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कोरोना का अंत कब होगा?

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कोरोना वायरस से पूरा विश्व परेशान है ऐसा शायद पहली बार देखने को मिल रहा है जब पूरे विश्व में लॉक डाउन की स्थिति बनी हुई है। छोटे बड़े सभी देश इससे चिंतित है। महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका, रुस और चीन जैसे देश भी अपने लोगों को बचाने की पूरजोर कोशिश कर रहे है लेकिन उसमें भी उन्हे सफलता नहीं मिल पा रही है।

‘स्व’ का स्मरण, क्षरण और जागरण

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महिलाएं अगर अपने ‘स्व’ का स्मरण रखें, उसका निरंतर जागरण करें और उसका क्षरण होने से बचाएं तो महिलाओं की और साथ ही साथ सारे समाज की परिस्थिति में बदलाव निश्चित होगा।

भारत भी कोरोना की चपेट में

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चीन के साथ साथ कोरोना वायरस अब भारत में भी पैर पसार चुका है चीन के हालात तो बहुत ही बुरे हो चुके है खबरों की मानें तो चीन में अब तक तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है वहीं दुनियाभर के करीब 50 देश इस वायरस…

जेएनयू पूरा देश नहीं

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सोशल मीडिया और नागरिक पत्रकारिता के कारण यह सच सभी के सामने आ रहा है कि सीएए के समर्थन करने वालों की संख्या अत्यधिक है और जेएनयू में जो हो रहा है वह दिखावा मात्र है। जेएनयू पूरा देश नहीं है।

महिलाएं याचना नहीं, नेतृत्व करें – मा. शांताक्का प्रमुख संचालिका, राष्ट्र सेविका समिति

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राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका मा. शांताक्का का नए भारत की महिलाओं को आवाहन है कि वे घिघियाना छोड़ दें और अपने भीतर ऐसी शक्ति पैदा करें कि हम नेतृत्व कर सकें। उनसे समिति के कार्यों, नए भारत में महिलाओं की स्थिति आदि पर हुई विशेष बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-

नए भारत की इबारत युवा ही लिखेंगे – आशीष चौहान, राष्ट्रीय महामंत्री, अभाविप

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्री आशीष चौहान को यकीन है कि नए भारत की संरचना युवाओं के जरिए ही निर्मित होगी। उनसे हुई विशेष बातचीत में उन्होंने प्रस्तावित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, युवाओं की समस्याओं और कर्तव्यों, भाषा समस्या, जेएनयू आदि की भी चर्चा की। प्रस्तुत है महत्वपूर्ण अंश-

नया भारत

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राजा भोज का आयोजन कर चुका है। कुछ लोगों ने दूध डालने की शुरुआत भी कर दी है, अब हमें सोचना है कि हमें क्या डालना है। अगर खीर खानी है तो सभी को दूध ही डालना होगा। नया भारत किसी भी तरह की आयात की हुई सभ्यता के आधार पर खड़ा नहीं हो सकता.....

मैं स्वतंत्र भारत बोल रहा हूं

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“जिस स्वतंत्रता ने हमें अधिकार दिए हैं उसी स्वतंत्रता ने हमें दायित्व भी दिए हैं। हमारा पहला दायित्व है कि हम स्वयं को मानसिक गुलामी से स्वतंत्र करें। सम्प्रदाय, जाति, पंथ से परे होकर संगठित हों। अपने इतिहास, अपनी परंपरा, अपने महापुरुषों पर गर्व करना सीखें और अपनी नई पीढ़ी को भी सिखाए।”

भारतीय अस्मिता की परिचायक-सुषमा स्वराज

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11वें विश्व हिंदी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न कमरों में अलग-अलग सत्र चल रहे थे। हिंदी से जुडे विभिन्न विषयों पर चर्चा हो रही थी। एक सत्र के दौरान अचानक से खबर आई कि सुषमा स्वराज थोडी देर में आएंगी परंतु.......

झोमेटो का मुस्लिम प्रेम

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अगर सेंडविच बनाने से पहले ये विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं कि वे ब्राउन ब्रेड में बने या सफेद ब्रेड में तो किसी ग्राहक को यह चुनने का अधिकार क्यों नहीं कि पहुंचाने वाला हिंदू हो या मुसलमान।

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