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***पल्लवी अनवेकर****
जीवन की आधारभूत आवश्यकताओं में अब रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ बिजली की भी अहम भूमिका हो चली है। व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय विकास के लिए बिजली अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान ले रही है। ‘कनेक्टिंग पीपल ऍण्ड पावर’ इस घोषवाक्य को लेकर एक व्यक्ति बिजली के क्षेत्र में अपना व्यवसाय प्रारंभ करता है। वह पिछले २१ सालों से देश के कई राज्यों, शहरों, घरों, कल-कारखानों तक बिजली पहुंचाने का कार्य नियमित रूप से कर रहा है। भारत को ‘ऊर्जावान भारत’ के रूप में गढ़ने का प्रयास करने वाले ‘लीना पॉवरटेक इंजिनियर्स प्रा.लि.’ के सीएमडी अमित टेकचंदानी से बिजली एवं ऊर्जा के संबंध में हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंश-

अपना उद्योग प्रारंभ करने के लिए आपने बिजली तथा ऊर्जा क्षेत्र का ही चुनाव क्यों किया?
बिजली विकास का प्रतीक है। हमारा बोधवाक्य है ‘कनेक्टिंग पीपल ऍण्ड पावर’। आज मुंबई जैसे महानगरों में जो आर्थिक, शैक्षणिक विकास दिखाई देता है उसका श्रेय बिजली को ही जाता है। जब मैंने व्यवसाय शुरू करने का मन बनाया तब मैं यह महसूस कर रहा था कि भारत के ग्रामीण तथा शहरी भागों में बिजली वितरण में बहुत अंतर है। ग्रामीण भागों में बिजली न होने के कारण वहां विकास रुका हुआ है। शिक्षा से लेकर उद्योग तक किसी भी क्षेत्र में आवश्यक विकास नहीं हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए मैंने तय किया कि अपने ज्ञान का उपयोग देश की तरक्की के लिए करूंगा और फिर बिजली तथा ऊर्जा को ही अपना उद्योग क्षेत्र बनाया। अब मुझे व्यवसाय के साथ ही सेवा के भी अवसर मिल रहे हैं।

आपको अपने व्यवसाय में स्थिर होने के लिए कौनसे संघर्ष करने पड़े?
एक व्यवसायी को अपने व्यवसाय की स्थिरता के लिए हर कसौटी पर खरा उतरना होता है। पिछले २१ सालों में मैंने भी कई चुनौतियों का सामना किया है। जब मैंने अपना व्यवसाय शुरू किया तो नवी मुंबई क्षेत्र विकास की राह पर था। इसे विकसित करने में कई प्रायवेट सेक्टर के लोगों ने सहयोग प्रदान किया था। मैंने शुरुआती दौर में प्रायवेट डेवलपर्स के साथ काम किया, परंतु यहां काम का स्वरूप मर्यादित होता है। इस मर्यादा के कारण मैंने सरकारी सेक्टर के माध्यम से सेवा देना प्रारंभ किया। हमने नवी मुंबई और ठाणे की विद्युत वितरण सेवा में सुधार किया। नवी मुंबई में १५ लाख और ठाणे में २० लाख लोगों तक हमने बिजली पहुंचाई। हमारे व्यवसाय का मुख्य आधार है ‘क्वालिटी मैन पावर’। हमारे साथ समर्थ लोग जुड़ते गए और हमें पीछे मुड़कर देखने की कभी आवश्यकता ही नहीं पड़ी।

आपके व्यवसाय का स्वरूप क्या है?
हम बिजली वितरण के मूलत: दो क्षेत्रों में कार्य करते हैं। एक ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट और दूसरा बसे हुए शहर। अभी हम बिहार के पटना में काम कर रहे हैं, जो कि एक बसा बसाया शहर है। प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन का पूर्णतः डिझाइन, इंजिनियरिंग, मटेरिअल इत्यादि क्षेत्र में उच्चस्तर का कार्य हमारी कंपनी करती है। साथ ही बिल्डिंग इलेक्ट्रिफिकेशन, बिजली संचालन, रेल्वे इलेक्ट्रिफिकेशन क्षेत्र में भी हम कार्य करते है।

बिजली वितरण के क्षेत्र में आपके द्वारा किए गए कार्यों का परिचय दीजिए।
नवी मुंबई शहर में आज बिजली क्षेत्र में जो स्मार्ट सिटी स्तर का जो काम चल रहा है उस प्रोजेक्ट की डिजाइन में हमारा भी
योगदान है। एमएसईडीसीएल के साथ में हमने ठाणे, कल्याण, सोलापुर, अमरावती, सांगली में वितरण क्षेत्र में ‘स्काडा’ का काम किया है। अब महाराष्ट्र के बाहर गोवा, पटना, त्रिवेंद्रम में
भी बिजली वितरण में सुधार करने का कार्य शुरू है। ‘कनेक्टिंग पीपल ऍण्ड पावर’ हमारा घोषवाक्य है। हम भारत के अंतिम क्षेत्र तक बिजली का वितरण करने की क्षमता और इच्छा रखते हैं।

भारत की ऊर्जा एवं बिजली के क्षेत्र में आवश्यकताएं बढ़ रही हैं और मेक इन इंडिया तथा स्मार्ट सिटी की संकल्पनाओं के कारण इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद है। इस स्थिति में भारत की ऊर्जा तथा बिजली के संदर्भ में क्या नीति होनी चाहिए?
भारत सरकार ने बहुत दूरदृष्टि के साथ यह योजना बनाई है। इसके पहले बिजली की मांग बढ़ती थी और आपूर्ति कम होती थी। भारत सरकार का ‘विजनरी अप्रोच’ है। आज हर कोल ब्लॉक में कोयले का २० दिन का स्टॉक उपलब्ध है। स्थापित क्षमता २ लाख ७६ हजार मेगावाट है, प्लांट लोड फेक्टर के मद्देनजर निर्मित पावर सप्लाय १.५ लाख मेगावाट है, जबकि मांग १ लाख १३ हजार मेगावाट की है। यह सरकार मांग से ज्यादा आपूर्ति कर रही है। इसे एक बड़ी उपलब्धि कहा जा सकता है।
भारत सरकार मेक इन इंडिया, स्मार्ट सिटी के माध्यम से भारत का स्वरूप बदलना चाहती है। वे हर तरह की इंडस्ट्री में परिवर्तन करना चाहते हैं। इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर सरकार ने २ लाख २५ हजार मेगावाट का लक्ष्य रखा है। अगर शुरआती दौर में इसका ५०% लक्ष्य भी साध्य होता है तो भी बहुत अच्छी स्थिति होगी। १८ महीने में सरकार के द्वारा किए गए कार्य की स्थिति भी बहुत अच्छी है। कोयले के ऑक्शन क्लीयर किए जाने के कारण कोयला उपलब्ध हो गया।

भारत की ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्धियों के विषय में आपकी क्या राय है?
आज भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। ऊर्जा क्षेत्र में एनटीपीसी, एनपीसीएल जैसे ऊर्जा निर्माण करनेवाले प्लांट हैं। भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर है। भारत के पास इतने अत्याधुनिक पावर प्लांट हैं कि अगर चंद्रपुर में बिजली का उत्पादन हो रहा है तो ५ मिनिट के अंदर मुंबई में उसका वितरण हो सकता है।
इस प्रकार के अत्याधुनिक ट्रांसमिशन भारत के पास हैं। ऊर्जा निर्माण के क्षेत्र में तो अच्छी उपलब्धियां भारत के पास हैं परंतु वितरण के क्षेत्र में नियोजन व विकास होना आवश्यक है।

बिजली के वितरण के संदर्भ में कौन से बुनियादी परिवर्तनों की आपको उम्मीद है?
आज देश के बिजली वितरण क्षेत्र में लगभग ३२% वितरण क्षति है जिसमें न्यूनतम क्षति ९% और अधिकतम क्षति ७१% है। सरकार की समस्या दोहरी भी है। पहली यह कि उसे सभी ग्राहकों तक बिजली का वितरण योग्य तरीके से करना है और दूसरी उन सभी ग्राहकों से उनके द्वारा उपयोग की गई बिजली का योग्य भुगतान प्राप्त करना इन समस्याओं को देखते हुए सरकार को वितरण से लेकर भुगतान प्राप्ति तक की सभी क्रियाओं को डिजिटल कर देना चाहिए। जिससे ग्राहकों को भुगतान करने में आसानी होगी।

केंद्र सरकार ने सन २०२२ तक देश के हर घर में बिजली देने का लक्ष्य अपने सामने रखा है। क्या यह संभव है?
जी हां! यह सौ प्रतिशत संभव हो सकता है। लेकिन सिर्फ प्रधान मंत्री, ऊर्जा मंत्री के सोचने से नहीं होगा। उन्होंने जो आव्हान किया है उसके लिए ऊर्जा क्षेत्र में हर व्यक्ति का सहभाग अनिवार्य है। भारत सरकार ने ‘उदय भारत’ नामक जो योजना बनाई है उस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार ने आयपीडीएस तथा डीडीयूजीवाय जैसे प्रकल्पों के द्वारा सभी राज्य सरकारों को १ लाख ४० हजार करोड़ का बजट दिया है। केंद्र सरकार सभी तक बिजली पहुंचाने के लिए गति से प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार की इस योजना का सभी राज्य सरकारों तथा सभी वितरण कंपनीयों द्वारा स्वागत तथा क्रियान्वयन किया जाना चाहिए।

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने स्वप्न ‘ऊर्जावान भारत’ की ओर मार्गक्रमण कर रहे हैं?
बिजली आने से लोगों के विश्वास में वृद्धि होती है। भारत ग्रामीण भागों का देश है। ग्रामीण क्षेत्र में बिजली का सही वितरण होगा तो वहां प्रकाश होगा। लोगों की शिक्षा का स्तर बढ़ेगा। लोग टीवी देख पाएंगे। जिससे उनके ज्ञान में वृद्धि होगी। देश विदेश में घटने वाली घटनाओं की जानकारी उन्हें मिलेगी। इससे उनमें जागरुकता आएगी। मोदी सरकार ‘ऊर्जावान भारत’ बनाने हेतु हर संभव प्रयास कर रही है।
एक एलईडी लगाने से बडी मात्रा में बिजली की बचत होती है तथा पर्यावरण संरक्षण भी होता है। भारत देश में ७७ करोड एलईडी चाहिए। पहले जो एलईडी ४१० रुपये में बिकता था वह आज ७२ रुपये में बिक रहा है। इस कारण एलईडी का उपयोग बढ़ रहा है। मुंबई में अभी लगभग ६० हजार एलईडी बल्ब लगे हैं और लगभग ढ़ाई करोड़ की आवश्यकता है।

अभी सोलर ऊर्जा का उपयोग ‘स्टेटस सिम्बल’ की तरह हो रहा है क्या यह सोलर ऊर्जा की तकनीक आम जनता तक पहुंची है?
सोलर एनर्जी में सरकार की रुचि बढ़ रही है। लोगों की धारणा थी कि सोलर उपकरण बहुत महंगे हैं। सरकार द्वारा २०२२ तक एक लाख मेगावाट सौर ऊर्जा का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे सोलर उपकरणों की दरों में ५०% की कमी हुई है। उपरोक्त एक लाख मेगावाट में से ६० हजार मेगावाट सोलर पार्क से नियोजित है। तथा ४० हजार मेगावाट रुफटॉप सोलर (जो कि आम आदमी के लिए है) से नियोजित है। इसी के साथ सौर ऊर्जा कि दरों में भी लगभग ५०-७५% तक की कटौती हुई है। अब सोलर उपकरण सस्ते हो जाने के कारण आम लोग भी इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। इस क्षेत्र में सरकार भी बहुत जागरुक है।

बिजली और ऊर्जा के क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कौन से प्रयास हो रहे हैं?
अभी देखा जाए तो भारत में १४ अल्ट्रामेगा पावर प्लांट बनने हैं। उनमें से ‘मुद्रा’ और ‘शासन’ ये दो प्रकल्प ही सफल रहे हैं। एक अल्ट्रामेगा पावर प्लांट को बनाने में २५ हजार करोड़ के निवेश की आवश्यकता होती है। इस जरूरत को पूरा करने में जिन उद्योगपतियों ने निवेश करने का प्रयत्न किया वे सभी बाद में पीछे हट गए। अब भारत सरकार के पास बिजली निर्माण और वितरण की ठोस नीति है और विदेशी निवेशकों के पास तकनीक है। हमें तकनीक की आवश्यकता है। अपनी नीति और उनकी तकनीक का एक साथ उपयोग करने की योजना केन्द्र सरकार के द्वारा बनाई जा रही है। यह आनंद का विषय है।

बिजली क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों में आप अपनी संस्था को कहां देखते हैं?
हम पिछले २१ सालों से इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। इस क्षेत्र में हमें अच्छा अनुभव है। बिजली उत्पादन, संचलन के क्षेत्र में भारत सरकार ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं परंतु वितरण के क्षेत्र में अभी भी काम करने की आवश्यकता है। इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के वितरण क्षेत्र में आयपीडीएस तथा डीडीयूजीवाय जैसे प्रकल्पों की घोषणा देशभर में की गई है। इन प्रकल्पों के अंतर्गत हमारी संस्था अपने पर्याप्त अनुभव और कुशल मनुष्य बल के द्वारा १५-२० शहरों के वितरण क्षेत्र में उच्चस्तरीय कार्य करने की इच्छुक है। जिससे आम जनता तक उच्च स्तरीय पावर सप्लाय करके देश की सेवा में सम्मिलित हुआ जा सके।

पेरिस पर्यावरण परिषद में बिजली, ऊर्जा के संदर्भ में किन मुद्दों पर चर्चा की गई है?
हमारे प्रधान मंत्री द्वारा की गई पहल के अनुसार सोलर नियोजित राष्ट्रों का एक संघटन बनाया गया है। इस संघटन द्वारा यह मांग रखी गई है कि, जो विकसीत देश है वे अपनी टेक्नॉलॉजी और निवेश के द्वारा विकासशील राष्ट्रों की सहायता करें। यह पर्यावरण संरक्षण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम होगा तथा इससे विकासशील राष्ट्रों की प्रगति को गती मिलेगी।

पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में आपकी संस्था क्या प्रयास कर रही है?
हमारे कार्य से बिजली की बचत होती है। बिजली की बचत पर्यावरण संतुलन में भी योगदान देती है। पहले नवी मुंबई में बिजली की वितरण क्षति १०% थी। अब यह ८% तक आ चुकी है। बिजली में बचत के कारण अधिक बिजली निर्माण का श्रम कम हो जाता है। ठाणे में लगभग १७.५% वितरण क्षति थी जो अब १२% तक कम हो गई है। इस प्रकार का कार्य हम देश के अन्य बडे शहरों में भी कर रहे हैं। हमने कुछ मिलियन यूनिट्स की बचत की है। यह पर्यावरण संरक्षण में काफी सहायक होगा।

आपकी संस्था को किन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है?
पुरस्कारों को ध्यान में रखकर हमने कभी कोई काम नहीं किया। हमारा ध्येयवाक्य है ‘कनेक्टिंग पीपल ऍण्ड पावर’। हम लोगों तक बिजली पहुंचाने में योगदान देते हैं। स्थानीय प्रशासन और जनता में समन्वय निर्माण करने का कार्य करते हैं। साथ ही प्रशासन की बिजली वितरण में उत्तम तकनीक के साथ सहायता करते हैं। जिससे प्रशासन को कम से कम घाटा हो। पटना जैसे शहरों में ४२ पावर ट्रांसफार्मर बदल कर ३३ कि.व्ही. वोल्टेज सिस्टम में २१० एमवीए क्षमता बढ़ाई तथा वितरण क्षेत्र में २००० डिस्ट्रीब्युशन ट्रान्सफॉर्मर लगा कर ६५० एमवीए तक क्षमता बढ़ाई। यह सारा काम गति और कुशलता से किया गया। इस कारण बिहार सरकार ने हमें पुरस्कार देकर सम्मानित किया है।
यहां विशेष रूप से बताना चाहूंगा कि रियल टाईम मॉनिटरिंग ‘स्काडा’ बेस प्रोजेक्ट के लिए पिछले कई सालों से विभिन्न राज्य सरकारें प्रयत्न कर रही हैं परंतु अभी तक किसी ने उस पर अमल नहीं किया। महाराष्ट्र राज्य सरकार आने वाली फरवरी माह में अमरावती में हमारे ‘स्काडा बेस प्रोजेक्ट’ का शुभारंभ करनेवाली है। हमारे लिए यह एक पुरस्कार ही है।

आज जब आप अपनी सफल जीवन यात्रा पर नजर डालते हैं तो आपके मन में क्या विचार आते हैं?
हमें बहुत अच्छे लोगों का साथ मिला। अच्छे लोगों से अच्छा मार्गदर्शन मिला। मैं व्यवसाय में काफी हद तक कामयाब रहा हूं। देश के लिए कुछ करने का स्वप्न लेकर मैं इस क्षेत्र में आया था और मुझे खुशी है कि हम इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं। हमारे ये बढ़ते हुए कदम कहीं भटके नहीं हैं। यही हमारी २१ वर्षों की उपलब्धि है।
बिजली आने पर जब लोग जुलूस निकालते हैं, बाजा बजाते हैं, मिठाई बांटते हैं तो लोगों के चेहरों की खुशियां देखकर यह अहसास होता है कि हम सही रास्ते पर चल रहे हैं।

कुशल तकनीक के साथ कुशल मानव संसाधन इस क्षेत्र में कितना महत्वपूर्ण है?
सन १९६५ में स्टेट इलेक्ट्रिसिटि बोर्ड बने। २००३ में इलेक्ट्रिसिटि एक्ट बना और २००९ से इस क्षेत्र में उद्योगपतियों का आर्थिक निवेश प्रारंभ हुआ। बिजली क्षेत्र में काम बहुत है। परंतु इस काम को क्वालिटी स्तर पर करना हो तो उसके लिए हमारे देश में कुशल मनुष्य बल का अभाव है। इस क्षेत्र में १६ लाख लोगों की आवश्यकता है परंतु इतने प्रशिक्षित लोग नहीं है। यह बहुत बड़ी दरार है। इस दरार को भरने का कोई फ्रेमवर्क हमारे पास नहीं है। जब हमें बिहार में काम शुरू करना था तब बिहार में मनुष्य बल बहुत था। पर बिजली क्षेत्र में काम करने वाला कुशल मनुष्य बल नही था। इस क्षेत्र में ‘‘शार्टकट’’ भी नहीं चलता। कार्य में कुशलता पाना अत्यंत आवश्यक है। अगर काम कुशलतापूर्वक नहीं किया गया तो उसकी क्षति जल्दी होती है। दस साल तक चलनेवाला उपकरण ४-५ साल तक ही काम कर सकता है। उससे देश का नुकसान होता है। पर्यावरण प्रदूषित होता है। कुशल मनुष्य बल तैयार करना सरकार के सामने बहुत बड़ी चुनौती है। इस बारे में गंभीरता से सोचना आवश्यक है। सरकार अपनी योजनाएं बनाती हैं परंतु उस योजना का क्रियान्वयन कैसे करना होगा इसका भी विचार करना चाहिए। राज्य सरकारों को भी इस विषय में मार्गदर्शन करना आवश्यक है।
‘ऊर्जावान भारत’ योजना सही दिशा में जा रही है। उस पर प्रत्यक्ष कार्यवाही होना आवश्यक है।

मो. ९५९४९६१८४९

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