हंसी को हंसी में मत टालिए

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क्या खूब लिखा है निदा फाजली ने इस शायरी में। वैसे बच्चों को हंसाना कोई बड़ी बात नहीं है। बच्चों का मन इतना साफ होता है कि वे पिछली सारी बातों को भूलकर तुरंत मुस्कुराने लगते हैं।

आज फिर आपकी कमी सी है…

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जगजीत सिंह को सुनना एक पूरी जिंदगी को जीने जैसा है। जिस तरह वो इश्क करने वालों को लुभाते थे, वैसे ही अपनी जिंदगी की ढ़लान पर खड़े लोगों को उनका बचपन भी याद दिलाते थे। अपने ‘लाइव’ कार्यक्रमों में जब वे ‘वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी सुनाते’ तो कई लोगों की आंखों के किनारे बरबस ही भीग जाते थे।

समाज जागरण एवं एकत्रीकरण अभियान

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अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने के लिए पूरे भारत में निधि संकलन अभियान चलाया जा रहा है। वैसे तो भारत में और विदेशों में ऐसे कई धनाढ्य भारतीय हैं, जो यदि ठान लें तो एक साथ आकर भव्य राम मंदिर का निर्माण केवल अपने बलबूते भी कर सकते हैं

भारतीय मानवाधिकार का सूत्र सर्वे भवन्तु सुखिन:

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मानवाधिकार केवल अल्पसंख्यकों की बपौती नहीं है और न होनी चाहिए परंतु अपने स्वार्थ और कुछ विशिष्ट ऐजेंडों को आगे बढ़ाने के लिए मानवाधिकार का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है। आज मानवाधिकार को केवल ‘थेअक्रेटिक’ दृष्टिकोण से देखा जा रहा है, यह अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है।

कंधा किसान का, बंदूक मोदी विरोध की

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विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में आंदोलन होना कोई नई बात नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन से शुरू हुआ यह सिलसिला अभी भी जारी है। शाहीन बाग के बाद दिल्ली में किसान आंदोलन की गूंज है।

भारत-अमेरिका: नैचरल पार्टनर

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निष्पक्ष चुनाव मजबूत लोकतंत्र की आधारभूत आवश्यकता और पहला पायदान होते हैं। पिछले महीने में अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए और भारत के बिहार राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव हुए थे। दोनों ही चुनाव भारत की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण थे।

भारतीय कपड़ा बाजार देशी से ग्लोबल

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भारत में आज भी जब कोई किसी दूसरे राज्य में पर्यटन के लिए जाता है तो उस यात्रा के स्मरण के रूप में वहां का कोई विशिष्ट व्यंजन और विशिष्ट कपड़ा जरूर लाता है। आप कश्मीर जाकर पश्मीना शॉल लिए बिना वापस नहीं आ सकते। इसलिए पर्यटन स्थलों पर भी बाजारों को विशिष्ट पद्धति से बसाया जाने लगा।

आत्मनिर्भर भारत का सपना होगा पूरा – स्मृति ईरानी-(केन्द्रीय कपड़ा मंत्री)

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हमारे पारंपरिक उत्पाद जो है इसे आज बहुत बड़ा घरेलु बाजार भी मिल सकता है। धीरे-धीरे यह संवेदनशीलता हमारे देश में विकसित हो रही है। मैं आशावादी हूं चाहे वह मैन मेड फाइबर से बना हुआ कपड़ा हो अथवा कॉटन या फिर सिल्क से बना हुआ कपड़ा हो, उपभोक्ताओं की संकल्पना जैसे-जैसे हमारे देश में बढ़ेगी इसका फायदा जरूर होगा। प्रधानमंत्री मोदी जी का आत्मनिर्भर भारत बनाने का जो सपना है उसे पूर्ण करने के लिए जनता जनार्दन पूर्ण रूप से सहयोग देगी तो हम घरेलु बाजार को भी हमारे उत्पादन के लिए बहुत ही सशक्त होते हुए देख रहे हैं।

वस्त्रोद्योग पुन: अपना गौरव प्राप्त करेगा

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दीपावली तमस को मिटाकर जीवन में रौशनी लाने वाला त्यौहार है। सामाजिक जीवन में तमस का अर्थ निष्क्रीयता, आलस्य, नकारात्मकता और निराशा है, जिसे हम दीपावली के दिन अपने कर्मरूपी दिये के माध्यम से मिटाने का संकल्प लेते हैं। दीपावली के दिन जलाया हुआ प्रत्येक दीपक इस बात का संकेत होता है कि आने वाले सम्पूर्ण वर्ष में हम सभी सम्पूर्ण उत्साह के साथ अपने कार्यों और कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहेंगे।

स्त्री शक्ति: समाज में स्त्री की अवस्था

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हाल ही में हम सभी ने दशहरे का त्यौहार मनाया है। असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक यह त्यौहार हर साल आता है। हम सभी भारतवासी अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुरूप इसे मनाते हैं। कहीं रावण दहन तो कहीं दुर्गापूजा, कहीं जवारे तो कहीं रसगुल्ले,कहीं सोने के प्रतीक स्वरूप शमी…

सब मिलकर एकसाथ कोरोना से लड़ाई लड़ें- डॉ. राजेंद्र धर्मेजा

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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ तकरीबन 6 महीनों से पूरा भारत लड़ाई लड़ रहा है। डॉ. राजेंद्र धर्मेजा भी  इस महामारी से मुकाबला करने के लिए लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। उनसे कोरोना, उसकी चिकित्सा, जरूरी एहतियात और टीके आदि के बारे में हुई बातचीत के अंश यहां प्रस्तुत हैं-

चीन के शह की काट भारत

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भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति निरंतर बढ़ती जा रही है। लद्दाख की ओर की सीमाओं का तय न होना दोनों देशों के विवाद का मुख्य कारण है। 2014 के पूर्व तक भारत की ओर से इस जनविहीन भूमि की ओर अधिक ध्यान न देने के कारण चीन ने धीरे-धीरे इस ओर से भारत की जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया था।

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