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“स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”एक अद्भुत शिल्प

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  लौह पुरुष सरदार पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा को देखना और उनके चरणों में शीश नवाना एक अद्भुत प्रसंग है। गुजरात सरकार ने देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए बेहतरीन सुविधा उपलब्ध कराई है। जब से हमने मोबाइल में यू-ट्युब पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तसवीर…

दिल को छूती गांव की कहानियां

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सोनाली जाधव हिंदी-मराठी साहित्यिक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री गंगाधर ढोबले का ‘हरवलेलं गाव’ (गुम हो चुका गांव याने अंग्रेजी में The lost Village) मराठी कहानी संग्रह है. असल में ग्राम्य जीवन की दिल को छू लेनेवाली ये सत्यकथाएं हैं. भले काफी पहले ये कहानियां लिखी गई हों लेकिन वे आज भी उतनी ही तरोताजा है, आज भी अत्यंत जीवंत लगती हैं. सच है कि कहानी हमेशा ताजा होती है, कभी बासी नहीं होती. हालांकि लेखक का बचपन का वह गांव अब नहीं रहा; बहुत बदल चुका है. इस तरह वह गांव गुम हो चुका है; परंतु परिवर्तित गांव में भी वही पात

जिंदगी को गाते शायर ‘हस्ती’

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हस्तीमल ‘हस्ती’ के रचनात्मक योगदान के जिक्र के बगैर पिछले चार दशक के हिन्दी गज़ल के विकास को पूरी तरह रेखांकित नहीं किया जा सकता। हस्तीजी ऐसे शायर हैं, जो सच्चाई को गुनगुनाते हैं, समय को पहचानते हैं, वर्तमान, भूत और भविष्य के आर-पार खड़े हैं। खुद चिराग बन के जल वक्त के अंधेरे में, भीख के उजालों से रोशनी नहीं होती।  उपरोक्त पंक्तियां ही बयां कर देती हैं, गज़लकार के इरादे। इरादे इतने बुलंद हैं, तभी तो हरे राम समीप अपने आलेख ‘परम्परा और आधुनिकता के सेतु गज़लकार’ में लिखते हैं कि हस्तीम

भूखे भजन न होय…

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जिंदगी हर मनुष्य का इम्तहान लेती है और किंवदंतियां बनाने वालों को भी सोचने पर मजबूर कर देती है। नहीं तो कभी भूख से मरने वाला यूनान का एक भिखारी ‘होमर’ आज वहां का राष्ट्रकवि बन जाता और भीख मांगने के दौरान गाई जाने वाली लंबी पद्यावलियों का संकलन आज विश्व की सर्वश्रेष्ठ क्लासिक रचनाओं में सर्वोपरि मानी जाती... शाम के पांच बज चुके हैं। धर्मपत्नी जी द्वारा जबरदस्ती कराए जा रहे उपवास या यूं कहूं कि प्रताड़ना की वजह से आंतें आपस में चिपक गई हैं। शरीर की समस्त इंद्रिया, जितनी भी होती होंगी (इस समय य

उत्तर प्रदेश : साहित्यिक प्रदक्षिणा

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  साहित्य और रक्षा दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर उत्तर प्रदेश निवासी गौरव कर सकते हैं। संस्कृत से लेकर हिंदी और उर्दू की यह भूमि कर्मस्थली रही है। इस भूमि ने ऐसे-ऐसे नामवर साहित्यकार दिए हैं जिनका डंका आज भी बजता है। इसीलिए कहा जाता है कि ‘यहां

उद्यमिता की विरासत : उत्तर प्रदेश

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    उद्यमिता की दृष्टि से उत्तर प्रदेश परम्परागत शिल्प के लिये प्रसिद्ध है। इन शिल्पों का विकास गृह एवं कुटीर उद्योग के रूप में ग्रामीण और छोटे कस्बों में हुआ। मशीनी युग में भी इन शिल्पियों ने अपनी परम्परा, अनूठी विशेषता और गुणवत्ता बनाये रख

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