दुनिया की नजरों में भारत का महत्व

पिछले कुछ सालों से भारत अंतर्राष्ट्रीय रणनीति का केंद्र बना हुआ है, विश्व में सभी मुद्दों पर भारत की राय महत्व रखने लगी है। बलशाली देश अब भारत के पक्ष को तवज्जो देने लगे हैं और सभी भारत के साथ दोस्ती रखना चाहते हैं। भारत की ताकत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यूरोपीय देशों के नेता भारत दौरे पर आ रहे है। ब्रिटिश फॉरेन सेक्रेटरी, जर्मन नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, नीदरलैंड के फॉरेन मिनिस्टर, रूसी विदेश मंत्री और अमेरिका के एनएसए सहित कई और प्रमुख नेताओं ने भारत का दौरा किया जो यह साबित करता है कि भारत की पहचान अब विश्व में बड़े रूप में होने लगी है और अधिकतर देश भारत के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं जबकि पहले की सरकारों में ऐसा नहीं था।

भारत चीन के बीच चले विवाद के बाद चीन के विदेश मंत्री ने भी भारत का दौरा किया जहां विवाद को लेकर चर्चा हुई और इसे जल्द से जल्द खत्म करने को लेकर विचार किया गया। सीमा विवाद के समय चीन ने भारत को 1972 का नेहरू वाला भारत समझ रखा था लेकिन जिस तरह से उसे सीमा पर चुनौती मिली उसे भी समझ आ गया कि अगर युद्ध हुआ तो तबाही दोनों तरह होगी। चीन ने समझदारी दिखाई और पीछे हटने का फैसला किया। भारत के साथ साथ कई और देशों ने चीन को धमकी दी थी कि अगर भारत पर हमले हुए तो चीन को उसकी भारी कीमत चुकानी होगी।

रूस और यूक्रेन के बीच हुए युद्ध में सबकी नजर भारत पर थी जबकि युद्ध में भारत का कोई भी रोल नहीं था लेकिन भारत उस समय और चर्चा में आ गया जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भारत से मदद की गुहार की और रूस के राष्ट्रपति पुतिन से बात करने का आग्रह किया। अमेरिका, चीन जैसे देशों के होते हुए भी भारत का जिक्र होना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग ही चर्चा का विषय बना। इसी समय अमेरिका ने भारत को धमकाने की कोशिश की और अमेरिकी डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर ने कहा कि अगर भारत रूस के साथ रिश्ते बढ़ाता है तो उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जबकि रूस की तरफ से यह बयान जारी किया गया कि वह हमेशा भारत के साथ खड़ा है और उसकी सभी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करेगा। इतना ही नहीं कम दाम के तेल को भी भारत को देने की बात पर सहमति जता दी। भारत और रूस का बड़ा ही पुराना दोस्ताना रहा है जो भारत कभी खत्म नहीं करना चाहेगा। भारत अभी भी करीब 55 फीसदी हथियार रूस से ही खरीदता है इसलिए चीन के साथ जब तक दुश्मनी है रूस से रिश्ते नहीं बिगाड़े जा सकते हैं।

भारत की विदेश नीति एक सही दिशा की तरफ आगे बढ़ रही है इसमें कोई दो राय नहीं है। भारत किसी के साथ नहीं है और किसी का दुश्मन भी नहीं है। भारत ने यूक्रेन युद्ध को लेकर निंदा की और यूएन में साफ सुथरी जांच की मांग की, लेकिन रूस पर किसी भी तरह के प्रतिबंध से भी इंकार किया। भारत बैलेंस बनाकर आगे बढ़ रहा है जिससे किसी को दुख ना हो। भारत किसी से दुश्मनी भी नहीं लेना चाहता है क्योंकि इस समय भारत खुद को विकसित करने की राह पर आगे बढ़ रहा है ऐसे में कोई भी रिस्क लेना ठीक नहीं होगा। भारत के लिए पाकिस्तान और चीन दोनों ही एक नासूर घाव की तरह है उसके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है इसलिए रूस सहित तमाम पश्चिमी देशों से भारत ने संबंध नहीं खराब कर सकता है। भारत की बाकी देशों की दोस्ती से ही चीन डरा हुआ है वरना वह भारत पर हमला कर सकता था।

कुल मिलाकर भारत की स्थिति बिल्कुल ठीक है और ग्लोबल स्तर पर भारत सभी से डील करने में भी कामयाब हो रहा है। भारत की विदेश नीति बिल्कुल सही दिशा में जा रही है और भारत एक मजबूत स्तर पर खेल रहा है। विश्व से भारत को बहुत आशाएं हैं जबकि कुछ देश भी व्यापार के लिए भारत की तरफ देख रहे हैं जिसका फायदा भी पीएम मोदी नहीं छोड़ना चाहते हैं। भारत की तरफ से एक ऐसी मानसिकता बना दी गयी है कि भारत में व्यापार करना बाकी देशों की मजबूरी हैं जबकि हम उसके लिए मजबूर नहीं है जबकि देश की स्थिति यह है कि रोजगार को लेकर सरकार हर दिन चिंतित हैं। पीएम मोदी ने जब से देश की सत्ता संभाली है तब से बाहरी और आंतरिक सभी रणनीति सही दिशा में जा रही है अब यह भारत को किस स्तर पर ले जाएगी यह आने वाले भविष्य पर निर्भर करेगा।

 

आपकी प्रतिक्रिया...