विश्व हिन्दू परिषद ने मनाया पूज्य सिख गुरु तेगबहादुर जी का 400वां प्रकाशोत्सव

बैसाख शुक्ल सप्तमी, रविवार, विक्रम संवत २०७९,
08 मई 2022
विश्व हिन्दू परिषद, कानपुर प्रान्त द्वारा विहिप प्रान्तीय कार्यालय दुर्गा भवन, श्रीमुनि हिन्दू इण्टर कॉलेज गोविंद नगर में पूज्य गुरु तेगबहादुर जी एवं गुरु अंगददेव जी की जयंती के उपलक्ष्य में शबद कीर्तन का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का श्रीगणेश
श्रीराम जानकी दरबार का पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्वलन श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष श्री हरविंदर सिंह लार्ड जी, विहिप क्षेत्र संगठन मंत्री श्री गजेन्द्र जी, विहिप प्रान्त अध्यक्ष श्री राजीव महाना जी, विहिप प्रान्त मंत्री श्री वीरेन्द्र पाण्डेय जी, विहिप प्रान्त संगठन मन्त्री श्री मधुराम जी, सहमंत्री श्री राजीव पोरवाल जी, प्रान्त संयोजक अजीतराज जी द्वारा सम्पन्न हुआ।
सिख संगत द्वारा शबद कीर्तन में “‘मेरा मन लगा है राम पियारे’ एवं ‘जो बोले सो निहाल,सत श्री अकाल'” सुनकर उपस्थित सभी श्रोतागण भावविभोर हो गए।
विहिप क्षेत्र संगठन मन्त्री श्री गजेन्द्र जी ने अपने सम्बोधन में बताया कि, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेव जी आक्रमणकारी बाबर के भारत आने से पहले ही श्रीराम जन्मभूमि के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे थे। गुरु नानक देव जी 1510 से 1511 के बीच अयोध्या आए थे, जबकि बाबरी मस्जिद 1528 में बनाई गई थी। पूज्य गुरु नानकदेव जी ने तब आने वाले समय में हिन्दू मंदिरों पर होने वाले इस्लामिक आक्रमणों के बारे में पहले ही चेताया था।
हिन्द की चादर नवें सिख गुरु तेगबहादुर जी भी 1670 में अयोध्या जी पहुँचे, एवं हिन्दू संस्कृति एवं मंदिरों की इस्लामी आतताइयों से डटकर मुकाबला करने का संकल्प सभी हिन्दू-सिख भाइयों को दिलाया।
विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना के समय से ही यह उद्देश्य है, कि हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अंग, उनकी पूजा पद्धति कोई भी हो, लेकिन सभी को एक मंच लेकर सभी धर्म-धाराएं साथ चलें।
कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री हरविंदर सिंह लार्ड जी ने बताया कि, हर आपदा के समय सिख समाज सहयोग में सदैव आगे रहा है, मुस्लिम धर्मांतरण के विरोध में गुरु तेग बहादुर जी बलिदान हुए, गुरुद्वारा शीशगंज साहेब, रकाबगंज साहेब उदाहरण हैं।
श्री सुरजीत सिंह ओबेरॉय जी ने बताया, कि दुर्दांत औरंगजेब की इस्लामिक धर्मान्धता के चलते गुरु तेगबहादुरजी के साथ ही हिन्दू छिब्बर ब्राह्मण भाई सतीदास, भाई मतिदास एवं भाई दयाला जी भी बलिदान हुए। 1964 में विहिप की स्थापना के समय मास्टर तारा सिंह जी, नामधारी सिंह जी भी रहे। विहिप ने पंजाब में हजारों लोगों को मतांतरण के शिकार थे, उनकी घर वापसी करवाई है।
हिन्दू-सिख एक हैं एवं उनका साझा उद्देश्य मानवता है।
विहिप प्रान्त अध्यक्ष श्री राजीव महाना जी ने आये हुए सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में आये हुए सभी अतिथियों को रामनामी ओढ़ाकर एवं प्रभु श्रीरामजी का चित्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रान्त सहमंत्री पोरवाल जी ने किया।
ओमेन्द्र अवस्थी

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