काव्यक्षेत्र के तेजस्वी नक्षत्र माइकेल मधुसूदन दत्त

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भारतीय काव्य-क्षेत्र के तेजस्वी नक्षत्र माइकेल मधुसूदन दत्त का जन्म 25 जनवरी, 1824 को ग्राम सागरदारी (जिला जैसोर, बंगाल) में हुआ था। आजकल यह क्षेत्र बांग्लादेश में है। इन्हें 19 वीं सदी के रचनात्मक पुनर्जागरण का प्रणेता माना जाता है। इनके पिता श्री राजनारायण दत्त एक प्रसिद्ध वकील तथा माता…

हिन्दी साहित्य के अमिट हस्ताक्षर रांगेय राघव

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यों तो हिन्दी साहित्य की श्रीवृद्धि में अनेक लेखकों ने योगदान दिया है; पर 17 जनवरी, 1923 को जन्मे रांगेय राघव का स्थान उनमें विशिष्ट है।  वे तमिलभाषी पिता और कन्नड़भाषी माँ की सन्तान थे; पर उन्होंने अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम हिन्दी को बनाया। 15 वर्ष की छोटी अवस्था से…

गुनाहों का देवता डॉ. धर्मवीर भारती 

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सत्तर और अस्सी के दशक में हिन्दी साहित्याकाश में साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ सूर्य की तरह पूरे तेज से प्रकाशित होती थी। उसमें रचना छपते ही लेखक का कद रातोंरात बढ़ जाता था। उस समय के सैकड़ों ऐसे लेखक हैं, जिन्होंने धर्मयुग से पहचान और प्रसिद्धि पाई। छपाई की पुरानी तकनीक…

संघर्ष के आभामंडल से दीप्त हैं कविताएं

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अटल जी की नेतृत्व क्षमता और लोगों को साथ लेकर चलने की प्रवृत्ति उनकी कविताओं में भी परिलक्षित होती है। उन्होंने बहुत बार इस बात को माना कि उनके विराट राजनीतिक व्यक्तित्व के साए तले उनकी कविताओं को वह ऊंचाई न मिल सकी, जिनकी वे हकदार थीं।

सफलता की कहानी

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दुनिया भर में विकलांगों को दोयम दर्जे का स्थान प्राप्त होता है, जबकि सही दिशा मिलने पर वे भी सामान्य जनों की ही भांति जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बेहतरीन मुकाम हासिल कर सकते हैं। सरकारों ने उनकी तरफ ध्यान देना शुरू कर दिया है परंतु समाज को और जागरुक होना पड़ेगा ताकि समाज का यह प्रभाग भी पूरी तरह मुख्य धारा के साथ चल सके।

“द कश्मीर फाइल्स” पर अनर्गल प्रलाप और विकृत राजनीति 

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“द कश्मीर फाइल्स” आतंकवाद के भयावह दौर तथा सात सत्य घटनाओं पर बनी एक सच्ची फिल्म है। इन घटनाओं के सबूत उपलब्ध हैं। यह सेकुलर लोग झूठ पर आधारित कहानियां तो पढ़ लेते हैं लेकिन इस्लामी आतंकवाद के कारण हुयी  हिन्दू नरसंहार की असली कहानी इनको वल्गर लगती है  क्योंकि इन लोगों  को हिंदुओं का पलायन, उनकी हत्या, उनकी बहिन –बेटियों के सार्वजनिक बलात्कार का समर्थन करने में आनंद मिलता है। “द कश्मीर फाइल्स” का विरोध करने वाला गैंग बहुत ही खतरनाक और मानसिक विकृति का गैंग है जो जम्मू -कश्मीर की शांत हो रही स्थिति में अशांति का जहर घोलना चाहता है। 

एजेंडा सेट करके कैसे किया जाता है दिमाग हैक ?

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चार किताबें,, मेरे पास युवा लड़के खूब बैठते थे आकर,, उन्होंने एकबार पूछा कि महाराज जी कैसे पता चले कि कोई व्यक्ति एजेंडा सेट करके हमारे दिमाग को हैक कर रहा है?? देखो भाई,,वैसे तो अनेकों तरीके होते हैं पता करने के लेकिन ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण है,, अपने धर्म का…

हम कब अपने नायकों को पहचानेंगे ?

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जो राष्ट्र अपने नायकों को नहीं पहचानता, उनका सम्मान नहीं करता— वह जीवित रहने का अधिकार खो देता है। पहले भारत का तीन हिस्सों (खंडित भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश) में विभाजित होना, फिर कश्मीर के एक तिहाई पर कब्जा हो जाना और 1962 के चीन युद्ध में देश की शर्मनाक हार होना— इसी रोग के कुछ लक्षण है। 'देर आए दुरुस्त आए'— एक पुरानी कहावत है, जो दिल्ली में 23-25 नवंबर को संपन्न हुए कार्यक्रम पर बिल्कुल चरितार्थ होती है। असम के अहोम योद्धा लाचित बोरफुकन की 400वीं जयंती पर दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसके समापन समारोह में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का इतिहास केवल गुलामों का नहीं, योद्धाओं का भी है। किंतु देश के वीरों का इतिहास दबाया गया। क्या यह सत्य नहीं कि मार्क्स-मैकॉले मानस प्रेरित इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को सर्वाधिक विकृत किया है। यही कारण है कि अधिकांश पाठक लाचित बोरफुकन के नाम से शायद ही परिचित होंगे। क्या यह परिदृश्य देश के समक्ष एक बड़ी चुनौती नहीं?

बौद्धिक गुलामी से मुक्ति हेतु शुरू हुआ राष्ट्रधर्म

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दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि देश की हर क्षेत्र में उन्नति और प्रगति होनी चाहिए लेकिन वैचारिक स्पष्टता और वैचारिक शुद्धता भी चाहिए। आर्य द्रविड़ मिथक को स्थापित करने का प्रयास इस देश में किया गया। भारत एक देश है ही नहीं ऐसी बातें कही गयीं। अंग्रेजों के जमाने से शुरू हुआ षड़यंत्र आजादी के 75 वर्षों तक जारी रहा। सरकार्यवाह ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद भी भारत की संसद में बजट शाम पांच बजे पेश होता था। अटल जी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने यह परम्परा बदली। राजपथ को कर्तव्यपथ बनाने का काम हुआ। देश को  मानसिक गुलामी से बाहर लाना होगा। 

ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ स्वधर्म रक्षक तालिम रुकबो

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निर्धन एवं अशिक्षित वनवासियों की मजबूरी का लाभ उठाया और लालच देकर हजारों लोगों को ईसाई बना लिया। अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट जिले में एक दिसम्बर, 1938 को जन्मे श्री तालिम रुकबो ने शीघ्र ही इस खतरे को पहचान लिया। वे समझते थे कि ईसाइयत के विस्तार का अर्थ देशविरोधी तत्वों का विस्तार है। इसलिए उन्होंने आह्वान किया कि अपने परम्परागत त्योहार सब मिलकर मनायें। उन्होंने विदेशी षड्यन्त्रकारियों द्वारा जनजातीय आस्था पर हो रहे कुठाराघात को रोकने के लिए पूजा की एक नई पद्धति विकसित की। उनके प्रयासों का बहुत अच्छा फल निकला। राज्य शासन ने भी स्थानीय त्योहार ‘सोलुंग’ को सरकारी गजट में मान्यता देकर उस दिन छुट्टी घोषित की। 

जिहादी तालीम, जन्नत और 72 हुर

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श्रद्धा के 35 टुकड़े करने वाला कातिल आफताब यह बोल रहा है कि अगर फांसी भी चढ़ा तो भी जन्नत में जाऊंगा और वहां मुझे हूरे मिलेंगी। दैनिक जागरण में यह खबर भी प्रकाशित हुई थी कि आफताब ने पुलिस के सामने यह कहा कि श्रद्धा के साथ लिव-इन में रहते हुए भी उसके 20 हिंदू लड़कियों से रिश्ते बने थे। 2 अक्टूबर 2022 के दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में एक और समाचार छपा था। इंदौर में एक गर्भवती लड़की का गैंगरेप नौकरी दिलाने के बहाने किया गया। रेप करने के आरोप में सभी 4 मुसलमानों को अरेस्ट किया गया था। इसमें से एक मुसलमान जिसका नाम प्रिंस था वह लड़की से बलात्कार कर रहा था। लड़की ने उससे कहा कि वह गर्भवती है तो इस पर प्रिंस ने जवाब दिया कि हमारे समाज में यह सब चलता है और हिंदू लड़की से बलात्कार करने पर जन्नत नसीब होती है।

संविधान के प्रति आरएसएस का दृष्टिकोण

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हमारा संविधान, हमारे देश की चेतना है। इसलिए उस संविधान के अनुशासन का पालन करना, यह सबका कर्तव्य है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसको पहले से मानता है”। संघ के इतिहास में यह पहली व्याख्यानमाला थी, जिसमें सभी प्रकार की विचारधाराओं के प्रमुख लोगों को आमंत्रित किया गया था और उनके समक्ष संघ के सर्वोच्च अधिकारी ने अपना दृष्टिकोण रखा था। सरसंघचालक डॉ. भागवत न केवल यह बता रहे हैं कि संविधान के अनुशासन का पालन संघ पहले से करता आया है अपितु वे अन्य से भी आग्रह कर रहे हैं कि संविधान का पालन करना सभी अपना कर्तव्य समझें। नागरिक अपने संविधान के मर्म को जानें, इसके लिए सरसंघचालक आग्रह करते हैं कि हमें अपने बच्चों को जीवन के प्रारंभिक चरण में ही संविधान पढ़ाना चाहिए। (हिन्दी मासिक पत्रिका -विवेक के साथ साक्षात्कार– 9 अक्टूबर, 2020)

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