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 ****सुनील देवधर***

      पूर्वोत्तर भारत हमारे देश का एक मूल्यवान   हिस्सा है। प्राकृतिक सुंदरता से ओतप्रोत है। अंग्रेजों ने शिलांग में राजधानी बनाई। वे उसे “स्कॉटलंड ऑफ ईस्ट” कहते थे। मेघों का घर इसलिए मेघालय, जहां चेरापूंजी, मौसिनराम  दुनिया के सर्वाधिक वर्षावाले स्थान हैं। अरूणाचल प्रदेश के बोमडीला, तवांग दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करते है।

 आसाम के मां कामाख्या, महाबाहो ब्रह्मपुत्र नद गौरवपूर्ण स्थान है। दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप जो नदी के बीच है, “माजुली”, वह भी आसाम में है।

 मणिपूर में नेताजी सुभाषचंद्र बोसजी ने विजय प्राप्त की थी। उन्होंने मोईरांग के लोकटाक झील के किनारे लगा यूनियन जैक उखाडकर वहां तिरंगा लहराया। हमारे लिए वह तीर्थ स्थान के समान है।

 त्रिपुरा के त्रिपुरसुंदरी का शक्तीपीठ, उनाकोटी की पहाडों में बनायी हुई मूर्तीयां, पुरातन नीरमहल दर्शनीय है। नागालैंड में डिमापूर जो पहले हिडींबापूर था, महाभारत की याद ताजा करता है।

 भारत की जनजातीय लोगों की समस्याओं की गंभीरता को जानकर अटलजी की सरकारने स्वतंत्र “जनजातीय विकास मंत्रालय” का गठन किया था। पूर्वोत्तरमें भारत कीकुल जनजातीय आबादी के अनुपात में ५०% लोग रहते हैं। इस मंत्रालय का सर्वाधिक लाभ पूर्वोत्तरको मिला। देश की सड़कें बनाने में सबसे बड़ा काम अटलजी के समय “प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना” और सुवर्ण चर्तुभुज योजना के माध्यम से हुआ। पूर्वोत्तरके सिलचर से प्रारंभ होनेवली किसी योजना में  पहली बार पूर्वोत्तरको शामिल किया गया। अटलजी की लुक ईस्ट पॉलीसी ने पूरे देश का ध्यान पूर्वोत्तरकी तरफ आकर्षित किया।

 कानून व्यवस्था ठीक रहना यह विकास की “प्री कंडीशन” है इसे जानकर अटलजी की सरकार ने पूर्वोत्तरके विद्रोही आतंकवादियों को हथियार छोडकर मुख्य प्रवाह में आने का आवाहन किया। पहली बार केंद्र में ऐसी सरकार आयी थी कि जो पूर्वोत्तरमें विकास चाहती थी। उनपर भरोसा रखकर कई आतंकवादी संघटनों ने हथियार छोड दिये और बातचीत के माध्यम से वापसी के रास्ते खुल गये। परिणाम स्वरुप एनडीए-१ के समय में पूर्वोत्तरमें शांती का पर्व शुरु हुआ और विकास प्रारंभ हुआ।

 किंतु दुर्भाग्य से वह सरकार जाने के बाद यूपीए-१ और यूपीए-२ के जमाने में सारे कार्य ठप्प हो गये। भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया और उग्रपंथीयों ने फिर से आतंक प्रारंभ किया। बांग्लादेश की सीमा को सील करने का कार्य जो एनडीए-१ ने शुरू किया था वो बंद हो गया और फिर एक बार बेशुमार घुसपैठ शुरूू हो गई।

 २०१४ के चुनाव में देश ने परिवर्तन किया और मा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर विश्वास दिखाकर उन्हें बहुमत दिया। पूर्वोत्तरमें भी पहली बार ७ सांसद चुनकर आये। मोदीजी ने प्रधानमंत्री बनते ही स्पष्ट संकेत दिया की पूर्वोत्तरउनकी प्राथमिकता है और विशेष ध्यान देकर वें उसे विकसित करना चाहते हैं।

 मोदीजी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सतत ४ दिन पूर्वोत्तरका प्रवास किया।  इस दरम्यान सालों से बंद पड़े मेघालय-आसाम रेल्वे के प्रकल्प को ६ महीने में पूरा करवाकर मोदीजी ने रेल्वे को हरी झंडी दिखाई और मेघालय भारत के रेल मॅप पर आ गया। नागालैंड का गरिमामय उत्सव “हॉर्न बेल फेस्टीवल” पहली बार प्रधानमंत्री जी की उपस्थिती में हुआ। त्रिपुरा में सालों से बंद पडे तालाताणा की गैस से विद्युत निर्मिती के प्रकल्प को मोदीजी के हाथों प्रारंभ किया गया। मणिपूर के लोग “खेलों” अग्रणी हैं। इस क्षमता को पहचान कर पहली बार देश में स्पोट्र्स युनिव्हर्सिटी की घोषणा मणिपूर में मोदीजी ने की और उसे १०० करोड रूपये भी दिये। पूर्वोत्तरके गरीब परिवारों के अंडर ग्रॅज्युएट विद्यार्थीयों के लिए “ईशान उदय” योजना के अंतर्गत १०,००० छात्रों को ३५०० से ५००० रुपये प्रतिमाह स्कॉलरशिप देना शुरु किया।

 पूर्वोत्तरके गुणवान विद्यार्थियों को शेष भारत में सरकारी खर्चे से प्रवास करवा के उनकी छुट्टीयों के समय में खखढी, छखढी, खखडएठी में प्रवास करवाकर वहां के छात्राों और प्राध्यापकों से उनकी चर्चा, प्रशिक्षण, काऊनसिलिंग करवाना शुरु किया। इसे ही “ईशान विकास” नाम मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा दिया गया है।

 पूर्वोत्तरमें सडकों की अवस्था खराब है। कई जिलों को जोडनेवाली सडकें नहीं है। इसे देख कर नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने निर्णय लिया है की पूर्वोत्तरमें महामार्गों का जाल बुना जाएगा। सारी राजधानियों को जोडनेवाले ४ लेन हायवे और ८८ जिलों को जोडनेवाले २ लेन हायवे बनाए जाऐंगे। एक वर्ष में केवल सडकें बनाने के लिए नितीन गडकरी जी ने १०००० करोड रूपये पूर्वोत्तरके लिये आवंटित किए।

 पूर्वोत्तरकी सीमाएं चीन, म्यांमार व बांग्लादेश से जुडी है। इन देशों की तरफ जानेवाली सडकें, महामार्ग बनने से पूर्वोत्तरपूरे दक्षिण पूर्व एशिया के व्यापार का केंद्र बन सकता है। इसे ध्यान में रखकर महामार्ग बनाना प्रारंभ हो गया है। पूर्वोत्तरमें रेल नेटवर्क बनाना प्रारंभ कर दिया  गया है। सभी राजधानियों को रेल से जोडना, व्यापार बढने हेतु ऐसे स्थानों को रेल से जोडना, जहां खनिज संपत्ति तथा प्राकृतिक संपत्ति है, आदि योजनाएं काार्यान्वित हो चुकी हैं। पूर्वोत्तरमें इन योजनाओं के लिए ५११६ करोड रुपये आवंटित हो चुके हैं।

 पूर्वोत्तरमें जलविद्युत निर्माण की प्रचंड क्षमता है और दुर्भाग्य से इसी क्षेत्र के हजारों गांव अभी अंधेरे में है। इसका कारण “प्रेषण और वितरण” की व्यवस्था ठीक नही है। “ट्रान्समिशन और डिस्ट्रीब्यूशन” में सुधार लाना केंद्र की सरकार ने शुरू किया है। अरूणाचल और सिक्किम इन दुर्गम राज्यों के लिए ४,७५४ करोड और अन्य ६ राज्यों के लिए पहले चरण में ५,१११ करोड रुपये आवंटीत हो चुके हैं।

 इस सरकार के पांच वर्ष पूर्ण होने तक पूर्वोत्तरसे कुल ६३,२५७ एम डब्ल्यू जलविद्युत की निर्माण का लक्ष्य पूरा करने का संकल्प है।

 पूर्वोत्तरके लोग “ऑर्गेनिक फार्मिंग” ही अधिकतर करते है। इसे बढावा देने के लिए १०० करोड रुपये आवंटित हो चुके है।

 पूर्वोत्तरमें विविध प्रकार के फूल मिलते है। उनके निर्यात के संबंध में भी कुछ बजट दिया गया है। पूर्वोत्तर के लोगों का प्रमुख व्यवसाय खेती है। लेकिन अभी अत्याधुनिक संसाधनों से एवं तरीकों से वहां खेती नहीं की जाती। अधिकाधिक छात्र कृषि के क्षेत्र में अध्ययन करें इस हेतु से ६ नये कृषि विद्यापीठों के स्थापना की योजना बनाई गयी है।

 पूर्वोत्तरका क्षेत्र अधिकर तर पहाडी होने के कारण दुर्गम है। मोबाईल नेटवर्क की कठिनाई है। इसलिए पूर्वोत्तरमें नेटवर्क डेव्हलमेंट के लिए “काम्प्रिहेन्सिव टेलिकॉम डेवलपमेंट प्लान” के तहत ५३३६ करोड रुपये आवंटित किये जा चुके है। पूर्वोत्तरके ६ शहरों में प्रत्येक स्थान पर ३ एफ एम चॅनल्स ऐसे कुल १८ नये एफ एम चॅनल्स प्रारंभ करने की घोषणा कर दी गयी है और उसका क्रियान्वयन शुरू हो गया है।

 जहां नेटवर्क नहीं है वहां २जी कव्हरेज और नॅशनल हायवेज पर “सिमलेस २जी” कव्हरेज की योजना है।

 पूर्वोत्तरमें कई नॉन ऑपरेटीव्ह एअरपोर्ट है उन्हें शुरू करने की योजना है। उन एअरपोर्ट पर एअर ऑपरेशन प्रारंभ करने के लिए एअर लाईन्स कंपनियों से चर्चा चल रही है। डोनर मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह जी के अगुवाई के कारण इंडीगो एअरलाइन ने दिल्ली से डिमापूर फ्लाईट शुरु की।

 पर्यटन को बढावा देने हेतु पर्यटन स्थानों पर छोटे विमान उतरने जैसे छोटे एअरपोर्टस बनाने की योजना है।

 वर्तमान एअरपोर्टस पर नाईट लैंडिंग क्षमता विकसित की जा रही है। डिब्रुगढ, गुवाहाटी और अगरताला शहरों को व्यापार का हब बनाने की योजना है।

 फूल और फल जो जल्दी खराब हो जाते हैं उनके सुरक्षित निर्यात के लिए एअरपोर्ट के पास कोल्ड स्टोरेज बनाने की योजना है।

 पूर्वोत्तरके पर्यटन और संस्कृति को बढावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने “पूर्वोत्तरसर्कीट” को १२० करोड आबंटित कीए हैं।

 “माजुली” द्विप विश्व का सबसे बडा नदी के अंदर बसा द्वीप है वह आसाम की सांस्कृतिक धरोहर भी है। श्रीमत शंकरदेव जी ने वहां तपश्चर्या की और सत्र (आश्रम) परंपरा प्रारंभ किया। उसके विकास हेतु १५ करोड का आबंटन किया, “कामाख्या” जैसे श्रेष्ठ शक्तिपीठ के विकास के लिए ५ करोड आबंटित किए। पूर्वोत्तरमें “बे्रड अन्ड बटर” टूरीझ्म के विकास की योजना गतिमान है।

 पूर्वोत्तरकी संस्कृति एवं कला को समूचे देश में “शोकेस” करने हेतु राष्ट्रीय राजधानी में भव्य “पूर्वोत्तरसंगीत व नृत्य” के कार्यक्रम और “भव्य पूर्वोत्तरमहोत्सव” का आयोजन किया गया। इसी प्रकार के महोत्सवों का आयोजन सारे देशभर में बडे शहरों में करने की योजना है।

 पूर्वोत्तरके युवा शिक्षा ग्रहण करने हेतु बडी संख्या में शेष भारत के बडे शहरों में आते है। इन छात्रों के निवास की व्यवस्था की समस्याएं रहती है। इसे ध्यान में लेकर दिल्ली के विश्वविद्यालयों में भव्य छात्रावासों के लिये “फंड” डोनर मंत्रालय ने आबंटित किये है। ऐसे छात्रावास बंगलोर, पुणे और मुंबई में भी प्रस्तावित हैं।

मा. प्रधानमंत्री जी ने सालों से ठंडे बस्ते में पडा बांग्लादेश की सीमा को निर्धारीत करनेवाला बिल पारित किया। जमीन के आदान प्रदान से दोनों देशों के सीमावर्ती इलाके में हर्षोल्हास का माहौल रहा। मोदीजी की बांग्लादेश यात्रा में आगरताला से ढाका होते हुए कलकत्ता तक की बस सेवा का प्रारंभ हुवा। त्रिपुरावासियों के लिए यह वरदान है। जिस त्रिपुरा की राजधानी से कलकत्ता जाने के लिए २ दिन लगते थे वह प्रवास अब १४ घंटे में पूरा हो जाएगा। बांग्लादेश से अब और भी सडकें पूर्वोत्तरको शेष भारत से जोडेगी। जिससे व्यापार और सामान्य नागरिकों को यातायात में सुविधा होगी।

 केंद्र की मोदीजी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने प्रारंभ की हुई सभी योजनाओं का लाभ तो पूर्वोत्तरवासियों को हो ही रहा है। गत सवा साल के काल में इस सरकार ने आज तक पूर्वोत्तरके विविध मंत्रालयों के माध्यम से कुल ५८,८२१ करोड रुपये आबंटित किए हैं। जो पूर्वोत्तरके इतिहास में सबसे बडी राशि है।

 योजनाएं बनाने, फंड आबंटित करने तक ही यह सरकार सीमित नहीं रही। इन योजनाओं का क्रियान्वयन गतिशीलता से हो, समयबध्द तरीके से हो और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार के सिवा हो इस पर भी केन्द्र सरकार का ध्यान है।

 माननीय प्रधानमंत्री जी के निर्देशानुसार हर १५ दिन के कालांश में एक केंद्रीय मंत्री पूर्वोत्तरके हर राज्य में प्रवास करें। इस प्रकार एक महीने में दो केंद्रीय मंत्रीयों का हर राज्य में प्रवास हो रहा है। मंत्रियों के पहुंचने से योजनाओं में गती आ रही है। बिना भ्रष्टाचार के निधी का सही विनियोग हो रहा है।

  मो.ः ९३२००२००२१

 

 

 

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