सामाजिक शक्ति केन्द्र बनें गोशाला

Continue Readingसामाजिक शक्ति केन्द्र बनें गोशाला

विगत 25 वर्षों से गोसेवा का कार्य नियमित रूप से करनेवाले गिरीश भाई शाह ने समस्त महाजन संस्था के माध्यम आदर्श गांव की संकल्पना को न केवल सबके सामने प्रस्तुत किया है वरन वे स्वावलंबी गोशाला और स्वावलंबी गांव बनाने के लिए रोड मैप भी तैयार कर चुके हैं। गोपालन और गोसंरक्षण के संदर्भ में उनके कुछ मौलिक विचार हैं जो उन्होंने इस साक्षात्कार के माध्यम से सभी के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।

गोवंश के प्रति समाज अपना दायित्व समझे!-सुनील मानसिंहका

Continue Readingगोवंश के प्रति समाज अपना दायित्व समझे!-सुनील मानसिंहका

पिछले लगभग तीन दशकों से गोसेवा के क्षेत्र में कार्य करनेवाली गो सेवा अनुसंधान केंद्र, देवलापार नामक संस्था अब केवल गो वंश को बचाने वाली गोशाला तक सीमित नहीं रही है, वरन अब वह एक बहुत बड़ा अनुसंधान केंद्र बन गई है, जो कि अन्य गोशालाओं के लिए आदर्श है और मार्गदर्शक भी है। प्रस्तुत हैं पिछले लगभग 25 वर्षों से इस केंद्र को सुनियोजित रूप से चलाने वाले संचालक सुनील मानसिंहका से हुई चर्चा के कुछ प्रमुख अंश-

सैनिक निर्माण करनेवाली संस्था-डॉ. दिलीप बेलगावकर

Continue Readingसैनिक निर्माण करनेवाली संस्था-डॉ. दिलीप बेलगावकर

स्वतंत्रता के 10 वर्ष पूर्व से ही एक संस्था भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिये, एक सशक्त सेना के निर्माण के लिए सैनिक तैयार कर रही है, उस संस्था का नाम है, भोंसला मिलिट्री स्कूल। प्रस्तुत है देश की सुरक्षा व्यवस्था तथा भोंसला मिलिट्री स्कूल की भविष्यकालीन योजनाओं के संदर्भ…

दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति है भारत – मेजर सुरेंद्र पूनिया

Continue Readingदुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति है भारत – मेजर सुरेंद्र पूनिया

पेशे से डॉक्टर, थल सेना में मेजर रैंक, पैराट्रूपर, म. राष्ट्रपति के सुरक्षाकर्मी, अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण विजेता खिलाड़ी, प्रसिद्ध वक्ता तथा सोशल मीडिया पर सदा चर्चा में रहनेवाले मेजर सुरेन्द्र पूनिया आज समाज का जानामाना नाम है। भारतीय सुरक्षा व्यवस्था को उन्होंने अत्यंत करीब से देखा है। उनके अनुभवों तथा वर्तमान व भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर उनकी बेबाक राय है। प्रस्तुत है उनसे हुई चर्चा के कुछ महत्वपूर्ण अंश-

शस्त्र आवश्यकताओं की पूर्ति करने में समर्थ डीआरडीओ

Continue Readingशस्त्र आवश्यकताओं की पूर्ति करने में समर्थ डीआरडीओ

आजादी के अमृत महोत्सव में देश की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। आज भारतीय सेना जिन आधुनिक शस्त्रास्त्रों से लैस है, उसका श्रेय बहुत हद तक डीआरडीओ को जाता है। बुलेट प्रूफ जैकेट से लेकर ड्रोन का अनुसंधान डीआरडीओ ने किया है और वह भी पूरी तरह भारतीय तंत्रज्ञान के आधार पर। डीआरडीओ के इसी स्वावलंबन और सुरक्षा क्षेत्र में उनके योगदान के बारे में डीआरडीओ के चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी से हुई बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण अंश-

राष्ट्रभक्ति को चाहिए राष्ट्रशक्ति का कवच – ले. जन. (से. नि.) डॉ. दत्तात्रेय शेकटकर

Continue Readingराष्ट्रभक्ति को चाहिए राष्ट्रशक्ति का कवच – ले. जन. (से. नि.) डॉ. दत्तात्रेय शेकटकर

तालिबान-अलकायदा का रिमोट कंट्रोल पाकिस्तान के हाथ में है और पाकिस्तान का रिमोट कंट्रोल चीन के हाथ में। चीन को दबाने से पाकिस्तान खुद ही दुबक जायेगा। इसलिए भारत का सामर्थ्यवान होना आवश्यक है, यह कहना है रक्षा विशेषज्ञ ले.जन. (से.नि.)डॉ.दत्तात्रेय शेकटकर का। उन्होंने हिंदी विवेक को दिए साक्षात्कार में भारत की बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा को लेकर अपनी बेबाक राय रखी और साथ ही अलगाववादी, नक्सली, माओवादी, जिहादी, आतंकवादी इत्यादि राष्ट्रविरोधी तत्वों से निपटने के सटीक उपाय भी बताए। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के सम्पादित अंश -

हमने बनाई किसान फ्रेंडली पॉलिसी – सुबोध उनियाल (कृषि मंत्री)

Continue Readingहमने बनाई किसान फ्रेंडली पॉलिसी – सुबोध उनियाल (कृषि मंत्री)

कोरोना काल की विपरित परिस्थितियों में भी उत्तराखंड ने सर्वाधिक खेती करने का कीर्तिमान बनाया और कृषि पुरस्कार हासिल किया। इसके साथ ही जैविक खेती में उत्तराखंड देश का अग्रणी राज्य बन गया है। किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हे आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है, यह भरोसा देते हुए कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने साक्षात्कार में कृषि से जुड़ी संभावनाओं, अवसरों एवं उपलब्धियों सहित सरकार की योजनाओं की चर्चा की। प्रस्तुत है उनके साक्षात्कार के प्रमुख अंश -

उत्तराखंड बनेगा वैश्विक पर्यटन केंद्र – सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री

Continue Readingउत्तराखंड बनेगा वैश्विक पर्यटन केंद्र – सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री

इंसान जब अपने आप में खुशी और शांति को तलाश करता है, तो उत्तराखंड के हरिद्वार और ऋषिकेश में जरुर आता है। हमें विश्वास है, संपूर्ण विश्व उत्तराखंड की ओर भविष्य में अपनी आध्यात्मिक शांति के लिए आएगा। उत्तराखंड राज्य के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी। उत्तराखंड के लोग अत्यंत सहज और सहयोग देने के लिए तत्पर होते हैं। निकट भविष्य में वे पूरे विश्व के लोगों को अपनत्व देंगे और विश्व का अपनत्व लेंगे।

उत्तराखंड जन्मभूमि : मुंबई कर्मभूमि

Continue Readingउत्तराखंड जन्मभूमि : मुंबई कर्मभूमि

वर्षों से पहाड़ी लोगों की मेहनत और इमानदारी की दुनिया कायल रही है। महाराष्ट्र को हम पहाड़ी अपना ही समझते हैं, हमारे यहां बहुत से लोगों के पुरखे महाराष्ट्र से ही गये हैं। ये कथन हैं भारत विकास परिषद, कोंकण प्रांत के अध्यक्ष महेश शर्मा के।

अनुदान बहुत हुआ अब श्रमदान करें

Continue Readingअनुदान बहुत हुआ अब श्रमदान करें

महाराष्ट्र के वर्तमान मा. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के पूर्व मुख्य मंत्री भी रह चुके हैं। उत्तराखंड के गठन से उनकी सक्रीय राजनीति में अहम भूमिका रही है। उन्होंने उत्तराखंड के विकास के लिए कई योजनाएं बनाईं थीं। अब 21 वर्षों के उपरांत प्रदेश की प्रगति के संदर्भ में उन्होंने हिंदी विवेक से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके कुछ प्रमुख अंश-

स्वावलंबन से होगा आत्मनिर्भर उत्तराखंड – पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री)

Continue Readingस्वावलंबन से होगा आत्मनिर्भर उत्तराखंड – पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री)

उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य की समस्या, चुनौती और अवसर से भालिभांति परिचित हैं। वे उत्तराखंड को देश की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक राजधानी बनाना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने विकास के मामले में राज्य को भारत का प्रथम क्रमांक का राज्य बनाने का भी संकल्प लिया हैं। इन विषयों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने अपने साक्षात्कार में पलायन, रोजगार, स्वरोजगार, उद्योग-व्यवसाय, पर्यटन, धर्म संस्कृति, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, ग्राम, कृषि, किसान, युवा, सरकारी योजनाओं सहित राज्य के विकास कार्यों पर अपने विचार प्रकट किये हैं। प्रस्तुत हैं साक्षात्कार का सम्पादित अंश-

उत्तराखंड भारत की सांस्कृतिक धरोहर – स्वामी विश्वेश्वरानंद महाराज

Continue Readingउत्तराखंड भारत की सांस्कृतिक धरोहर – स्वामी विश्वेश्वरानंद महाराज

सनातन धर्म की पुनर्स्थापना आद्य शंकराचार्य ने की। उन्होंने शस्त्र नहीं चलाया, केवल शास्त्र के माध्यम से ही समाज में सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की। इसलिए शास्त्र परम्परा का संरक्षण व संवर्धन होना चाहिए। यह उद्गार व्यक्त करते हुए अपने साक्षात्कार में संन्यास आश्रम के महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज ने उत्तराखंड के आध्यात्मिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश –

End of content

No more pages to load