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***डॉ. अकेलाभाई***  

प्रकृति की अनुपम छटाओं से लबरेज मेघालय पूर्वांचल का महत्वपूर्ण राज्य है। राजधानी शिलांग में अनेक पर्यटन स्थल है। निकट ही चेरापूंजी विश्व में सब से अधिक बारिश वाला गांव है। कई पर्वत शिखर, सरोवर, गुफाएं हैं, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। जलवायु इतनी स्वास्थ्यप्रद कि लोग इसे पूर्व का स्विट्जरलैण्ड कहते हैं।
 
 
मेघालय पूर्वोत्तर भारत का एक छोटासा राज्य है। इसका गठन भारतीय संघ के इक्कीसवें राज्य के रूप में २१ जनवरी १९७२ को असम के संयुक्त खासी, जयंतिया तथा गारो हिल्स को मिलाकर स्वर्गीय कैप्टन विलियमसन ए. संगमा के नेतृत्व में किया गया। उस समय मेघालय में पांच ज़िले थे, जबकि आज कुल सात ज़िले हैं, क्रमशः जयंतिया हिल्स, ईस्ट खासी हिल्स, वेस्ट खासी हिल्स, ईस्ट गारो हिल्स, वेस्ट गारो हिल्स, साउथ गारो हिल्स और रिभोई। १९८१ की जनगणना के अनुसार इस राज्य की कुल जनसंख्या १३,३५,८१९ थी १९९१ की जनगणना के मुताबिक इसकी जनसंख्या १७,७४,७७८ बताई गई है, २००१ की जनगणना के अनुसार मेघालय की जनसंख्या २३,०६,०६९ है। और अब २०११ की जनगणना के अनुसार मेघालय राज्य की जनसंख्या २९,६४,००७ पहुंच गई है। यह राज्य विश्व में सर्वाधिक वर्षा के लिए प्रसिध्द है। अपने इस प्राकृतिक गुण के कारण ही इसे मेघालय नाम मिला। इस राज्य में मुख्य रूप से तीन जनजातियां निवास करती हैं, खासी, गारो और जयंतिया। यहां की राजभाषा अंग्रेज़ी है तथा मातृभाषा हर जनजाति की अलग-अलग है।
भाषा के आधार पर मेघालय को असम में अलग किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पूरा पूर्वांचल एक ही राज्य था, जिसकी राजधानी शिलांग थी। पूर्वोत्तर में भाषाओं की विभिन्नता के कारण छोटे-छोटे राज्य बनते गए और भारत का यह पूर्वोत्तर क्षेत्र क्रमशः असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम, मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड प्रांतों में विभक्त होकर ‘सेवेन सिस्टर्स’ के नाम से प्रसिध्द हो गया। मेघालय में अधिक वर्षा होने के कारण ही इस राज्य का नाम मेघालय पड़ा। शरद ॠतु का आनंद यहां साल भर लिया जा सकता है। यहां का तापमान गर्मियों में अधिकतम २३ डि.सें. रहता है, जबकि सर्दी के मौसम में यहां का न्यूनतम तापमान ३ डि.सें. हो जाता है।
मेघालय की राजधानी शिलांगः
शिलांग भारत का एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। समुद्र तल से १,४९६ मीटर अर्थात ५ हजार फुट की ऊंचाई पर बसा यह शहर पूर्वोत्तर भारत का ‘स्कॉटलैण्ड’ कहलाता है। पर्यटन की दृष्टि से इस शहर का अपना एक अलग महत्व है। घने देवदार के वृक्षों की छाया में बसा यह शहर पर्यटकों को आनंद और मनोरंजन देता है। यहां की पहाड़ियां, झरने, सरोवर और इनके साथ ही यहां की संस्कृति, सभ्यता व परंपरा भारत की विभिन्नता में एकता का परिचय देती है। इसकी खूबसूरती से प्रभावित हो कर पूर्व के ब्रिटिश शासकों ने इसे ‘मिनी लंदन’ की उपाधि दी है।
यह शहर सैकड़ों वर्ष पूर्व मात्र एक पहाड़ी स्थान था। सन १८६४ में इसे शहर का दर्जा मिला। इसके बाद १८७४ में इसे असम की राजधानी बनाया गया। मेघालय को स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिलने के बाद २१ जनवरी, १९७२ को इसे मेघालय की राजधानी बना दिया गया।
दर्शनीय स्थलः
वाड्र्स लेक ः शिलांग में पुलिस बाजार के निकट एक कृत्रिम सरोवर है। इसे मनोरंजन के लिए देखा जा सकता है। इस सरोवर में नौकायन की सुविधा भी है, जिसका शुल्क लिया जाता है। प्रवेश का समय सवेरे १० बजे से शाम ५ बजे तक है। मंगलवार को अवकाश रहता है।
लेडी हैदरी पार्क ः सिविल अस्पताल के पास लेडी हैदरी पार्क है। इसमें देखने के लिए पशुपक्षियों के अतिरिक्त बच्चों के खेलने के लिए साधन भी हैं। प्रवेश समय सवेरे १० बजे से शाम ६ बजे तक का है। प्रवेश शुल्क लगता है। सोमवार को अवकाश रहता है।
शिलांग पीक ः शिलांग से लगभग १० किलोमिटर की दूरी पर इस शहर का सबसे ऊंचा स्थान है, जिसे शिलांग पीक कहा जाता है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से १९६० मीटर है। इस स्थान पर आप बस या टैक्सी से जा सकते हैं। इसकी चोटी से सारे शहर का दृश्य बड़ा मनोरम लगता है।
जल प्रपात ः शिलांग तथा इसके आसपास कई जल प्रपात हैं, जिन्हें देख कर पर्यटक मोहित हुए बिना नहीं रहते हैं। विडेन, विशॉप, एलिफेंट, स्वीट, सेवेन सिस्टर्स, कालिकाई, स्प्रैड ईगल आदि प्रपात देखने योग्य हैं।
जैविक उद्यान ः वाड्र्स लेक के समीप एक जैविक उद्यान है। विभिन्न तरह के पेड़-पौधे वनस्पति शास्त्र के छात्र-छात्राओं के लिए ज्ञानवर्द्धक हैं।
राज्य संग्रहालय ः मेघालय सचिवालय के समीप पुलिस बाजार से एक किलोमीटर की दूरी पर राज्य संग्रहालय है। इसमें राज्य के विभिन्न जनजातियों की परंपराओं को देख सकते हैं।
जिला पुस्तकालय ः इसी परिसर में जिला पुस्तकालय, सेमिनार हॉल और प्रेक्षा-गृह हैं। परिसर के अंदर ही इंदिरा गांधी और सोसो थाम की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। स्वतंत्रता सेनानी उतिरोत सिंह की स्मारक भी इसी परिसर में बनाया गया है।
शिलांग गोल्फ कोर्स ः शिलांग के पोलो बाजार के निकट भारत का मशहूर गोल्फ कोर्स है।
मोसिनराम ः शिलांग से ५५ किलोमीटर की दूरी पर एक ऐतिहासिक गुफा है, जिसके बाहर पत्थर का प्राकृतिक शिवलिंग है, जो लगभग ६ फुट लंबा और ३ फुट मोटा है। इस शिवलिंग के ऊपर हमेशा पानी गिरता रहता है। गर्मियों में भी यह झरना सूखता नहीं है। इन गुफाओं को देखने से ऐसा लगता है कि यहां पहले लोग रहते थे।
चेरापूंजी ः शिलांग से ५६ किलोमीटर की दूरी पर वर्षा के लिए मशहूर स्थान चेरापूंजी है। यह स्थान समुद्रतल से १३०० मीटर की ऊंचाई पर है। इस स्थान पर गुफाएं और झरने देखने योग्य हैं।
उमियम लेक ः गुवाहाटी-शिलांग मार्ग पर स्थित उमियम लेक शिलांग से १९ किलोमीटर की दूरी पर है। यहां नौकायन की सुविधा है। वनभोज के लिए यह स्थान अत्यंत रमणिक है।
कैसे और कब आएं ः शिलांग अक्टूबर से मई महीने के बीच आप कभी भी आ सकते हैं। यह समय भ्रमण के लिए सुविधाजनक होगा। आप जब भी आएं, साथ में गरम कपड़े अवश्य लाएं। होटलों में रहने की सुविधा के साथ-साथ ओढ़ने-बिछाने की भी सुविधा मिलेगी। असम की राजधानी गुवाहाटी आप सड़क, रेल या हवाई मार्ग से आ सकते हैं। गुवाहाटी से शिलांग की दूरी लगभग १०० किलोमीटर है, जिसे आप बस, टाटा सुमो या टैक्सी से तय कर सकते हैं।
मेघालय की जनजातियां ः मेघालय में प्रमुख रूप से तीन जनजातियॉं निवास करती हैं, जो यहॉं के मूल निवासी मानी जाती हैं- क्रमशः खासी, जयंतिया और गारो। इनके अतिरिक्त अन्य जनजातियां जैसे मिजो, लुसाई, नागा, कुकी आदि भी इस राज्य में नौकरी या व्यवसाय के लिए निवास करती हैं। यह राज्य एक जनजातीय बहुल राज्य हैं। अन्य जातियों में बंगाली, नेपाली, पंजाबी, भूटानी, बौद्ध, जैन, मारवाड़ी, बिहारी, मुसलमान आदि भी हैं। इन जनजातियों के नाम के आधार पर मेघालय के पहाड़ियों का नामकरण हुआ है। ये जनजातियां मंगोलियन वंश से संबंधित हैं। ऐसा विश्वास है कि खासी जनजातियों की उत्पत्ति दक्षिण एशिया, जयंतिया मंगोलियन वंश से तथा गारो जनजातियों की उत्पत्ति तिब्बजी वंश से हुई है।
वेशभूषा ः खासी, गारो और जयंतिया समुदाय के पुरुष घुटनों तक धोती, कुर्ता और कोट (बिना बांह वाला) पहनते हैं। महिलाएं ‘जैनसेम’ पहनती हैं। ‘जैनसेम’ दो हिस्सों का कपड़ा होता है जो कंधे से पैर तक ढंकने का काम करता है। इन पारंपरिक पोशाकों के अलावा आजकल लड़के-लड़कियां जींस के पैंट और जैकेट पहनने लगे हैं। मिडी और स्कर्ट-ब्लाउज का प्रचलन भी खूब बढ़ा है। यहां की जनजातियां पान और कच्ची सुपारी, जिसे यहां पर ‘क्वाय’ कहा जाता है ज्यादा पसंद करती हैं।
कृषिः मेघालय में धान की खेती खूब होती है। इसके अलावा आलू, अन्ननास, केले, संतरे आदि भी भरपूर मात्रा में उपजाए जाते हैं, लेकिन इनका मूल्य देश के भागों की तुलना में बहुत अधिक है।
प्रिय खेलः इस राज्य का पारंपरिक खेल ‘तीर’ है जो आज हज़ारों लोगों की रोज़ीरोटी का साधन बना हुआ है और सरकारी आय का उत्तम स्रोत भी। वैसे इस राज्य के लोग फुटबॉल को भी बहुत पसंद करते हैं। 
धर्मः मेघालय की अधिकांश जनजातियां ईसाई धर्म को मानती हैं। हर रविवार को नियमित रूप से गिरिजाघर जाती हैं। किंतु कुछ परिवार ऐसे भी हैं जो गैर-ईसाई हैं और उन्हें ‘सेंग खासी’ कहा जाता है। मेघालय की राजभाषा अंग्रेज़ी है। जबकि यहां की जनजातियां अपनी-अपनी भाषाओं और बोलियों में बोलती हैं। व्यावसायिक केंद्रों पर हिंदी का प्रयोग होता है जबकि शिक्षित वर्ग अंग्रेज़ी का प्रयोग करता है।
उत्सव ः मेघालय में नववर्ष का उत्सव धूमधाम से मनाकर नए वर्ष का स्वागत किया जाता है। यहां की जनजातियों के लिए नववर्ष विशेष महत्व रखता है। लोग विभिन्न समूहों में ‘वन भोज’ का आयोजन करते हैं।
मेघालय दिवस ः यहां हर वर्ष २१ जनवरी का दिन ‘मेघालय डे’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न भागों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हर वर्ष मेघालय वासियों को तीन पुरस्कार (सम्मान) प्रदान किए जाते हैं। ये तीनों सम्मान क्रमशः सामाजिक कार्य, कला एवं साहित्यिक कार्य तथा खेल-कूद में विशेष योगदान के लिए प्रदान किए जाते हैं। शिलांग में खासी संप्रदाय के लोग ‘शुद सुक मिनसिएम‘ अप्रैल माह में मनाते हैं। यह उत्सव भाईचारा, शांति, प्रेम का द्योतक है।
नंक्रेम नृत्य ः खासी संप्रदाय के लोग मेघालय के ‘स्मीत’ नामक स्थान पर प्रत्येक वर्ष नवंबर माह में ‘नंक्रेम नृत्य’ आयोजन करते हैं। खासी जनजातियों का महत्वपूर्ण और प्रमुख उत्सव है ‘नंक्रेम डांस’। यह उत्सव पांच दिनों तक हर्ष व उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह स्थान शिलांग से १५ मिलोमीटर की दूरी पर है।
बेडिंगख्लाम ः जयंतिया संप्रदाय का प्रमुख उत्सव ‘बेडिंगख्लाम’ है जो जुलाई महीने में हर वर्ष बड़े ही धूमधाम से जोवाई में मनाया जाता है। यह उत्सव बुरी आत्माओं को दूर भगाने के लिए मनाया जाता है।
वान्गला ः गारो जनजातियों का प्रमुख उत्सव ‘वान्गला’ है। ‘वान्गला नृत्य’ हर वर्ष नवंबर महीने में मनाया जाता है। यह उत्सव एक सप्ताह तक चलता है।
प्रकृति का अनमोल रत्न मेघालय पूर्वोत्तर भारत का सबसे मनोरम प्रदेश है। इस राज्य की राजधानी शिलांग को अंग्रेज़ शासकों ने ‘मिनी लंदन’, ‘स्कॉटलैण्ड’, ‘पूर्व का स्विट्जरलैण्ड’ आदि नामों से विभूषित किया है। वास्तव में यह राज्य सैलानियों को अत्यंत आकर्षित करता है, क्योंकि इस प्रदेश में अनेक जलप्रपात, उद्यान, संग्रहालय, पहाड़, गुफाएं आदि हैं जिसे देख कर कोई भी सैलानी प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता। ईसाइयों के कई गिरिजाघर हैं जो अत्यंत सुंदर वास्तु कला का परिचय देते हैं। इसी तरह अन्य धार्मिक स्थलों की नक्काशी भी देखने लायक है। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि मेघालय राज्य प्रकृति का एक अनमोल रत्न है। 
 
मो.ः ०९४३६११७२६०

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