मी, अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण विजेता खिलाड़ी, प्रसिद्ध वक्ता तथा सोशल मीडिया पर सदा चर्चा में रहनेवाले मेजर सुरेन्द्र पूनिया आज समाज का जानामाना नाम है। भारतीय सुरक्षा व्यवस्था को उन्होंने अत्यंत करीब से देखा है। उनके अनुभवों तथा वर्तमान व भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर उनकी बेबाक राय है। प्रस्तुत है उनसे हुई चर्चा के कुछ महत्वपूर्ण अंश-

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