वैदिक प्राचीन ऋषियों की कुछ वैज्ञानिक खोजें

1.प्लास्टिक सर्जरी-माथे की त्वचा द्वारा नाक की मरम्मत सुश्रुत
2.कृत्रिम अंग ऋग्वेद (1-116-15)
3.गुणसूत्र गुणाविधि – महाभारत
4.गुणसूत्रों की संख्या तेईस- महाभारत
5.कान की भौतिक रचना (Anatomy) ऋग्वेद
6 .गर्भावस्था के दूसरे महीने में भ्रूण के हृदय की शुरुआत- (ऐतरेय उपनिषद)
7.महिला अकेले से वंश वृद्धि प्रजनन (कुंती और माद्री :- पांडव महाभारत : टेस्ट ट्यूब बेबी)
8.केवल डिंब(ovum) से ही- महाभारत
9.केवल शुक्राणु से ही ऋग्वेद और महाभारत
10.डिंब व शुक्राणु दोनों से – महाभारत
11.भ्रूणविज्ञान ऐतरेय उपनिषद
12 विट्रो में भ्रूण का विकास – महाभारत
13 पेड़ों और पौधों में जीवन- महाभारत
14 मस्तिष्क के कार्य- ऐतरेय उपनिषद
15 जानवर की क्लोनिंग (कृत्रिम उत्पत्ति ) – ऋग्वेद
16 मनुष्य की क्लोनिंग मृत राजा वीणा से- पृथु
17..श्याम विविर (Black Holes) (मांडूक्य उपनिषद)
18..सूरज की किरणों में सात रंग – ऋग्वेद (8-72-16)
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ध्वनि विज्ञान- वेद ज्ञान को आधार मान कर न्यूलैंड के एक वैज्ञानिक स्टेन क्रो ने एक डिवाइस विकसित कर लिया। ध्वनि पर आधारित इस डिवाइस से मोबाइल की बैटरी चार्ज हो जाती है। इस बिजली की आवश्यकता नहीं होती है। भारत के वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक ओमप्रकाश पांडे के मुताबिक इस डिवाइस का नाम भी ‘ओम’ डिवाइस रखा गया है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को अपौरुष भाषा इसलिए कहा जाता है कि इसकी रचना ब्रह्मांड की ध्वनियों से हुई है। उन्होंने बताया कि गति सर्वत्र है। चाहे वस्तु स्थिर हो या गतिमान। गति होगी तो ध्वनि निकलेगी। ध्वनि होगी तो शब्द निकलेगा। सौर परिवार के प्रमुख सूर्य के एक ओर से नौ रश्मियां निकलती हैं और ये चारों और से अलग-अलग निकलती है। इस तरह कुल 36 रश्मियां हो गई। इन 36 रश्मियों के ध्वनियों पर संस्कृत के 36 स्वर बने। इस तरह सूर्य की जब नौ रश्मियां पृथ्वी पर आती है तो उनका पृथ्वी के आठ बसुओं से टक्कर होती है। सूर्य की नौ रश्मियां और पृथ्वी के आठ बसुओं की आपस में टकराने से जो 72 प्रकार की ध्वनियां उत्पन्न हुई वे संस्कृत के 72 व्यंजन बन गई। इस प्रकार ब्रह्मांड में निकलने वाली कुल 108 ध्वनियां पर संस्कृत की वर्णमाला आधारित है। उन्होंने बताया कि ब्रह्मांड की ध्वनियों के रहस्य के बारे में वेदों से ही जानकारी मिलती है। इन ध्वनियों को नासा ने भी माना है। इसलिए यह बात साबित होती है कि वैदिक काल में ब्रह्मांड में होने वाली ध्वनियों का ज्ञान ऋषियों को था।

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