ऊंटेश्वरी माता का महंत

ऊंटेश्वरी माता का महंत‘‘ यह पुस्तक पी.बी.लोमियो द्वारा हिंदी में लिखी गई है। पी.बी. लोमियो ‘‘पूवर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट’’ के मुख्य सचिव हैं। यह किताब स्व. फादर एन्टोनी फर्नान्डीज की जीवन गाथा है।

यह पुस्तक उत्तर गुजरात में ईसाई मिशनरी द्वारा किए गए धर्म परिवर्तन का कच्चाचिट्ठा है। यहां ऊंट स्थानीय लोगों के जीवन का अटूट हिस्सा है। मदर मेरी को ऊंट की देवी अर्थात ऊंटेश्वरी माता घोषित किया गया। विदेशी धन के सहयोग से १०६ एकड़ जमीन खरीदी गई तथा एक चर्च का निर्माण किया गया। गांव के लोगों को भ्रमित करने के उद्देश्य से इस चर्च का निर्माण गुजरात में मंदिरों के निर्माण में उपयोग में लाई जाने वाली सोलंकी वास्तुकला के नमूने पर किया गया। इसी चर्च में फादर एन्टोनी की नियुक्ति हुई। फादर एन्टोनी ने चर्च में चल रही गंदी तथा अनैतिक गतिविधियों को नियंत्रित करने की कोशिश की तो उन पर चर्च ने किस प्रकार के जुल्म किए, यह किताब उन अत्याचारों की दास्तान है। यह पुस्तक ईसाई मिशनरी विषयक कई तथ्यों को उजागर करती है, तथा उन्हें मजबूती के साथ प्रस्तुत करती है। उनमें से कुछ तथ्य नीचे दिये जा रहे हैं-

१) किस प्रकार हिन्दुओं का तथा उनके धार्मिक स्थलों का स्वतंत्रतापूर्वक निवास के लिए तथा पश्चात धर्मपरिवर्तन के लिए उपयोग किया गया।
२) ईसाई लड़कियों का विवाह हिन्दू परिवारों में कर, उनका पूरे हिन्दू परिवार को ईसाई बनाने में किस प्रकार हथियार के रूप में उपयोग किया गया।
३) उन गैर-सरकारी संगठनों के नाम जो धर्मपरिवर्तन की प्रक्रिया में शामिल थे।
४) किस प्रकार धर्म परिवर्तन के बाद भी जाति के आधार पर भेदभाव किया जाता रहा।

इस पुस्तक में इन लोगों तथा इनके प्रतिनिधियों को भारत सरकार द्वारा की गई मान्यता पर भी सवाल खड़ा किया गया है। इस किताब में इसे दोहरी नागरिकता निरूपित किया गया है, क्योंकि चर्चों में भारतीय ईसाइयों को गुलामों की तरह रखा जाता है।

कुछ नन्स एवं प्रिस्ट के द्वारा जो लड़ाई लड़ी गई उसका भी यह किताब एक उत्कृष्ट अभिलेख है। इसमें उन कई अभिलेखों को भी सम्मानित किया गया है जो चर्चों को अनावृत्त करती है।

सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि इस किताब में उदाहरणों के साथ बताया गया कि हिन्दू समाज तथा हिन्दू संगठन किस प्रकार केवल धर्म परिवर्तन को रोकने में ही असफल नहीं रहे तो उन लोगों को जो वापस अपने हिन्दू धर्म में आना चाहते थे, उन्हें सहयोग देने में भी असफल रहे। इसे प्रत्येक हिन्दू तथा ईसाई को पढ़ना चाहिए।

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