| अमेरिका के जिन 7 सांसदों ने जेल में बंद कुख्यात दंगाई उमर खालिद, जिसने दिल्ली दंगों की पूरी पटकथा लिखी थी, जिसमें 27 लोग मारे गए थे, जिसमें आईबी अधिकारी अंकित कुमार शर्मा की भी हत्या हुई थी, जिसका सीसीटीवी फुटेज भी है. उस दंगाई और आतंकी उमर खालिद की रिहाई के लिए चिट्ठी लिखी है, |
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद JNU के पूर्व छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है.
न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी की ओर से, उमर खालिद जो दिल्ली में हुए दंगे के साजिश में देशद्रोही केस में जेल में बंद है, के समर्थन में पत्र लिखे जाने के बाद अब अमेरिका के आठ सांसदों ने भारतीय सरकार से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार खालिद को निष्पक्ष ट्रायल दिलाने की अपील की है. यह पत्र अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा को भेजा गया है,
देख लो इनकी ताकत यह लोग कुछ भी बन जाए इनके लिये अपना धर्म और अपने लोग पहले है. हमारे हिंदुओं में अगर कोई मोहल्ले का नेता भी बन जाए वो उसी समय सैकुलर बनने का ढोंग करने लग जाता है.
राहुल गांधी: विपक्षी नेता है या विदेशी एजेंट?
अमेरिका के जिन 7 सांसदों ने जेल में बंद कुख्यात दंगाई उमर खालिद, जिसने दिल्ली दंगों की पूरी पटकथा लिखी थी, जिसमें 27 लोग मारे गए थे, जिसमें आईबी अधिकारी अंकित कुमार शर्मा की भी हत्या हुई थी, जिसका सीसीटीवी फुटेज भी है. उस दंगाई और आतंकी उमर खालिद की रिहाई के लिए चिट्ठी लिखी है,
उसमें से चार सांसदों के फोटो राहुल गांधी के साथ आ चुके हैं. हालांकि राहुल गांधी इन सभी सांसदों से मिलते होंगे, लेकिन फोटो सिर्फ चार के साथ आई है. अब आप समझ गए होंगे कि राहुल गांधी विदेश में जाकर किस तरह से भारत विरोध का और कट्टर इस्लामी जिहाद का एजेंडा चलाते हैं.

यह वही राहुल गांधी है जिनकी सरकार ने हिंदुओं को आतंकवादी साबित करने के लिए साध्वी प्रज्ञा, स्वामी सीमानंद, कर्नल पुरोहित, लेफ्टिनेंट उपाध्याय सहित 12 आईपीएस अधिकारियों दिनेश एम एन राजकुमार, पांडियन डीजी बंजारा, अभय चुडस्मा, शरद सिंगल को दशकों तक जेल में सड़ाया ताकि दुनिया को यह बताया जा सके कि हिंदू आतंकवादी होते हैं. यहां तक कि उस वक्त महाराष्ट्र एटीएस के निदेशक रहे आईपीएस अधिकारी जैन साहब ने भी कहा कि मेरे ऊपर निर्दोषों को फंसाने का दबाव है. इतना ही नहीं इस मामले के जांच अधिकारी रहे जो खुद एक मुस्लिम पुलिस इंस्पेक्टर थे उन्होंने अदालत में पत्र लिखकर कहा कि मेरे ऊपर निर्दोष हिंदुओं को फसाने का दबाव है.

लेकिन मनमोहन सरकार जी जान लगा दी थी कि किसी तरह दुनिया को यह बताया जा सके कि हिंदू आतंकवादी होते हैं. लेकिन राहुल गांधी मुस्लिम दंगाइयों के लिए कितना चिंतित रहते हैं कि विदेशों में जाकर उनके लिए लॉबिंग करते हैं. इनमें इल्हान उमर, प्रमिला जयपाल, रशीदा तलबी, जॉन शकाओस्की से राहुल गांधी की मीटिंग की तस्वीर आ चुकी है. और इन सांसदों ने यह पत्र राहुल गांधी के इशारे पर ही लिखा होगा वरना इन सांसदों का भारत से क्या लेना देना. राहुल गाँधी के बयानों पर उठ रहे सवाल

राहुल गांधी ने पिछले दिनों फिर एक ऐसा बयान दे दिया है जिससे भारत की संप्रभुता पर सवाल उठने लगे हैं. इस बार उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर अडानी मामले को हथियार बनाकर मोदी सरकार पर दबाव डालने की सलाह दी है. आपको बता दें कि इससे पहले भी इज़रायली खुफिया एजेंसी मोसाद की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि राहुल गांधी, हिंडनबर्ग और सैम पित्रोदा के बीच अडानी को बदनाम करने की गुप्त साजिश रची गई थी. इतना ही नहीं, राहुल की अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने चुपचाप व्हाइट हाउस अधिकारियों से मुलाकात की, जो राजनयिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन था. क्या राहुल गांधी विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं या फिर विदेशी एजेंडे का हिस्सा बन चुके हैं?
सवाल गंभीर है क्योंकि देशहित से समझौता किसी भी सूरत में माफ नहीं किया जा सकता.
राहुल गांधी जर्मनी में जॉर्ज सोरोस की संस्था के द्वारा प्रायोजित यात्रा में है,
हर वक्त उनके साथ जॉर्ज सोरोस के लोग मौजूद थे.
बंद कमरे में भी कई मीटिंग हुई
और अब राहुल गांधी भारत में क्या चाहते हैं आप उनके मुंह से सुनिए-
सबको पता है बांग्लादेश में जो कुछ हुआ वह अमेरिका की डीप स्टेट और जॉर्ज सोरोस की संस्था का ही काम था, इसीलिए आपने देखा होगा बांग्लादेश में अमेरिका ने एंबेसी ने दंगाई उस्मान शरीफ हादी के मौत पर दो बार श्रद्धांजलि दिया, लेकिन हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मौत पर कुछ भी नहीं कहा,
जबकि ढाका स्थित रूसी दूतावास के राजदूत ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि दीपू चंद्र दास की हत्या बहुत जघन्य हत्या है और बांग्लादेश को भारत के साथ संबंध अच्छे करने होंगे.
बांग्लादेश को समझना होगा कि वह तीन तरफ से भारत से घिरा है तो वह भारत के बगैर सर्वाइव नहीं कर सकता यानी यह सब साफ है कि अमेरिका की डीप स्टेट की प्लानिंग बांग्लादेश में रही. अब वही बांग्लादेशी मॉडल भारत में राहुल गांधी लाना चाह रहे हैं. उनके मुंह से निकल गया कि भारतीय एक दूसरे से लड़ेंगे, एक दूसरे को काटेंगे, दूसरे को बर्बाद करेंगे, सड़कों पर खूब तमाशा करेंगे. कांग्रेस पार्टी ने 1947 में यही किया और दुनिया का सबसे बड़ा इंसानी विस्थापन 1947 में हुआ. और दुनिया का सबसे बड़ा सामूहिक कत्लेआम 1947 में हुआ, करीब 20 लाख लोग एक झटके में मार दिए गए और करीब 2 करोड़ लोग या तो इधर से उधर गए या उधर से इधर आए.और हंसते हुए जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, चेहरे पर कोई दुख नहीं था, कोई गम नहीं था, कोई शिकन नहीं था. फिर जब 1984 में सत्ता पर पकड़ कमजोर हुई तब सिखों का कत्लेआम कर दिए और दो दिनों में 8000 सिख मार दिए गए, उसके बाद बंपर बहुमत से सरकार बना लिए, हंसते हुए शपथ लिए और राजीव गांधी ने बोल दिया- अरे भाई यह तो छोटी-मोटी बात है जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है.
और राहुल गांधी के मुख्य सलाहकार सैम पित्रोदा ने सिखों के कत्लेआम के सवाल पर कह दिए- क्या हुआ… हुआ तो हुआ.
तो अब राहुल गांधी बहुत अराजक और खतरनाक व्यक्ति बन चुके हैं, इनकी मंशा भारत में बांग्लादेश की तरह कत्लेआम करवाने की हो चुकी है और अगर राहुल गांधी यह सोच रहे हैं कि उनके इन सब बयानों से भारतीय उनको वोट देंगे तो यह राहुल गांधी की भूल है.

