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***सरोजा मैती****

            पूर्वांचल उत्तर मध्य भारत काएक भौगोलिक क्षेत्र है जो उत्तर प्रदेश             के पूर्वी छोर पर स्थित है। यह क्षेत्र उत्तर में नेपाल, पूर्व में बिहार, दक्षिण में मध्यप्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र और पश्चिम में उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र द्वारा घिरा है।  पूर्वांचल को प्रमुख रुप से तीन भागों में विभाजित किया गया हैं। वे हैं १) पश्चिम में पूर्वी अवधी क्षेत्र, २) पूर्व में पश्चिमी – भोजपुरी क्षेत्र, ३) उत्तर में नेपाल क्षेत्र। उत्तर प्रदेश के आसपास के जिलों की तुलना में यह क्षेत्र मिट्टी की समृद्ध गुणवत्ता और केंचुआ घनत्व के कारण कृषि के लिए बहुत अनुकूल प्रदेश माना जाता है।

  भाषा :

            इस क्षेत्र में भोजपुरी प्रमुख भाषा या बोली है। हालांकि हिंदी और भोजपुरी के अलावा अवधी तथा बघेलखंडी पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रो में बोली जाती है।

 विकास योजना:

            १९९१ में उत्तर प्रदेश की सरकार ने पूर्वांचल विकास निधि की स्थापना की जिसका उद्देश्य था, क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं के लिए पैसा जमा करना और अग्रिम संतुलित विकास करना, स्थानीय जरूरतों को पूरा करना तथा क्षेत्रीय असमानताओं निवारण करना। लेकिन भ्रष्ट वितरण माध्यम के कारण परिस्थितियां अभी भी वहीं हैं। लेकिन पूर्वांचल सांस्कृतिक रूप से समृध्द क्षेत्र है। पूर्वांचल को हमेशा उत्तर प्रदेश सरकार तथा पूर्व केंद्रीय सरकारों द्वारा नजरअंदाज किया गया है।

   ऐतिहासिक और धर्मिक परिप्रेक्ष्य

            मंगल पांडे इस क्षेत्र के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में एक हैं। वे पूर्वांचल के सच्चे पुत्र थे। पूर्वांचल शूरवीरों की भूमि के रूप में जाना जाता है। बौध्द जैन सम्प्रदाय की उत्पत्ति भी पूर्वांचल में ही हुई है।

 संत रविदास नगर भदोही और मिर्जापुर

            एशिया में कालीन निर्माण में प्रमुख ये नगर खिलाड़ी रहे हैं। जिला वाराणसी भारतीय पर्यटन और विशेष रूप सें साड़ी के निर्माण केंद्र हैं। पूर्वांचल का एक जिला सोनभद्र बिजली का उत्पादन करता है, जो उत्तर प्रदेश के राज्य में कुल बिजली उत्पादन के लगभग आधा है। भारत कीसबसे बड़ी चूना पत्थर की खदान है।    

            प्राकृतिक संसाधनों के लिए मिर्जापुर और सोनभद्र बहुत प्रसिद्ध हैं। वाराणासी शहर गंगा नदी के बायीं ओर वक्राकार पर स्थित है। वाराणसी शहरी क्षेत्र सात शहरी उप इकाइयों का समूह है और ये ११,०२६ वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। उत्तरी भारत के गांगेय मैदान में बसे इस क्षेत्र की भूमि पुराने समय में गंगा नदी में आती रही। इस क्षेत्र में विभिन्न कुटीर उद्योेग कार्यरत हैं-जिनमें बनारसी रेशमी साड़ी कपड़ा उद्योग, कालीन उद्योग एवं हस्तशिल्प प्रमुख हैं।

            बनारसी पान विश्वप्रसिध्द है और यहां का कलाकंद भी मशहूर है। इस क्षेत्र में बाल श्रमिकों की संख्या अत्यधिक है। बनारसी रेशम विश्व भर में अपनी महीनता एवं मुलायमता के लिए प्रसिध्द है। बनारसी रेशमी साडियों पर बारीक डिजाइन और जरी का काम चार चांद लगाते हैं और साड़ी की आभा बढाते हैं।

 

 मिर्जापुर

            इस क्षेत्र में तारकेश्वर महादेव महात्रिकोण शिवपुर सीता कुंड चुनार का किला दर्शनीय स्थल हैं।

 गाजीपुर

            गाजीपुर उत्तर प्रदेश प्रांत का एक शहर है। इसकी स्थापना तुगलक वंश के सैय्यद मसूद गाजी द्वारा की गई थी। इसके प्राचीन नाम गाधीपुर था, जो कि लगभग सन १३३० में एक मुस्लिम शासक गाजी मलिक के सम्मान में गाजीपुर कर दिया गया। गाजीपुर अंग्रेजों द्वारा १८२० में स्थापित विश्व के सबसे बड़े अफीम के कारखाने के लिए प्रख्यात है। यहां हथकरघा तथा इत्र उद्योग भी हैं। यहां की स्थानीय भाषा भोजपुरी है। यह  पवित्र शहर बनारस के ७० किमी पूर्व में स्थित है। जामा मस्जिद, रामलीला मैदान, धमुपुर दर्शनीय स्थल हैं। गोरखपुर यह राज्य के पूर्वी भाग में एक जिला है। यह एक धार्मिक केंद्र के रूप में मशहूर है। यह शहर हिंदू, बौद्ध, मुस्लिम, जैन और सिख संतों का घर बन गया था। मध्ययुगीन संत गोरक्षनाथ के नाम पर इस शहर का नाम पड़ा है। महान संत परमहंस योगानंद जी का जन्म स्थान है।

 

 सड़क, रेल और हवाई अड्डे

            पूर्वाचल पर्यटन के लिए सड़क, रेल और हवाई जहाज की सुविधाएं हैं। सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग २७,१९, २८, ५६, ९७१ स्वर्णिम चतुर्भुज। पूर्वांचल के सभी जिले रेलवे से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं। हवाई जहाज के लिए वाराणासी एयरपोर्ट, गोरखपुर एयरपोर्ट, मीरपुर एयरपोर्ट आदि हैं।

 

 विशेषताएं

            पूर्वांचल में कई ऐसे स्थान हैं जिन्हें संवारा-सजाया जाए तो वह सभी के लिए लाभकारी साबित हो सकता है और बेरोजगारों

 को रोजगार के सुनहरे अवसर प्राप्त हो सकते हैं। इस शहर में भी कई ऐतिहासिक बौध्द विहार हैं। इमामबाडा १८वीं सदी की दरगाह है। गीता प्रेस हिंदू धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशक हैै।

 

 कुशीनगर

            कुशीनगर, कस्बा, महात्मा बुध्द का निर्वाण स्थल है। यहां अनेक सुंदर बौध्द मंदिर हैैं। इस कारण से इसे एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भी माना जाता है। यहां विश्व भर के बौध्द तीर्थ यात्री भ्रमण के लिए आते हैं। देवरिया, आजमगढ़, मऊ, चंदोली महाराजगंज,वस्ती, संत कबीरनगर आदि प्रमुख स्थान देखनेलायक हैं।

            पूर्वांचल के प्रमुख विश्वविद्यालयों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय प्रमुख है। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वारणासी आदि हैं। पूर्वांचल के जनपद चंदौली के नौगढ़ को दूसरे कश्मीर का खिताब हासिल हुआ है। इसके अलावा जनपद सोनभद्र और मिर्जापुर के पिकनिक स्पॉट भी देशी विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। विंध्य पर्वत की कैमूर से शुरू श्रृंखलाबध्द पहाड़ियों पर आसमान से टकराती पहाड़ियां चारों ओर हरियाली, कल-कल कर बहते झरने, पंछियों की मधुर गीत-कुंजन, झील झरने पेड़-पौधों की इठलाती अदाएं ये सबकुछ नौगढ़ की पहचान है। यह मन मोहित करनेवाला रमणीय स्थल है, दूसरे कश्मीर का खिताब हासिल किया है। राजा-महाराजा द्वारा स्थापित किलों का महल, काशी नरेश की राजधानी, देवक नंदन खत्री के उपन्यास पर आधारित चंद्रकांता की कहानी राजगढ़ विजयगढ़ में रानी चंद्रकांता, विश्राम गृह एंव अनेक डाक बंगले तथा जल प्रपात, नौगढ़ की खास विशेषताएं हैं।

  मो.८८७९४१६१५०

 

 

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