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लीना पावरटेक के सीएमडी अमित टेकचंदानी का कहना है कि विभिन्न ऊर्जावान व्यक्तियों से जुड़े हुए हैं। इन्हीं लोगों के कारण उन्होंने अपने व्यवसाय और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देने की दिशा में कदम बढ़ाये हैं। लीना पावरटेक और अमित से जुड़े ऐसे ही तीन उर्जावान लोगों ने हिंदी विवेक के साथ अपने अनुभव साझा किए।
४५ सालों से ‘टेस्ला ट्रांसफार्मर’ ट्रांसफार्मर बनाने का कार्य कर रही है। पूरे देश में उनके पावर एंड डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफार्मर सप्लाई किए जाते हैं। अमित टेकचंदानी के साथ टेस्ला पिछले ७-८ सालों से काम कर रही है। नवी मुंबई का सिडको प्रोजेक्ट, महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के प्रोजेक्ट, केरला इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के प्रोजेक्ट, बिहार प्रोजेक्ट इत्यादि जैसे विभिन्न प्रोजेक्ट पर टेस्ला ने अमित टेकचंदानी के साथ काम किया है। कंपनी के जयदीप जैन बताते हैं कि अमित टेकचंदानी की कम्पनी मध्यम स्तर की एक ऐसी कम्पनी है जो अपने व्यावसायिक मूल्यों के प्रति बेहद सचेत है। उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होता। अमित तथा उनकी कंपनी अत्यंत पारदर्शिता से काम करती है। मेरे हिसाब से ये वे गुण हैं जो दो कम्पनियों को पार्टनरशिप में काम करने के लिए आवश्यक होते हैं।
जयदीप जैन साथ ही अमित टेकचंदानी के इस क्षेत्र में कदम रखने की भी सराहना करते हैं। उनका कहना है कि आज का युवा वर्ग जहां आईटी क्षेत्र में अपना करियर बनाकर विदेशी कम्पनियों में नौकरी करने के सपने देखता है वहां अमित जैसा युवा उद्योगपति विद्युत क्षेत्र में कदम रखता है। अमित की यह सोच कि उन्हें अपने व्यवसाय के साथ ही देश के विकास में भी अपना योगदान देना है, सचमुच सराहनीय है। अमित जैसे क्वालिफाइड लोगों की इस क्षेत्र में अत्यधिक आवश्यकता है। जिससे इस क्षेत्र का विकास हो सके। इस क्षेत्र के कामों की क्वालिटी में सुधार आ सके तथा सरकार द्वारा दिए गए समय में काम पूरे किए जा सके। आज भी देश के कई ऐसे हिस्से हैं जहां बिजली नहीं पहुंची है। ऐसे में अमित जैसे लोगों का इस क्षेत्र में आना सचमुच प्रशंसनीय है।

देश के विभिन्न भागों में बिजली न पहुंचने की समस्या के बारे में जयदीप जैन कहते हैं कि इस समस्या के कई कारण हैं। सबसे मुख्य कारण है कि बिजली का वितरण करने वाली अधिकतम कम्पनियां राजनैतिक प्रभाव में काम करती हैं। उन्हें उनकी लागत की तुलना में बहुत कम दाम मिलते हैं। कृषि को कम कीमत पर दी जाने वाली बिजली इसका मुख्य उदाहरण है। वितरण कम्पनियों को कम दाम मिलते हैं तो वे अधिक निवेश नहीं कर पातीं। और जहां तक इन्हें पहुंचना चाहिए वहां तक नहीं पहुंच पातीं। दूसरी बात यह है कि इस क्षेत्र में ऐसे कांट्रेक्टर्स की भी जरूरत है जो समय पर अपना काम पूरा कर सकें जिससे प्रोजेक्ट से रेवेन्यू मिलना शुरू हो।
बिजली के निर्माण और वितरण के बारे में जैन कहते हैं कि ये दोनों ही अलग-अलग हैं। बिजली कम बन रही है यह बात सच है लेकिन जो बन रही है वह भी ठीक तरह से वितरित नहीं की जा रही है। भारत की आबादी जिस रफ्तार से बढ़ रही है बिजली उस रफ्तार से बनना सम्भव नहीं है। परंतु वितरण को नियंत्रित कर इस समस्या को सुलझाया जा सकता है। दूसरा उपाय यह है कि बिजली का उपयोग करने वाला हर उपभोक्ता यह सोचे कि बिजली कैसे बचाई जाए। क्योंकि बिजली को बचाना भी एक तरह से उसका निर्माण करना ही है।
केंद्र सरकार तथा ऊर्जा मंत्रालय के कामों को लेकर जैन आशान्वित हैं। वे कहते हैं कि सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है। अगर इस दिशा में प्रयत्न किए गए तो निश्चित रूप से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने २०२० तक भारत के हर घर तक बिजली पहुंचाने का जो सपना देखा है वह अवश्य पूरा होगा।
ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल द्वारा वितरण बोर्ड को री-फायनान्स करने का जो निर्णय लिया गया है उसे जयदीप जैन बहुत बड़ा कदम मानते हैं। वे बताते हैं कि लगभग सभी वितरण बोर्ड दीवालिया होने की कगार पर थे। दूसरा कदम कोयले की समस्या को दूर करना है। इन दोनों के कारण ऊर्जा के क्षेत्र में कई बदलाव हो सकते हैं।

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