मोदी शासन में जीव-जंतु कल्याण बोर्ड अधिक गतिशील – गिरीशभाई शाह

प्रकृति की देन हर जीव के प्रति संवेदना और करुणा जगाना बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। देश का भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड यही काम कर रहा है। मोदीजी के सत्ता में आने के बाद बोर्ड अभूतपूर्व रूप से गतिशील बना है। बोर्ड के कार्यों, जीवदया, भविष्य की योजनाएं आदि पर बोर्ड के सदस्य गिरीशभाई शाह के साथ हुई विस्तृत बातचीत के महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत है।

आप जिस बोर्ड के साथ जुड़े हैं उसका पूरा नाम क्या है?

भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड।

भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भारत के संविधान में भी लिखा है कि हर एक जीव के प्रति दया और सम्मान रखो। उसी आधार पर भारतीय संसद में prevention to cruelity of animals act पारित हुआ है। इस कानून पर अमल के लिए भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड का निर्माण हुआ। चींटी से लेकर हाथी तक किसी भी प्राणी पर अत्याचार ना हो, क्रूरता ना हो; यह देखना इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य है।

‘जीवदया’ शब्द का अर्थ आप अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए?

‘जीवदया’ को अगर वैज्ञानिक या सैद्धांतिक रूप से परिभाषित किया जाए तो कहा जा सकता है हर जीव समान है और जीव जन्म लेने के बाद पूरी ताकत से जीने का प्रयास करता है। हम मनुष्य ऐसे हैं कि बिना सोचे-समझेे क्रूरता कर बैठते हैं। जीवदया का अर्थ है कि हर जीव कुदरत की देन है; इसलिए कुदरत की देन के साथ स्नेहभाव रखें।

बोर्ड की स्थापना कब हुई?

बोर्ड की स्थापना 1960 में इसी कानून के तहत हुई। अब तक चेन्नई में कार्यालय था। इसी कानून के तहत देश के हर राज्य में ‘स्टेट एनिमल वेलफेयर बोर्ड’ गठित होते हैं। हर जिले में district society for prevention of cruelty of animals (dspca)  बनी है। भारतीय जीवजंतु कल्याण बोर्ड के तहत राज्य, जिले से लेकर हर गांव में भी एक-एक व्यक्ति इसकी जिम्मेदारी लेकर पूरे समाज को जोड़कर यह काम कर सकता है ताकि किसी प्राणी पर अत्याचार न हो।

बोर्ड की स्थापना से अब तक हुए महत्वपूर्ण कार्य का उल्लेख आप किस प्रकार करेंगे?

चूंकि इस बोर्ड की स्थापना पीसीए एक्ट के तहत हुई है; अतः मुर्गी, मछली, पालतू पशुओं जैसे कुत्तों आदि के लिए नीतियां बनती हैं, उन पर विचार-विमर्श करके उन्हें भारत सरकार को सौंपा जाता है। मुझे लगता है बोर्ड का यह महत्वपूर्ण संशोधनात्मक कार्य है। संशोधन के आधार पर ये सारी व्यवस्थाएं तय करनी होती हैं।

बोर्ड के माध्यम से अब तक किए गए कार्यों का सकारात्मक परिणाम समाज में किस प्रकार दिखाई दे रहा है?

बहुत व्यापक जागृति आई है। अगर बैलगाड़ी है, बैल उसे खिंच रहे हैं, तो उन पर क्षमता से अधिक बोझ डालना ठीक नहीं है, कानून रोकेगा- यह जागृति आई है। लोग इस डर से भी ज्यादा अच्छी भूमिका अपनाने का प्रयास करते हैं। ये चीजें सकारात्मक हैं। मिसाल के तौर पर जल्लीकट्टू के विषय को भी बोर्ड के माध्यम से ही सुलझाया गया। निर्दयता भी नहीं हुई और काम भी हो गया। इस प्रकार निर्दयता रोकना भी हमारा काम है।

इस बोर्ड के सदस्य के नाते आपने जिम्मेदारी कब स्वीकार की?

3 मार्च 2017 के गैजेट में मेरा नाम प्रकाशित हुआ। उसी दिन से मुझे बोर्ड के सदस्य की जिम्मेदारी मिली। सवा साल से यह जिम्मेदारी बहुत अच्छी तरह से संभाल रहा हूं। इस बीच सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह किया कि बोर्ड का कार्यालय चेन्नई से दिल्ली लाए ताकि सरकार के साथ की नजदीकी बढ़े और सारे मामले तेजी से हल किए जा सकें। जल्लीकट्टू का मामला अच्छे से हल हुआ। जितने मामले अदालत में हैं, उन सब की सारी छानबीन हुई। अब हम लोग भारत के हर जिले में ऑनरेरी एनिमल वेलफेयर ऑफिसर्स नियुक्त करना चाहते हैं। बड़े पैमाने पर काम चालू है। हर राज्य के स्टेट कोआर्डिनेटर भी बनेंगे। बोर्ड में आने के बाद देखना चाहते थे कि हमने कितना पैसा बांटा। लेकिन केवल पैसा बांटने की अपेक्षा नीति विषयक व्यवस्थाओं में सुधार कर अच्छे से कैसे काम करें इस पर ज्यादा बल देने का हमने प्रयास किया है; ताकि नियमों पर अच्छा अमल होकर सभी जीव जंतुओं का कल्याण हो।

चार साल पहले की बोर्ड की स्थिति और इन चार सालों में मोदीजी के नेतृत्व में चल रहे कार्य इन दोनों का अंतर आप किस प्रकार से स्पष्ट करेंगे?

चार साल पहले और इन चार सालों में हुए अंतर को रात और दिन के रूप में विभाजित कर सकता हूं। अभी दिन का उजाला है। रोज काफी काम हो रहा है। हर कागज का जवाब मिल रहा है। हरेक नीति के विषय में गहन चर्चा हो रही है। लगातार बैठकें हो रही है। हर राज्य में मुलाकातें हो रही हैं। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलकर उन्हें हमारेे कार्यों के बारे में बता रहे हैं। मा. सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दिया है कि पशु-पक्षियों का काम भी कानून के तहत होना चाहिए। मैं मानता हूं कि नया बोर्ड बनने के बाद इतने सक्रिय सदस्य आए हैं कि कार्य अच्छे से हो रहा है।

आप किन सदस्यों का उल्लेख करना चाहेंगे? इन कार्यों में?

सुनीलजी मानसिंगका, राकेश गुप्ता, चेयरमैन साहब डॉ. एस. पी. गुप्ता जो निवृत्त आईएएस हैं। उनकी खास बात है जिस दिन वे निवृत्त हुए, उस दिन वे अपनी पत्नी के साथ घर जाने की अपेक्षा गोशाला में गए और सात साल से गोशाला में ही रहते हैं। इतने ताकवार, आईएएस सदस्य बोर्ड को मिले, यह भी बोर्ड का सौभाग्य है।

‘जीवदया’ के संदर्भ में समाज में जागृति लाने हेतु आपने भव्य सम्मेलनों का आयोजन किया था। उन सम्मेलनों के स्वरूप और उद्देश्य के बारे में हमारे पाठकों को जानकारी दीजिए?

‘जीवदया’ सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य होता है, जागृति लाना। हमने पहले गुजरात में किया, उसमें 1200 लोग आए। तीन दिन हम साथ रहे। उनको मार्गदर्शन दिया, नियमों की जानकारी, पूरा ब्यौरा बना क्योंकि ये 1200 लोग ऐसे हैं जो पूरे गुजरात के 6 करोड़ लोगोें से जुड़ जाते हैं। इससे व्यापक जागृति आती है। पिछले महीने में हमने केवल एक जिले जालौर की 101 एनिमल वेलफेयर संस्थाओं को इकट्ठा किया। 400 लोगों को तीन दिन तक मार्गदर्शन दिया गया, अच्छी संस्थाओं की जानकारी दी गई। उसका बहुत व्यापक परिणाम आया। हमारे इन सम्मेलनों में पूरे 12 घंटों का अध्ययन होता है। मैं मानता हूं कि इन सम्मेलनों से बहुत फायदा होगा और जीवजंतुओं के प्रति समाज में व्यापक जागृति आने से ज्यादा से ज्यादा लोगों में पशु-पक्षियों के प्रति करुणा भाव आएगा।

‘जीवदया’ की परिभाषा में वर्तमान स्थिति में आनेवाले चुनौतीभरे विषय बोर्ड के सामने कौन कौनसे हैं?

मांसाहार और क्रूरता दोनों व्यापक हो चुके हैं। लोग कुत्तों को लेकर समस्या खड़ी करते हैं। कुत्तों को मार देते हैं। कई जगह कबूतरखाना होता है तो वहां भी कुछ लोग आपत्ति जताते हैं। बैलगाड़ी, घोड़ागाड़ी पर भी लोग आपत्ति करते हैं। ऐसी कई चुनौतीभरी स्थितियां हैं। हम लोगों को वास्तविकता बताना चाहते हैं कि ये भी जीव हैं जिनके प्रति करुणा रखना हमारी जिम्मेदारी है। यही जागृति लाने की कोशिश है।

हमारे देश में पशुओ को लेकर कई चीजें श्रद्धा या व्यवसाय के लिए की जाती हैं। मेलों में श्रद्धावश बैलगाड़ी का उपयोग होता है। कबूतरखाना पेशेवर बना है। इनके समाधान के लिए आपके बोर्ड ने क्या कदम उठाए हैं?

कबूतरखाने को आप पेशे के रूप में नहीं ले सकते। जो उसे संभाल रहा है, वह केवल दाने का पैसा लेकर उसे संभाल रहा है। उससे उसका पेट भर रहा है। जैसे बैलगाड़ी है। अगर बैल-घोड़े को हम काम नहीं देंगे यह गलत है। आप उन पर क्रूरता मत करो, लेकिन उनसे काम ही छीन लो, यह तो ठीक नहीं है। पहले हल से खेती होती थी। हम ट्रैक्टर लाए तोे कितना नुकसान कर लिया। बैलों का काम छीन गया, प्रदूषण बढ़ गया। ट्रैक्टर में निवेश बढ़ गया। ट्रैक्टर गोबर नहीं देता, तो आर्गेनिक खेती भी कम हो गई। ऐसा कोई शब्द नहीं है जिसमें से मंत्र नहीं बनता है। ऐसा कोई वृक्ष या पौधा नहीं है जिससे औषधि नहीं बनती। उसी तरह से ऐसी कोई चीज नहीं है जो उपयोगी न हो। वह कुछ न कुछ समाज को देती ही है। उदा. बैल है तो अपनी सेवा देता है। गाय है तो दूध देती है। प्रेमभाव से अगर काम लेते हैं तो उसमें समाज का भला भी है। गांधी जी ने कहां था कि ‘Think a nation without a man but I don’t think a nation without animal’. जैसे कि पानी, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, सबको एक दूसरे को संभालना है; और मर्यादित रूप में सबको एक दूसरे के लिए उपयोगी होना है।

इस प्रश्न का निपटारा करने हेतु बोर्ड किस दृष्टि से विचार कर रहा है?

बोर्ड तो सतत कोशिश करता रहता है। जागृति लाने का प्रयास करता रहता है। ‘हिंदी विवेक’ के माध्यम से मैं सभी पाठकों से अनुरोध करता हूं कि आइए जुडिए ऑनरेबल एनिमल वेलफेसर ऑफिसर या सोसायटी केअरटेकर के रूप में हमारे बोर्ड से और अपनी शक्ति का समाज के लिए उपयोग करें।

बकरी, मुर्गी अथवा मछली खानपान से जुड़े हुए विषय हैं। इनके विकल्प को लेकर बोर्ड की क्या सोच है?

व्यक्तिगत खानपान पर बोर्ड आपत्ति नहीं जता सकता क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी है; लेकिन जागृति जरूर फैला रहे हैं कि इन चीजों को खाने से वैज्ञानिक रूप से क्या-क्या नुकसान होता है। अतः हम कहते हैं कि नुकसान को ध्यान में रखकर अच्छे खानपान की चीजों पर ध्यान दीजिए।

सव्वा साल में आपका जो अहसास रहा है वह किस प्रकार का है?

मुझे यह काम करने का बहुत आनंद इसलिए आ रहा है कि हर जीव के प्रति संवेदना जगाने का बोर्ड का मूल मंत्र है और यह काम करने से, जागृति लाने से भारत के सव्वा सौ करोड़ लोगों के व्यवहार में यह संवेदना आ जाए तो बेहतर है। यदि वे पशुपक्षियों- प्राणियों के प्रति संवेदनशील बन जाए तो अपने परिवार के प्रति अपने-आप संवेदनशील बन जाएंगे। परिवार के प्रति संवेदनशीलता आएगी तो देश के प्रति भी वह बन जाएगी। इतना प्यार, प्रेम, करूणा सबके हृदय में आ जाए तो सामाजिक समस्या ही खत्म हो जाएगी। अगर हम किसी के प्रति क्रूरता दिखाते हैं तो वह लौटकर हमारे परिवार में ही आती है। मै तो यही मानता हूं कि हर जीव के प्रति करूणा भाव जगाने से समाज सदृढ़ बनेगा।

अपना भारत देश सवा सौ करोड़ जनसंख्या वाला विशाल देश है। इस विशाल देश में बोर्ड का कार्य लोगों पहुंचाने हेतु कौनसी व्यवस्था उपयोग में आती है?

हम अंब्रेला सिस्टम से कर रहे हैं। केंद्र में एनिमल वेलफेयर बोर्ड है, फिर हर राज्य में एनिमल वेलफेयर बोर्ड है। उसके माध्यम से उस जिले के सभी गांवों में सोसायटी केअरटेकर बनेंगे। मै चाहता हूं कि साढ़े छह लाख सोसायटी ऑफिसर्स बने। हर जिले में हमारे एनिमल वेलफेयर ऑफिसर्स बने। देश के सभी राज्यों में स्टेट कोआर्डिनेटर बनाएंगे। अगर आप जैसी पत्रिकाओं का सहयोग मिलें तो उसके माध्यम से बहुत बड़ा संवेदना का, करुणा का, प्रेम का एक यज्ञ जागृत होगा।

केंद्र सरकार से बोर्ड को किस प्रकार सहयोग मिल रहा है?

हमारा बोर्ड अभी वन पर्यावरण विभाग के अंतर्गत आता है। हमने धन मुहैया कराने का अनुरोध किया है। अभी बड़ी कोई रकम आई नहीं है। अगर आएगी तो देश में 3215 पंजीकृत संस्थाओं के लिए लाभकारी होगा। अधिक संस्थाओं को भी भविष्य में हम जोड़ेंगे।

भविष्य में बोर्ड के मुख्य कार्य कौनसे होंगे?

सम्पूर्ण भारत के पशु कल्याण संगठनों को हमारे साथ जोड़ना है। हर गांव से एक सोसायटी केयरटेकर जोड़ना है। जन-जन के मन में करूणा और प्रेम जगाना है।

आप जीवदया से जुड़े हुए व्यक्तित्व हो, बोर्ड से जुड़कर आप कैसा अनुभव कर रहे हैं?

मैं 20 साल से यह काम कर रहा हूं। आज मुझे यही काम भारत सरकार की तरफ से अधिकृत रूप से करने का मौका मिला है। मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता हूं। गुरू की कृपा है कि मुझे यहे काम करने का मौका मिला है। में यह काम मैं पूरी ताकत से करूंगा और इसे अच्छे मुकाम तक ले जाऊंगा।

This Post Has 3 Comments

  1. Ravi Nath

    Bhaisahab pijara pol society gausala varsh 1903 se lagatar niswarha bhav se nirashrita gobanso v police dvara pakade bhais v bhaiso bakari v bakaro ki sewa karati chali aa rahi hai e santha bhi 1914-15 angrejo ke bakhat se rajistard hai lekin bhartiya jeev jantu kalyan bord ne ab tak n to koee rajistard kiya aur n hi society dvara bheja gaya rajistreson drafta rupaya hi vapas kiya aur n hi aaja tak koee jabab mila madad to door ki bat hai kahane aur karane me bada antar hota hai ham log jo kahate hai vahi karate hai gohatya rokane v gomans rokane me meri sarakari p.a.c.ki naukari chali gayi ab koee nahi puchha raha hai fir bhi swakarm ke tahata mile dayitwa sah jila samanvyak gosewa ka karaya aaja bhi bhalibhati lockdown me bhi roja kar raha hoo bas eeswar hee madada karege

  2. Ravi Nath

    Bhaisahab yah karya mai niswarthabhav se varsh 1985-86 se lagatar apane viddyarthi jeevan kashi bidyapeetha varanashi se gokashi rokane pakadane v nirashrita gobanso ki sewabhav me laga huaa hoo vartaman samay me mai janapad sitapur u.p. me niswartha bhav se karya kar raha hoo lekin bade dukha ke satha kahana pad raha hai ki jo society saikado varsho se ees punita karyo me hamlogo ka nirantar sahayog kar rahi hai unaka rajistreson hajaro rupaye ka drafta lekar bhi nahi kiye hai aur aaja tak koee madad ya jabab bhi dena uchita nahi samajha jaise sitapur pijara pol society u.p. ne bheja tha khair aage yadi kisi sahayog ki ya sewa ki aawasyakata pade to mujha anubhavi ko awasya jile ki sewa ka mauka pradan karane ka kasta kariyega 100% ashali sewa mo.no.9125531700 jay gomata jay gopal

  3. Mr Rahul Mehta

    आदरणीय भाईसाहब हम मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले के ग्राम झौंकर से निवेदन है की हमारे ग्राम में श्री गोपाल गौशाला 1997 से संचालित है व वह भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड चेन्नई से पंजीकृत है पर आदरणीय 2016 से गौ माताओं का जो भरन पोषण के लिए अनुदान मिलता था वह नहीं मिल पा रहा है इस कारण हमें गौ माताओं के भरन पोषण में बहुत कठिनाई आ रही है तो आप अनुदान के लिए कोई सुझाव देवे
    धन्यवाद्

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