लोकसभा चुनावों के स्लोगन

स्लोगन उन शब्द समूहों या वाक्यांशों को कहा जाता है जो राजनैतिक, व्यावसायिक, धार्मिक और अन्य संदर्भों में प्रयोग किए जाते हैं। ये मुख्यत: उत्पाद की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए बनाए जाते हैं। विज्ञापनों में स्लोगन का मुख्य लक्ष्य ग्राहक के दिमाग पर उस उत्पाद की छवि को अंकित करना होता है।

सन 2014 के चुनाव कई कारणों से यादगार रहेंगे। स्लोगन इनमें से एक प्रमुख कारण है। भाजपा ने सबसे अधिक स्लोगन का उपयोग किया। हर स्लोगन में एक लक्ष्य था, एक संदेश था। आइए, इन्हीं के आधार पर स्लोगन पर नजर डालते हैं।
1. मोदी फॉर पीएम- इसका लक्ष्य था प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार घोषित करना। स्लोगन से यह संदेश जाता था कि कांग्रेस अभी तक यह नहीं जानती कि उनका प्रधानमंत्री कौन होगा।

2. अबकी बार मोदी सरकार- लक्ष्य तो इसका भी वही था जो ऊपर लिखा गया है, परंतु यह साथ में एक संदेश और देता है कि केवल प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ही नहीं उनकी सरकार भी। अप्रत्यक्ष रूप से यह मेजॉरिटी से वोट करने का संदेश देता है।
3. वोट फॉर इंडिया- इसका लक्ष्य यह बताना था कि भाजपा को क्यों वोट दिया जाए। स्लोगन में निहित संदेश यह बताता है कि पिछले 60 सालों में कांग्रेस भारत और भारतीयों को सम्मान दिलाने में असफल रही है।

4. कांग्रेस हटाओ देश बचाओ, कांग्रेस मुक्त भारत- यहां संदेश यह है कि मोदी भारत का सम्मान वापस दिलाना चाहते हैं और यह तभी संभव है (लक्ष्य) जब केंद्र में कांग्रेस की सत्ता न हो।

5. चाय पे चर्चा- इसका मुख्य उद्देश्य था लोगों के बीच चुनावों की चर्चा करवाना। भाजपा ने संदेश यह दिया कि आप केवल नरेंद्र मोदी से ही नहीं, अपने ग्रुप में भी चर्चा करें ।

इन सब से भाजपा ने न केवल मोदी का प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रचार किया, बल्की यह भी बताया कि कांग्रेस के पास नेतृत्व नहीं है। किसी एक के लिए वोट करने का कोई फायदा नहीं यह बात समझाने के लिए भाजपा ने कहा जब कोई नरेंद्र मोदी के लिए वोट कर रहा है इसका अर्थ यह है कि वह देश के लिए वोट कर रहा है। भाजपा ने मतदाताओं को सीधा-सीधा संकेत दिया कि अगर मोदी सरकार लाना है तो कांग्रेस को वोट न दें। यहां किसी भी तरह की असंबद्धता या अस्पष्टता दिखाई नहीं दी।

भाजपा ने तथाकथित विपक्ष के भी कई स्लोगन का करारा जवाब दिया। कांग्रेस के ‘पूरी रोटी खाएंगे, 100 दिन काम करेंगे, दवाई लेंगे और कांग्रेस को वोट देंगे’ के जवाब में भाजपा ने कहा ‘नई सोच, नई उम्मीद‘। ‘मैं नहीं हम’ के कांगे्रस के स्लोगन का भाजपा ने तो़ड निकाला ‘मोदी कहता है महंगाई रोको, वो कहते हैं मोदी को रोको। मोदी कहता है भ्रष्टाचार को रोको, वो कहते हैं मोदी को रोको।

भाजपा ने न केवल कांग्रेस के स्लोगन का जवाब दिया बल्कि उसे कांग्रेस के विरोधाभासी स्लोगन जैसे ‘हर हाथ शक्ति हर हाथ तरक्की’ का भी फायदा मिला।

‘तरक्की’ की बात कहते समय कांग्रेस के विज्ञापन में गरीब का हाथ दिखाया गया जिसके कारण कांग्रेस का स्लोगन हास्यास्पद बन गया है। कांग्रेस के सारे चुनाव अभियान का सबसे ब़डा विरोधाभास वह था जिसमें राहुल गांधी के लिए ‘कट्टर सोच नहीं, युवा जोश’ कहा गया था। विज्ञापन में दिखाए गए हसीबा अमीन जैसे कुछ युवा कांग्रेसी नेता पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं।

ऐसा नहीं है कि भाजपा को उसके स्लोगन के करण कोई मुश्किल नहीं आई। ‘हर-हर मोदी, घर-घर मोदी’ स्लोगन को भाजपा को दूर करना प़डा। तकनीकी तौर पर उसमें कुछ गलत नहीं था, पर उसमें कुछ भावनात्मक आक्षेप थे। स्वयं नरेंद्र मोदी ने भी अपने समर्थकों को इस स्लोगन का उपयोग न करने की सलाह दी।

सच बात तो यह है कि स्लोगन चाहे कितना भी अच्छा हो, उसे आगे करने के लिए अच्छा नेता होना आवश्यक है। लोग यह जानते हैं कि केवल स्लोगन से कुछ नहीं होता। उसे कहने के लिए प्रभावी नेता होना ही चाहिए। सर्वप्रथम ‘अबकी बार मोदी सरकार’ स्लोगन आया तो बच्चों ने भी स्लोगन बनाने शुरू कर दिए। एक रोचक स्लोगन था, ‘आलू पराठे के साथ अचार, अबकी बार मोदी सरकार।’

जब मोदी ने कहा, ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ तो लोगों ने विश्वास किया। वे लोगों को इस आशा के साथ जो़डने में सफल हुए कि कुछ ब़डा कुछ अच्छा हो सकता है। यह किसी व्यक्ति विशेष के लिए अच्छा नहीं है, बल्कि यह भारत के लिए अच्छा है, परिणामत: भारत के लिए अच्छा है।

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