यह विश्वास जगाओ कि हम कर सकते हैं -आचार्य रमेशभाई ओझा

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‘हिंदी विवेक’ आत्मनिर्भर भारत वेब शृंखला में प्रसिद्ध धर्म गुरु आचार्य रमेशभाई ओझा से देश के आध्यात्मिक माहौल पर विस्तार से हुई भेंटवार्ता के कुछ महत्वपूर्ण सम्पादित अंश यहां प्रस्तुत हैं।

बिन निज भाषा सब सून

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भारतीय जीवन में हिंदी का स्थान केवल भाषा के रूप में नहीं रहा है; वरन् यह हमारी परंपरा और सभ्यता की पहचान रही है, हमारी भावना को मुखर करने का माध्यम रही है, हमारी अभिव्यक्ति का साधन रही है और संकट काल में हमारी शक्ति रही है। परस्पर संबंधों को अधिक मजबूत बनाने के लिए हिंदी संभाषण से अधिक प्रभावी माध्यम और कोई नहीं है।

आत्मनिर्भर भारत: घोषणा नहीं कृति आवश्यक

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देश के आत्मनिर्भर होने का अर्थ है जितना हम आयात करते है उससे कुछ गुना अधिक निर्यात अवश्य हो। जितना हम विदेशों से लें उससे अधिक उन्हें देने की क्षमता विकसित करें। आत्मनिर्भर बनने की दिशा की ओर बढ़ते समय यह अतिविश्वास भी न रखें कि हम सब कुछ कर सकते हैं और यह न्यूनगंड भी न पालें कि भारत में कुछ हो ही नहीं सकता। ये दोनों ही विचार हमारी राह का रोड़ा बन सकते हैं। हमें हमारे बलस्थान और कमजोर पक्ष दोनों पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा।

अलविदा कप्तान

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महेन्द्र सिंह धोनी की इसी सफल कप्तानी के कारण क्रिकेट की ऐसी कोई ट्रॉफी नहीं है जो भारत के पास न हो। उनकी कप्तानी में भारत टेस्ट क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले क्रमांक पर रहा। 50 ओवर के विश्वकप और चैंपियंस ट्रॉफी पर भारत का कब्जा रहा। भारत को 20-20 विश्वकप का पहला विश्वविजेता बनाने का श्रेय भी धोनी को ही जाता है।

एकात्मता की नींव का शिलान्यास

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भारत की संसदीय प्रणाली में हिंदुत्व के प्रस्थापन के भय से चलाए जाते थे। क्योंकि तथाकथित सेक्युलर इस बात से डरे हुए थे कि अगर भारत का मुखिया हिंदू है, हिंदुत्व उसकी आस्था का विषय है, यह स्थापित हो गया तो विश्वभर में भारत की छवि हिंदू राष्ट्र के रूप में उभरेगी और सभी तथाकथित सेक्युलर लोगों को अपनी दूकानें बंद करनी होंगी

हिंदुत्व के पुनर्जागरण का शक्तिकेंद्र

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इस माह की पांच तारीख भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस लेकर आ रही है जिसका स्वप्न भारत में और भारत के बाहर रहने वाले लाखों हिंदुओं की आंखों में था। विगत कई वर्षों की लम्बी लड़ाई के बाद अंतत: अयोध्या में श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर बनने जा रहा है।

राम मंदिर पर प्रसन्नता, बॉलीवुड़ का शुद्धिकरण जरूरी

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राम मंदिर, सुशांत सिंह की आत्महत्या, बॉलीवुड़ में माफिया की दादागिरी, वेब सीरीजों से परोसी जाती अश्लीलता, कोरोनो व अर्थव्यवस्था जैसे अद्यतन मामलों पर सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने हमेशा की तरह अपने बेबाक विचार प्रस्तुत किए। ‘हिंदी विवेक’ से हुई विशेष प्रदीर्घ बातचीत के ये हैं कुछ महत्वपूर्ण अंशः-

आंखों से नहीं दिमाग से देखिए

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भारतीय फिल्म जगत के इस पूरे ‘बे्रन वॉश’ के पीछे एक मजबूत लॉबी काम कर रही है। इंडस्ट ्री में जो अभिनेता इस लॉबी का काम करने से मना कर देता है, उनको खतम करने में यह लॉबी जुट जाती है। फिर या तो उस व्यिे का करियर खत्म हो जाता है या जीवन। सुशांत सिंह राजपूत इसका ताजा उदाहरण है।

पति बेचारा….. कोरोना और बारिश का मारा

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“पत्नी ने भी झूठा गुस्सा दिखाते हुए एक गैस पर चाय का बर्तन और दूसरे पर कढ़ाई चढ़ा दी। साथ ही अपने भी वॉट्सएप्प ज्ञान का परिचय देते हुए पति को नसीहत भी दे डाली कि कल से रोटियां बनाना सीख लो क्योंकि मोदी जी ने कहा है कि जब तक देश के सारे मर्द गोल रोटियां बनाना नहीं सीख लेते तब तक लॉकडाउन नहीं खुलेगा।”

नाम को सार्थक करता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

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घ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सेवा कार्यों को करने के दौरान संघ ने केवल सेवा की भावना को ही कायम रखा है। परंतु वह किसी एक प्रकार के ‘पैटर्न’ या ‘फॉर्मेट’ में कार्य नहीं करता और न ही इस सेवा के पीछे उसका कोई छिपा एजेंडा होता है। अत: संघ उस समय की परिस्थिति को देखते हुए आवश्यकता के अनुरूप बिना किसी भेदभाव के समाज को साथ लेकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने के लिए कटिबद्ध होता है।

न सुनवाई, न अपील, सीधे फैसला

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देश में, विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार में, गुंडाराज फैला हुआ था। गुंडों को राजनैतिक पार्टियों और पुलिस का आश्रय प्राप्त था। लोगों में डर फैलाने और अपना खौफ बनाने के लिए ये गुंडे कमर में तमंचे बांधे ऐसे घूमते थे, जैसे कोई बहुत बड़ा पराक्रम कर रहे हों। उनके इसी आतंक और दबदबे का फायदा राजनैतिक पार्टियां चुनावों तथा अन्य समय पर उठाती रहीं।

ग्रामीण भारत को सशक्त बनाएगी बीमा मंडी योजना

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कारोलकर उद्योग समूह बीमा मंडी व बीमा पाठशाला की अनोखी योजनाओं के साथ बीमा क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। ऐसी योजनाओं से ग्रामीण भारत में आने वाली क्रांति, छोटे-छोटे तबकों को बीमा कवच उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण भारत को प्रशिक्षित करने की योजना पर कारुलकर प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री प्रशांत कारुलकर से हुई अंतरंग बातचीत के कुछ खास अंश प्रस्तुत हैं।

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