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महाराष्ट्र एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (महाराष्ट्र ऊर्जा विकास एजेंसी-एमईडीए) सोसायटी पंजीयन कानून १८६० के अंतर्गत पंजीबद्ध है तथा इसका प्रत्यक्ष कार्य जुलाई १९८६ में आरभ हुआ। एजेंसी का उद्देश्य महाराष्ट्र राज्य में नवीनीकरण ऊर्जा का विकास करना और ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना है। एमईडीए सरकारी संस्था है। राज्य के गैर-परम्परागत ऊर्जा मंत्री पदेन अध्यक्ष और राज्य मंत्री उपाध्यक्ष हैं। राज्य सरकार के छह विभागों के सचिव/प्रधान सचिव सदस्य हैं। एमईडीए के महानिदेशक इसके सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करते हैं।
ऊर्जा के बिना आज जीवन असंभव है। फिलहाल कुल ऊर्जा के ७०% का आधार जीवाश्म ईंधन (कोयला, खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस) है। शेष ३०% ऊर्जा जल विद्युत परियोजनाओं से प्राप्त होती है। परम्परागत स्रोतों से जब बिजली का निर्माण होता है तब ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है जैसे कि कार्बन मोनोक्साइड, कार्बन डायआक्साइड एवं सल्फर डायआक्साइड। इन गैसों के वातावरण में उत्सर्जन से वैश्विक गर्मी निर्माण होती है। इस गरमाहट से वैश्विक तापमान में वृद्धि होती है, जिससे मानव जीवन के समक्ष खतरा पैदा हो गया है। जीवाश्म ईंधन के भंडार कम हैं और उसके उपयोग के दुष्परिणाम भी बहुत हैं, अतः प्रदूषण मुक्त एवं पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा का उत्पादन समय की मांग है।
केंद्र सरकार की नीति के अनुकूल महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में १०% नवीनीकरण ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। गैर-परम्परागत स्रोतों में पवन ऊर्जा एक महत्वपूर्ण स्रोत है और उसका बिजली उत्पादन के लिए राज्य में पहले से ही उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा बायोमास, गन्ने के छिलके, लघु पनबिजली, शहरी एवं औद्योगिक कचरा, सौर ऊर्जा नवीनीकरण ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं। निम्न तालिका से इसे स्पष्ट किया गया है-
नवीनीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में एमईडीए
महाराष्ट्र में नवीनीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता ३१ मार्च २०१५ तक ६७०५.१५ मेगावाट की है, जिसमें लघु पनबिजली शामिल है।
अ.क्र. स्रोत देश में क्षमता राज्य में क्षमता प्राप्त
(मेगावाट) (मेगावाट) (मेगावाट)
१. पवन ४९१३० ९४०० ४४४१.७१
२. गन्ना छिलका ५००० २२०० १४१४.७५
३. बायोमास १६८८१ ७८१ २००.००
४. लघु जल बिजली १५००० ७३२ २८४.३०
५. शहरी कचरा १७०० २८७ ३.००
६. औद्योगिक कचरा १७०० ३५० ३२.१४
७. सौर फोटोवाल्टैइक एवं २० से ३० वर्ग किमी ४९ वर्ग मीटर ३२९.२५
ताप बिजली ३५ वर्ग मीटर
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कुल ८९४११ १३७५० ६७०५.१५
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पवन ऊर्जा परियोजनाएं
१९९३-९४ में पवन ऊर्जा कार्यक्रम आरंभ हुआ और केंद्र की बाजार अनुकूल नीति के कारण पवन ऊर्जा का प्रभावी व्यापारीकरण हो पाया। विश्व में कुल स्थापित क्षमता ३,६९,५५३ मेगावाट है, जिसमें से अकेले भारत में २२४६५ मेगावाट की स्थापित क्षमता कायम हो चुकी है। इससे चीन (१,१४,७६३ मेगावाट), अमेरिका (६५,८७९ मेगावाट), जर्मनी (३९,१६५ मेगावाट) तथा स्पेन (२२,९८७ मेगावाट) के बाद भारत विश्व का पांचवें नम्बर का देश बन गया है।
देश में पवन ऊर्जा की क्षमता ४९,१३० मेगावाट आकी गई है। इनमें से महाराष्ट्र में आज ९४०० मेगावाट पवन ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। एमईडीए ने एमएनआरई एवं राज्य सरकार के सहयोग से ११.०९ मेगावाट की प्रात्यक्षिक परियोजनाएं स्थापित की हैं।
गन्ना छिलकों से ऊर्जा
गन्ने का उप-उत्पाद उसका छिलका है, जिसका बायलरों में भांप निर्माण के लिए ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। छिलकों की खपत बायलरों की भांप की दबाव क्षमता पर निर्भर है। कई चीनी
कारखानों में किए गए अध्ययन के अनुसार उच्च दबाव वाले बायलरों के उपयोग से बिजली का सह-उत्पादन लाभकारी है। देश में इस स्रोत से ५००० मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। महाराष्ट्र में १२५० मेगावाट बिजली उत्पादन की अतिरिक्त क्षमता है। ३१ मार्च २०१५ तक निजी चीनी मिलों में कुल ५९१.५५ मेगावाट तथा सहकारिता चीनी मिलों में ८२३.२० मेगावाट के को-जनरेशन संयंत्र स्थापित हो चुके थे। इस तरह कुल स्थापित क्षमता १४१४.७५ मेगावाट की है।
बायोमास बिजली परियोजनाएं
बायोमास बिजली परियोजनाओं के टिकाऊपन को सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरण की दृष्टि से लाभप्रद माना गया है। इस स्रोत से बिजली प्राप्त करने की देश की क्षमता १६००० मेगावाट की है, जबकि महाराष्ट्र की यह क्षमता ७८१ मेगावाट है। ३१ मार्च तक ऐसी २०० मेगावाट की १८ परियोजनाएं आरंभ की गई हैं। राज्य की ३९ तहसीलों में इस तरह की परियोजनाएं आरंभ करने के लिए एमईडीए ने प्रस्ताव-पत्र जारी किए हैं।
लघु जल बिजली परियोजनाएं
दूरदराज के इलाकों में मौसमी एवं लगातार प्राप्त जल प्रवाह बिजली पैदा करने का अच्छा स्रोत है। इसके लिए प्रोद्यौगिकी भी उपलब्ध है। नेपाल का अनुभव बताता है कि ऐसी छोटी जल बिजली परियोजनाएं स्थानीय स्तर पर अच्छे ढंग से चलाई जा सकती हैं। देश में ऐसे स्रोत से बिजली प्राप्त करने की क्षमता १०३२४.३७ मेगावाट है। इनमें से महाराष्ट्र में ७३२.६३ (२५५ स्थान) मेगावाट की क्षमता है। राज्य के जल स्रोत विभाग ने ३१ मार्च १५ तक ऐसी २८४.३० मेगावाट की क्षमता कायम की है। एमईडीए ने नदी के जलप्रवाह, प्रपातों एवं कोल्हापुर किस्म बांधों से ५ मेगावाट की क्षमता की बिजली परियोजनाओं के लिए अनुमति दी है।
शहरी एवं औद्योगिक कचरे से बिजली
हाल के प्रोद्यौगिकी विकास के कारण शहरी एवं औद्योगिक कचरे से बिजली उत्पादन करना आसान हुआ है। इस स्रोत से देश में बिजली उत्पादन की क्षमता १७०० मेगावाट की है। ग्यारहवीं योजना के अंत तक यह क्षमता २५०० मेगावाट तक बढ़ाई जा सकती है। महाराष्ट्र में औद्योगिक कचरे से ३५० मेगावाट तथा शहरों के ठोस कचरे से २५० मेगावाट एवं तरल कचरे से ३७ मेगावाट के बिजली उत्पादन की क्षमता है। ३१ मार्च १५ तक औद्योगिक कचरे से ३२.१४ मेगावाट बिजली उत्पादन के संयंत्र लगाए जा चुके हैं। एमईडीए ने नांदेड एवं पिंपरी-चिंचवड नगर पालिकाओं का इस मामले में अध्ययन किया है और राज्य में ३१ मार्च १५ तक ३.०० मेगावाट की ऐसी परियोजनाएं लगाई जा चुकी हैं।
सौर ताप एवं सौर फोटोवोल्टैक बिजली उत्पादन
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सन २०२२ तक २०,००० मेगावाट के बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस सम्बंध में २३ नवम्बर २००९ को जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन की स्थापना की जा चुकी है। ३१ मार्च १५ तक ५५ सौर फोटोवोल्टैक परियोजनाओं के जरिए ३२९.२५ मेगावाट के उत्पादन की क्षमता कायम की जा चुकी है।
बिजली संरक्षण कार्यक्रम
देश के आर्थिक विकास की गति को ध्यान में रखते हुए वर्तमान क्षमता १,७४,३६१ मेगावाट से बढ़ाकर २,१५,८०० मेगावाट करनी होगी। परम्परागत ऊर्जा स्रोत सीमित होने से बिजली उत्पादन की लागत बढ़ी है। अनुमान है कि तेल एवं प्राकृतिक गैस के भंडार केवल १८ से २६ वर्ष तक ही चलेंगे।
महाराष्ट्र बिजली उत्पादन के क्षेत्र में पहले नम्बर पर है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से बिजली की कमी महसूस की जा रही है। देश में सर्वाधिक बिजली उत्पादन करने वाले महाराष्ट्र में उत्पादन एवं मांग के बीच ५००० मेगावाट की खाई है। बिजली संरक्षण के उपाय कर बिजली की बचत की जा सकती है और आपूर्ति एवं मांग में अंतर को कम किया जा सकता है।
एमईडीए ने अपनी स्थापना से ही विभिन्न क्षेत्रों में बिजली की बचत के कार्यक्रम चलाए हैं। ३१ मार्च १५ तक विभिन्न ७९८ उद्योगों में बिजली बचत का सर्वेक्षण किया गया, जिससे बिजली की खपत में कमी आई।
पवन-सौर संकरित प्रणाली
पवन-सौर संकरित प्रणाली के अंतर्गत पवन चक्कियों एवं एसपीवी पैनलों के जरिए बिजली का उत्पादन होता है। जब सूर्य का प्रकाश कम होता है तब अच्छी हवाएं चलती हैं और जब हवाएं नहीं होतीं तब धूप होती है। इस तरह बारहों मास संकरित प्रणाली से बिजली उत्पादन हो सकता है। ३१ मार्च १५ तक महाराष्ट्र में इस स्रोत से २०७४ मेगावाट (२७६ संख्या) की स्थापित क्षमता थी। १८६ किलोवाट के ९ स्थानों के प्रस्ताव एमएनआरई ने मंजूर किए हैं और उन पर कार्य चल रहा है।
एमईडीए की नई परियोजनाएं एवं कार्यक्रम
पवन स्रोत आकलन कार्यक्रम
चेन्नई स्थित राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (एनआईडब्लूई) के सहयोग से एमईडीए ने पवन स्रोत के आकलन का कार्यक्रम चलाया है। ४०६ स्थानों में से ५० स्थान उपयुक्त पाए गए।
सौर प्रकाश स्रोत आकलन केंद्र
सौर ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए एमएनआरई ने सौर प्रकाश आकलन केंद्रों का संजाल स्थापित करने का निर्णय किया है। केंद्र सरकार ने ऐसे ९ केंद्र स्थापित किए हैं। एमईडीए ने भी राज्य सरकार के सहयोग से ऐसे ६ केंद्रों की स्थापना की है।
अध्ययन के लिए सौर ऊर्जा प्रकाश
बिजली की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में ६ से ८ घंटे बिजली नहीं होती। इससे छात्रों की पढ़ाई में दिक्कत आती है। इसे दूर करने के लिए सरकार ने ‘सोलर होम लाइट इन कॉमन स्टडी रूम’ की अनोखी योजना शुरू की है। इसके अंतर्गत स्कूलों, ग्राम पंचायतों, मंदिरों आदि के सामान्य कक्ष में सौर बिजली मुहैया कराई जाती है। २४,६०० जगहों में यह योजना चलाई जाएगी। २०१४-१५ तक १८,६०३ गांवों में यह योजना आरंभ की जा चुकी थी।
दूरदराज के इलाकों में बिजली
३०० जनसंख्या के दूरदराज वाले छोटे गांवों, वाडों एवं बस्तियों में बिजली पहुंचाने की योजना है। इसके अंतर्गत राज्य बजट में इसका प्रावधान किया गया है। २०१४-१५ तक ऐसे २०३ गांवों एवं २३८ बस्तियों में बिजली पहुंचाई जा सकी है।
सरकारी/ अर्ध-सरकारी कार्यालयों में सौर बिजली
सरकारी एवं अर्ध-सरकारी कार्यालयों में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की योजना है। इस योजना के अंतर्गत २० किलोवाट के सौर बिजली संयंत्र लगाए जाएंगे। २०१४-१५ तक १३ भवनों पर ऐसे संयंत्र लगाए जा चुके हैं।

ब्रिक्वेटिंग परियोजना
ब्रिक्वेटिंग ऐसी प्रोद्यौगिकी है जिसके तहत कृषि अवशिष्ट, वन अवशिष्ट को ठोस लट्ठों में परिवर्तित किया जाता है। इससे किसानों को कृषि कचरे से आय भी होगी। वर्ष २००७-८ में राज्य सरकार ने इसकी मशीनों के लिए सब्सिडी की घोषणा की है। वर्ष २०१४-१५ में एमईडीए ने ऐसी १०३ परियोजनाओं के लिए सब्सिडी जारी की है।
बिजली संरक्षण कार्यक्रम
एमईडीए ने अपनी स्थापना से ही विभिन्न क्षेत्रों में बिजली संरक्षण कार्यक्रमों को लागू किया है। ‘बिजली संरक्षण कार्यक्रम’ के अंतर्गत एमईडीए ने २०१४-१५ में ७९८ उद्योगों का निरीक्षण किया, जिससे १०४ करोड़ रु. की बिजली बचाई जा सकी। बिजली संरक्षण के अंतर्गत बिजली संरक्षण कार्यक्रम, बिजली अंकेक्षण कार्यक्रम, राज्य बिजली संरक्षण पुरस्कार एवं जनजागरण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
बिजली बचत वाले स्ट्रीट लाइट
गांवों में सड़कों के लिए जीएसएल बल्बों का इस्तेमाल किया जाता है। इन बल्बों की बिजली बचत क्षमता कम है। इसे ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत इलाकों के लिए बिजली की बचत करने वाले स्ट्रीट लाइट मुहैया किए जा रहे हैं। वर्ष २०१४-१५ में ऐसे १,२८,२३० बल्ब लगाए जा चुके हैं।
शासकीय/अर्ध-शासकीय भवनों पर प्रात्यक्षिक संयंत्र
शासकीय/ अर्ध-शासकीय एवं स्थानीय निकायों के भवनों पर बिजली की बचत वाले संयंत्र लगाने की योजना है। इस योजना के अंतर्गत प्रति भवन २५ लाख रु. की सहायता दी जाती है। वर्ष २०१४-१५ में ऐसे ४० भवनों को शामिल किया गया है।
बिजली बचत उपकरणों की स्थापना
नगर परिषदें एवं अन्य निकाय राज्य की कुल बिजली खपत में से १.५ से २% की बिजली स्ट्रीट लाइटों पर खर्च करते हैं, जबकि पानी उलीचने की प्रणाली पर कुल बिजली खपत के ४% बिजली खर्च होती है। स्ट्रीट लाइटों एवं पानी पम्पों के लिए बिजली बचत उपकरण लगाए जाने से ३०% बिजली की बचत हो सकती है। इस योजना के अंतर्गत २५ लाख रु. की सहायता दी जाती है। वर्ष २०१४-१५ में कुल ३३ नगर परिषदों/महानगरपालिकाओं को ऐसी सहायता प्रदान की गई।
आश्रम शालाओं आदि में सौर ऊर्जा
आदिवासी इलाकों में सरकारी आश्रम शालाएं हैं। रात में बिजली बंद रहने के समय बच्चे पढ़ नहीं पाते। अतः एमईडीए ने होम लाइट्स, स्ट्रीट लाइट्स, वाटर हीटिंग सिस्टम एवं पावर पैक की योजना जारी की है। वर्ष २०१४-१५ में ऐसी १० आश्रम शालाओं में यह सुविधा उपलब्ध की गई।
आश्रम शालाओं एवं छात्रावासों में संकरित ऊर्जा प्रणाली
इसी तरह एमईडीए ने आश्रम शालाओं एवं छात्रावासों में पवन-सौर संकरित बिजली संयत्र स्थापित किए हैं। इस योजना के अंतर्गत वर्ष २०१४-१५ में २० आश्रम शालाओं में यह सुविधा मुहैया कराई गई है।
जनजागरण एवं जनशिक्षा
जनता के बीच नवीनीकरण ऊर्जा की जानकारी प्रसारित एवं संवर्धित करने के लिए एमईडीए ने विभिन्न कार्यक्रम बनाए हैं। एमईडीए विभिन्न माध्यमों, संगोष्ठियों एवं प्रदर्शनियों के माध्यम से यह कार्य करती है।

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