प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत

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अपनी कविता के माध्यम से प्रकृति की सुवास सब ओर बिखरने वाले  कवि श्री सुमित्रानंदन पंत का जन्म कौसानी (जिला बागेश्वर, उत्तराखंड) में 20 मई, 1900 को हुआ था। जन्म के कुछ ही समय बाद मां का देहांत हो जाने से उन्होंने प्रकृति को ही अपनी मां के रूप में…

मानस के अंग्रेजी अनुवादक एफ.एस.ग्राउस

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गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस केवल भारत ही नहीं, तो विश्व भर के विद्वानों के लिए सदा प्रेरणास्रोत रही है। दुनिया की प्रायः सभी भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ है। अंग्रेजी में सर्वप्रथम इसका अनुवाद भारत में नियुक्त अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी श्री एफ.एस.ग्राउस ने किया।  श्री ग्राउस का जन्म 1836 ई.…

विश्वकवि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर

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बंगला और अंग्रेजी साहित्य के माध्यम से भारत को विश्व रंगमंच पर अमिट स्थान दिलाने वाले रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री देवेन्द्रनाथ तथा माता का नाम शारदादेवी था। बचपन से ही काव्य में रुचि रखने वाले इस प्रतिभाशाली…

इतिहास की भूलों की ओर इशारा करता काव्य संग्रह

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राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत, सम्मानित, राष्ट्रवादी विचारधारा के पोषक, प्रखर चिंतक, मनीषी, गत दो दशकों से अधिक से सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे विनोद बब्बर ने अब तक 18 देशों की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्राएं की हैं। इनकी प्रकाशित 37 पुस्तकों में से 8 पुस्तकों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

रामभक्त आचार्य विष्णुकांत शास्त्री

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2 मई, 1929 को कोलकाता में पंडित गांगेय नरोत्तम शास्त्री तथा रूपेश्वरी देवी के घर में जन्मे आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री साहित्य, संस्कृति और राजनीति के अद्भुत समन्वयक थे। मूलतः इनका परिवार जम्मू का था। केवल भारत ही नहीं, तो सम्पूर्ण विश्व में हिन्दी के श्रेष्ठ विद्वान के नाते वे प्रसिद्ध…

धार्मिक साहित्य के प्रचार में अग्रणी गीता प्रेस

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धार्मिक विचारों के प्रसार में साहित्य का बहुत बड़ी भूमिका है। इस नाते हिन्दू साहित्य के प्रचार व प्रसार में गीता प्रेस, गोरखपुर का योगदान विश्व इतिहास में अतुलनीय है।  पूर्वी उत्तर प्रदेश का गोरखपुर नगर महायोगी गुरु गोरखनाथ, गौतम बुद्ध और महात्मा कबीर की तपस्थली व कर्मस्थली रहा है।…

वामपंथियों ने की भारतीय इतिहास की हत्या

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पूरे विश्व में केवल भारत ऐसा देश है, जहां यहूदी, ईसाई, पारसी आदि विभिन्न मत-मजहबों के लोग आक्रांताओं से उत्पीडित होकर या जीविका की तलाश में अपनी धरती छोडकर यहां आए तो हिंदू धर्म की उदारता और हिंदुओं की सहिष्णुता के कारण उन लोगों को भारत में ससम्मान रहने का…

संस्कृत के प्राचीन एवं मध्यकालीन शब्दकोश

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हिन्दू धर्म में व्याकरण और शब्दकोश की सुदीर्घ परम्परा रही है।  निघंटु : आर्यभाषा का प्रथम शब्दकोश संस्कृत के पुरातनतम उपलब्ध शब्दकोश वैदिक 'निघंटु' है। उसका रचनाकाल कम से कम ७०० या ८०० ई० पू० है। वैदिक शब्दों (केवल विरल या क्लिष्ट शब्द) के संग्रह को 'निघंटु' कहते थे। 'यास्क'…

अभाविप कि पुस्तक ‘ध्येय यात्रा’ का विमोचन

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इतिहास लिखने वालों ने अभाविप के साथ न्याय नहीं किया है, हम इतिहास बनाते हैं: दत्तात्रेय होसबाले अभाविप के सात दशकों की यात्रा को दर्शाती पुस्तक 'ध्येय यात्रा का दिल्ली में हुआ विमोचन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सात दशकों की यात्रा को दर्शाती पुस्तक 'ध्येय यात्रा' का विमोचन गुरुवार…

हरल्ला चिन्तन

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जब-जब चुनाव होते हैं, तब एक पार्टी जीतती है। दूसरी तीसरी चौथी पांचवी हारती है। जो हारते हैं, वे मन ही मन जानते हैं कि हार कितनी बुरी होती है पर उसी मन को समझाते हैं कि चुनाव में हार जीत तो चलती ही रहती है क्योंकि विजेता तो एक ही होता है न। जो जीता वही सिकन्दर टाइप से। जीत के हजार बाप हो जाते हैं और हार बिचारी बेबाप सी, अनाथ लावारिस-सी किसी अंधेरे कोने में बिसूरते रहती है

एक भारतीय आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी

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श्री माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अपै्रल, 1889 को ग्राम बाबई, जिला होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में श्री नन्दलाल एवं श्रीमती सुन्दराबाई के घर में हुआ था। उन पर अपनी माँ और घर के वैष्णव वातावरण का बहुत असर था। वे बहुत बुद्धिमान भी थे। एक बार सुनने पर ही कोई…

नयी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर भवानी प्रसाद मिश्र

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साहित्य के क्षेत्र में कविता सबसे प्राचीन एवं लोकप्रिय विधा है, चूँकि इसमें कम शब्दों में बड़ी बात कही जा सकती है। काव्य को अनुशासित रखने हेतु व्याकरण के आचार्यों ने छन्द शास्त्र का विधान किया है; पर छन्द की बजाय भावना को प्रमुख मानने वाले अनेक कवि इस छन्दानुशासन…

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