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****विवेक काबरा***
एक भूखे व्यक्ति को मछली खिलाओगे तो वह हमेशा भीख ही मांगता रहेगा। उसे मछली मारना सिखाओगे तो वह दूसरे सैकड़ों लोगों को खिलाने लगेगा। परंतु उसकी मछली मारने की कला को जगाने के लिए यदि तुम प्रेरित कर सको तो वह भूख से परे विकसित होने वाली सभ्यता का नेतृत्व करेगा।’
ऐतिहासिक रूप से यदि हम उन सभी महान विचारों का अध्ययन करें जिन्होंने हमारी सभ्यता की धारा में क्रांतिकारी परिवर्तन कर दिए तो हम पाएंगे कि विचार के पीछे एक ऐसा व्यक्ति जो है जो
• एक निश्चित अनुभव के चलते परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित हुआ है।
• परिवर्तन संभव था, इस बात की कल्पना कर सका।
• प्रत्याशित परिवर्तन की अनुभूति होने तक असफलताओं के बावजूद डटा रहा।
प्रेरणाएं हमेशा अनुभव की अनुगामी होती हैं
ध्यान दें कि नया करने की प्रेरणा कभी आरामदेह, सुखदायी, सब अच्छा-अच्छा जैसी स्थितियों में नहीं आती। यह अन्वेषक को निश्चित रूप से एक बुरे, कुछ असहज, चुनौतीपूर्ण या दर्दनाक अनुभव के माध्यम से गुजरना जरूरी कर देती है, जो प्रचलन को तोड़ने की इच्छा को सक्रिय करने और चीजें करने का एक नया रास्ता खोजने के लिए काफी मजबूत है। इसलिए यदि अधिक नवाचार वांछित हैं, तो अधिक अनुभव बटोरना महत्वपूर्ण है। और यदि समाज की सबसे अहम वर्तमान समस्याओं के साथ अनुभवों को एकाकार किया जाए, तो उन समस्याओं के समाधान के लिए नवाचारों का अतिप्रवाह होकर रहेगा।
प्रेरणा कैसे कल्पना में तब्दील हो जाती है और फिर अंत में हकीकत में, यह प्राय: नियंत्रित होती है इस बात से कि उक्त प्रेरणा का उत्साह समय, धन और कौशल जैसे अन्य पहलुओं के सापेक्ष कितना मजबूत है। और यह स्वाभाविक है कि जितनी जल्दी आप अनुभव प्राप्त करेंगे, उतना ही मजबूत प्रेरित विचार का अहसास करने का उत्साह होगा।
इस प्रकार नई पीढ़ी को विभिन्न अनुभवों से गुजारने की आवश्यकता है, जो किताबी सूचनाओं की बौछारों से अलग उनमें नवाचार का उत्साह जगाते हो। फोकस व्याख्यानों से क्रियाकलापों की ओर मुड़ने और एक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर होना चाहिए जो मौजूदा चुनौतियों के लिए नए विचारों के साथ आने के लिए बच्चों को सशक्त बनाए। पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सुरक्षा है।
२१ वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण चीज ऊर्जा है। विकास, समृद्धि और एक भरे-पूरे जीवन का हमारा संपूर्ण विचार इस अवधारणा पर आधारित है कि क्या यह स्रोत अनंत, हानिरहित और उपयोग करने की हमारी इच्छा पर हमेशा निर्भर है। लेकिन सच्चाई से अधिक आगे क्या हो सकता है? एक तरफ तो अरबों लोग बिजली के बिना रह रहे हैं और यहां तक कि बुनियादी ईंधन आवश्यकताओं से भी वंचित हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, ७०% से अधिक लोग अभी भी रोज खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन पर निर्भर करते हैं, जिसके संग्रह में रोज ३-४ घंटे लगते हैं। चूल्हे की आग घर में २० सिगरेट/दिन धूम्रपान के बराबर प्रदूषण पैदा करती है और ४५ लाख से अधिक लोगों को हर साल मार डालती है। इससे भी अधिक लोग तो पानी को पीने योग्य बनाने के लिए ईंधन न होने से मर जाते हैं। दूसरी ओर, हम जीवाश्म ईंधन के मूर्खतापूर्ण उपयोग से अनेक जलवायु आपदाओं के साक्षी बन रहे हैं। जाहिर है हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां ऊर्जा के बारे में नई सोच को यदि हम नहीं अपनाएंगे तो, बहुत जल्द ही विनाश के भागी हो जाएंगे।
अब यह सार्वभौम रूप से मान लिया गया है कि हमारे -पर्यावरण संकट का हल सौर के चतुराईपूर्ण उपयोग में निहित है। लेकिन समस्या की भयावहता को देखते हुए, हमें मैदानी नवाचार तो बहुत नहीं दिख रहा है; और इसके समाधान के लिए कुछ नहीं किया जाता है, तो हमारे पास अपनी कारगुजारी को सही करने के लिए संभवत: पर्याप्त समय भी नहीं मिलेगा।
इस प्रकार सौर के दोहन में बच्चों को अनुभवों से इस प्रकार गुजारने की आवश्यकता है जो उनके भीतर ‘मैं कर सकता हूं’ का विश्वास, नई संभावनाओं की कल्पना के लिए प्रेरणा और दुनिया के साथ साझा करने के लिए उन्हें सशक्त बनाए।
सूर्य कुंभ- विश्व का सबसे बड़ा सौर पाककला महोत्सव
सूर्यकुंभ एक ऐसी पहल है जो सौर खाना पकाने में एक अनूठे अनुभव के माध्यम से बच्चों के बीच सौर नवाचार की भावना को प्रज्वलित करने की कोशिश करता है।
सीधे शब्दों में कहें, सूर्यकुंभ एक सौर पाककला महोत्सव है, जहां हजारों बच्चे और वयस्क एक सार्वजनिक स्थान पर इकट्ठा होकर अपने खुद के सौर चूल्हे बना कर, उन पर दोपहर का खाना बनाते हुए सौर के दोहन की कला और विज्ञान का प्रयोग करते हैं। और इस तरह सौर पाककला के माध्यम से अपने दोस्तों, परिवार, पड़ोसियों और अन्य अनेक लोगों में इस विचार को फैलाते हैं। यही बात है, कोई बड़ी डील नहीं। लेकिन जिसकी हम बात कर रहे हैं वह सौर खाना पकाने की एक सरल क्रिया बड़े स्तर पर परिवर्तन को किस तरह गति प्रदान कर सकती हैं? खैर, कारण चूल्हे की सादगी, इस प्रक्रिया की संपूर्णता, दुनिया के सबसे बड़े सौर महोत्सव के प्रतिभागी के रूप में जुड़ने का गौरव तथा अन्य लोगों के साथ अनुभव साझा करने की तीव्र इच्छा में निहित है।
पूरा त्योहार प्रतिभागियों को सौर खाना पकाने का एक खुशहाल अनुभव देने, उन्हें मान्यताओं को चुनौती देने के लिए प्रेरित करने, उनके अभिनव उत्साह को गति देने, उनके सपनों को पंख लगाने और उनके भीतर के लीडर को जगाने के लिए बनाया गया है, जिससे वे आसपास की समस्याओं का वास्तविक समाधान खोज सकें। अनुभव की तह में एक सरल, पोर्टेबल और टिकाऊ सौर चूल्हे का एक पेटेंट लंबित डिजाइन मिलता है, जिसे कुछ ही मिनटों के अंतराल में जोड़ा जा सकता है और जब उपयोग में नहीं तो तोड़ कर वापस पैक में रखा जा सकता है। लचीले, अटूट सामग्री से निर्मित सूर्य कुंभ सौर चूल्हा उपयोगकर्ता को इसे इस्तेमाल सामग्री के विभिन्न अनुप्रयोगों के साथ जोड़ने के लिए आमंत्रित करता है, जैसे सौर कुकर/ सुखाने की मशीन/ भोजन गर्म करने वाला, पानी पॉश्चराइजर, सूरज की रोशनी बढ़ानेवाला, कार विंडशील्ड, उष्मा धारक, फनी कोन कैप और यहां तक कि उनकी दीवार पर एक पृष्ठभूमि उनके चित्र और कला को दर्शाने के लिए।
वास्तव में इसे एक खिलौने जैसी अंतरंगता के साथ इसमें शामिल विज्ञान से रूबरू कराने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया है, जिससे वे स्वयं एक दूसरा बना सकें और दैनिक जीवन में उपयोग आने वाले या अन्य उपकरणों को सरल बनाने के बारे में सोच सकें।
अब तक की यात्रा
अब तक ४०,००० से अधिक बच्चों द्वारा अनुभव किए गए सूर्य कुंभ को गिनीज विश्व रिकार्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स, एशिया बुक और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा विश्व के सबसे बड़े सौर पाककला महोत्सव के रूप में मान्यता दी गई है। लेकिन अधिक महत्वपूर्ण बात, सूर्यकुंभ प्रत्येक उस व्यक्ति तक पहुंचने, उसे सक्रिय और प्रेरित करने में सफल रहा जो सौर खाना पकाने की इस सरल कला के गवाह बने। पिछले कुछ वर्षों में हुआ विकास इसका प्रमाण है।
यहां ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पैमाने के हर त्योहार में सैकड़ों स्वयंसेवकों, पर्यवेक्षकों, शिक्षकों, अभिभावकों, नागरिकों और आयोजन टीम की मजबूत भागीदारी होती है। इस तरह यह पर्व अनिवार्य रूप से समाज के हर वर्ण को छू लेता है और ऐसा करने का प्रत्यक्ष इरादा न होते हुए भी उन्हें प्रभावित करने की क्षमता रखती है। लेकिन सब से अलग, सूर्य कुंभ को असली सफलता तब मिलती है जब प्रतिभागी घर लौटते हैं, अपने स्वयं के सौर चूल्हे में विभिन्न व्यंजन पकाते हैं और सूर्य की प्रत्येक किरण से निकले जादू से अपने परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को चकित करते हैं और तब आश्चर्य से सोचते हैं कि और कहां इन किरणों का उपयोग नवाचार में किया जा सकता है।
आगे का रास्ता
अक्षय के साथ जुड़ी जटिलताओं के रहस्य से पर्दा उठाने और उन्हें जनता की पसंद बनाने की की वास्तव में आवश्यकता है। सूर्य कुंभ जैसे त्योहारों के माध्यम से हमारे पास दुनिया भर में अरबों बच्चों के मन में इस उपलब्धि को प्रज्ज्वलित करने का अद्भुत अवसर है, उनकी छिपी क्षमता को बाहर निकालने, रचनात्मकता और उत्साह जो एक खुशहाल, सुंदर, सतत और समस्त समावेशी भविष्य के निर्माण और नेतृत्व में सहायक होगा।
मो. ९९६०६८६३९३

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