भारतीय कपड़ा बाजार देशी से ग्लोबल

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भारत में आज भी जब कोई किसी दूसरे राज्य में पर्यटन के लिए जाता है तो उस यात्रा के स्मरण के रूप में वहां का कोई विशिष्ट व्यंजन और विशिष्ट कपड़ा जरूर लाता है। आप कश्मीर जाकर पश्मीना शॉल लिए बिना वापस नहीं आ सकते। इसलिए पर्यटन स्थलों पर भी बाजारों को विशिष्ट पद्धति से बसाया जाने लगा।

आत्मनिर्भर भारत का सपना होगा पूरा – स्मृति ईरानी-(केन्द्रीय कपड़ा मंत्री)

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हमारे पारंपरिक उत्पाद जो है इसे आज बहुत बड़ा घरेलु बाजार भी मिल सकता है। धीरे-धीरे यह संवेदनशीलता हमारे देश में विकसित हो रही है। मैं आशावादी हूं चाहे वह मैन मेड फाइबर से बना हुआ कपड़ा हो अथवा कॉटन या फिर सिल्क से बना हुआ कपड़ा हो, उपभोक्ताओं की संकल्पना जैसे-जैसे हमारे देश में बढ़ेगी इसका फायदा जरूर होगा। प्रधानमंत्री मोदी जी का आत्मनिर्भर भारत बनाने का जो सपना है उसे पूर्ण करने के लिए जनता जनार्दन पूर्ण रूप से सहयोग देगी तो हम घरेलु बाजार को भी हमारे उत्पादन के लिए बहुत ही सशक्त होते हुए देख रहे हैं।

वस्त्रोद्योग पुन: अपना गौरव प्राप्त करेगा

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दीपावली तमस को मिटाकर जीवन में रौशनी लाने वाला त्यौहार है। सामाजिक जीवन में तमस का अर्थ निष्क्रीयता, आलस्य, नकारात्मकता और निराशा है, जिसे हम दीपावली के दिन अपने कर्मरूपी दिये के माध्यम से मिटाने का संकल्प लेते हैं। दीपावली के दिन जलाया हुआ प्रत्येक दीपक इस बात का संकेत होता है कि आने वाले सम्पूर्ण वर्ष में हम सभी सम्पूर्ण उत्साह के साथ अपने कार्यों और कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहेंगे।

स्त्री शक्ति: समाज में स्त्री की अवस्था

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हाल ही में हम सभी ने दशहरे का त्यौहार मनाया है। असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक यह त्यौहार हर साल आता है। हम सभी भारतवासी अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुरूप इसे मनाते हैं। कहीं रावण दहन तो कहीं दुर्गापूजा, कहीं जवारे तो कहीं रसगुल्ले,कहीं सोने के प्रतीक स्वरूप शमी…

सब मिलकर एकसाथ कोरोना से लड़ाई लड़ें- डॉ. राजेंद्र धर्मेजा

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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ तकरीबन 6 महीनों से पूरा भारत लड़ाई लड़ रहा है। डॉ. राजेंद्र धर्मेजा भी  इस महामारी से मुकाबला करने के लिए लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। उनसे कोरोना, उसकी चिकित्सा, जरूरी एहतियात और टीके आदि के बारे में हुई बातचीत के अंश यहां प्रस्तुत हैं-

चीन के शह की काट भारत

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भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति निरंतर बढ़ती जा रही है। लद्दाख की ओर की सीमाओं का तय न होना दोनों देशों के विवाद का मुख्य कारण है। 2014 के पूर्व तक भारत की ओर से इस जनविहीन भूमि की ओर अधिक ध्यान न देने के कारण चीन ने धीरे-धीरे इस ओर से भारत की जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया था।

दशहरा: क्षात्रतेज जागृत करने का पर्व

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दशहरे के दिन शस्त्र पूजन का एक और उद्देश्य है जनमानस में क्षात्रतेज को जागृत करना। यह क्षात्रतेज ही संकट की घडी में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय अस्मिता को बचाने का कार्य करता है।

संगीत है तो मैं हूं और मैं हूं तो संगीत है- शंकर महादेवन

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‘हिंदी विवेक’ द्वारा आरंभ आत्मनिर्भर भारत वीड़ियो सीरिज के अंतर्गत इस बार खास वेब-भेंटवार्ता हैं प्रसिद्ध गायक-संगीतकार शंकर महादेवन से। उनसे संगीत की दुनिया के अलावा, उनके परिवार, आने वाले युवा गायकों, उनकी गीता पर महत्वाकांक्षी संगीत परियोजना आदि संगीत क्षेत्र के विभिन्न विषयों पर हुई अंतरंग बातचीत के कुछ सम्पादित महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत हैं-

युवाओं को ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर निकलना चाहिए

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‘हिंदी विवेक’ द्वारा आरंभ आत्मनिर्भर भारत वेब-भेंटवार्ता की शृंखला में लद्दाख के एकमात्र युवा सांसद श्री जमयांग सेरिंग नामग्याल से युवा शक्ति और लद्दाख में अनुच्छेद 370 हटने के बाद आए बदलावों पर व्यापक बातचीत हुई। इस बातचीत के कुछ सम्पादित महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत हैं-

देश हार्डवेयर में भी जल्द आत्मनिर्भर बन सकता है

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‘हिंदी विवेक’ द्वारा आरंभ ‘आत्मनिर्भर भारत’ वेब शृंखला के अंतर्गत एक विशेष भेंटवार्ता हैं भारत में सुपर कंप्यूटर के जनक प्रसिद्ध वैज्ञानिक श्री विजय भटकर से। उनसे आईटी के क्षेत्र में हुए तेज बदलावों, और अगले लक्ष्यों समेत कंप्यूटर हार्डवेयर के क्षेत्र में भी तेजी लाने पर विस्तृत बातचीत हुई। उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर में हमने बाजी मार ली है, लेकिन हार्डवेयर में बहुत कुछ करना बाकी है। हम आत्मविश्वास दृढ़ करें तो अगले तीन-चार साल में ही इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उनके विचारों के कुछ सम्पादित महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत हैं-

यह विश्वास जगाओ कि हम कर सकते हैं -आचार्य रमेशभाई ओझा

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‘हिंदी विवेक’ आत्मनिर्भर भारत वेब शृंखला में प्रसिद्ध धर्म गुरु आचार्य रमेशभाई ओझा से देश के आध्यात्मिक माहौल पर विस्तार से हुई भेंटवार्ता के कुछ महत्वपूर्ण सम्पादित अंश यहां प्रस्तुत हैं।

बिन निज भाषा सब सून

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भारतीय जीवन में हिंदी का स्थान केवल भाषा के रूप में नहीं रहा है; वरन् यह हमारी परंपरा और सभ्यता की पहचान रही है, हमारी भावना को मुखर करने का माध्यम रही है, हमारी अभिव्यक्ति का साधन रही है और संकट काल में हमारी शक्ति रही है। परस्पर संबंधों को अधिक मजबूत बनाने के लिए हिंदी संभाषण से अधिक प्रभावी माध्यम और कोई नहीं है।

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