| भारतीय पंचांग की भविष्यवाणी देश-दुनिया के लिए बहुत ही सटीक बैठती आई है, इसलिए वर्ष 2026 में राज्य-प्रदेश की स्थिति कैसी रहेगी, ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव कितना हानि-लाभ पहुंचाएगा, इसके बारे में इस आलेख में भविष्य दर्शन कराया गया है। |
भारतीय ज्योतिष परम्परा में वर्ष केवल पंचांग की तिथि नहीं होता, वह कालपुरुष के शरीर में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों का संकेतक होता है। वर्ष 2026 ऐसा ही एक संवेदनशील संधिकाल प्रतीत होता है, जब विश्व की राजनीति, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और प्रकृति-सभी एक साथ पुनर्संतुलन की ओर बढ़ती दिखती हैं। इस समय को समझने के लिए अटल घोषणाओं के स्थान पर सम्भाव्यता, प्रवृत्ति और कालगत संकेत की भाषा अधिक उपयुक्त है, क्योंकि ज्योतिष स्वयं को नियति का उद्घोषक नहीं, काल-प्रवृत्तियों का द्रष्टा मानता है।
वर्ष 2026 में शनि का मीन राशि में प्रभाव, गुरु की कर्म-क्षेत्र पर दृष्टि और राहु-केतु का कुम्भ-सिंह अक्ष पर संचार-यह त्रिग्रही विन्यास विश्व-व्यवस्था में परिवर्तन का सूचक है। वर्षफल की दृष्टि से यह काल न तो उग्र विनाश का है और न ही अतिउत्साह का। यह संयम, पुनर्गठन और दीर्घ दृष्टि की मांग करता है। अष्टकवर्गीय संकेत बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ेगा, पर अनेक स्थानों पर संतुलन बनाने के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
विश्व राजनीति में एकध्रुवीयता की पकड़ शिथिल होती प्रतीत होती है। शनि का प्रभाव संस्थाओं की परीक्षा लेता है और राहु भ्रम व ध्रुवीकरण को उभारता है, जबकि गुरु समाधान की सम्भावनाएं खोलता है। अमेरिका की आंतरिक स्थिति इसी त्रिकोण के प्रभाव में दिखाई देती है।
वहां चतुर्थ और अष्टम भावों पर दबाव यह संकेत देता है कि 2026 सत्ता-केंद्रित नहीं, प्रणाली-केंद्रित विमर्श का वर्ष हो सकता है। ट्रम्प जैसे व्यक्तित्व-केंद्रित नेतृत्व के लिए यह समय संघर्षपूर्ण अवश्य है, पर निर्णायक भी-जहां प्रत्यक्ष टकराव की तुलना में रणनीतिक संयम और आंतरिक पुनर्संरचना अधिक महत्व पाएगी। विदेश नीति में तीव्रता के स्थान पर अप्रत्यक्ष दबाव और गठबंधन-प्रबंधन की प्रवृत्ति उभरती दिखती है।
यूक्रेन-रूस संघर्ष पर दृष्टि डालें तो, मंगल-शनि का दीर्घ प्रभाव युद्ध को खींचता है, किंतु गुरु की दृष्टि समाधान की राह बनाती है। 2026 में युद्ध की तीव्रता के घटने, कूटनीतिक संवाद के बढ़ने और किसी फ्रोजन कन्फ्लिक्ट जैसी स्थिति की सम्भावना अधिक दिखाई देती है। पूर्ण विजय की अपेक्षा स्थिरता की खोज इस काल की विशेषता होगी। इसी प्रकार चीन-ताइवान संदर्भ में राहु का प्रभाव प्रत्यक्ष युद्ध से अधिक मनोवैज्ञानिक दबाव, तकनीकी घेराबंदी और शक्ति-प्रदर्शन की ओर संकेत करता है। युद्ध का वातावरण बना रह सकता है, पर पूर्ण युद्ध की सम्भावना सीमित दिखती है।
यूरोप के लिए यह वर्ष शनि के अनुशासन का है। ऊर्जा, आव्रजन और सामाजिक सुरक्षा-इन तीनों पर पुनर्विचार की आवश्यकता स्पष्ट होती जाती है। आर्थिक वृद्धि धीमी रह सकती है, पर दीर्घकालिक स्थिरता की नींव रखने के प्रयास तेज होंगे। अष्टकवर्गीय संकेत बताते हैं कि कठिन निर्णयों के माध्यम से ही संतुलन सम्भव होगा।
भारत की राष्ट्रीय कुंडली पर गुरु-शनि का संतुलित प्रभाव 2026 को आधार सुदृढ़ करने का वर्ष बनाता है। यहां यह समझना आवश्यक है कि 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य केवल अंकगणित नहीं, बल्कि संरचनात्मक क्षमता का प्रश्न है। दशम और एकादश भावों में अनुकूल बिंदु यह संकेत देते हैं कि भारत विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं, अवसंरचना और मानव-पूंजी में निवेश के माध्यम से विश्व की विश्वसनीय अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ेगा। तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा सशक्त होती जाएगी, यद्यपि यह यात्रा धैर्य और अनुशासन की मांग करेगी। दशा-परिवर्तन के संकेत बताते हैं कि नीति-निरंतरता और संस्थागत सुधार निर्णायक सिद्ध होंगे।
बंगाल की राजनीति चंद्र-राहु प्रभाव के कारण भावनात्मक और पहचान केंद्रित रहती आई है। 2026 में भी यही प्रवृत्ति दिखाई देती है, जहां सुरक्षा, पहचान और सामाजिक संतुलन प्रमुख विषय बनते हैं। परिणामों में संक्रमणकालीन संकेत अधिक और निर्णायकता कम रह सकती है, जिससे केंद्र-राज्य संतुलन पर पुनर्विचार की प्रक्रिया तेज होगी।
प्राकृतिक घटनाओं के संदर्भ में शनि-केतु का प्रभाव कुछ क्षेत्रों में भूकम्पीय गतिविधियों और मानसूनी असंतुलन के संकेत देता है। बाढ़ की संभावनाएं कुछ भूभागों में उभर सकती हैं, पर यह महाविनाश का काल नहीं, चेतावनी का समय है-जहां आपदा-प्रबंधन, तैयारी और वैज्ञानिक दृष्टि की भूमिका निर्णायक होगी। वर्षफल यही कहता है कि सजगता से जोखिम न्यून किए जा सकते हैं।
संस्कृति और सिनेमा भी कालपुरुष के पंचम भाव से प्रभावित होते हैं। 2026 में बॉलीवुड में विषयवस्तु का पुनर्संयोजन दिखता है, जहां राष्ट्र, इतिहास, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संघर्षों पर केंद्रित कथानक अधिक स्थान पाएंगे। स्टार-सिस्टम की तुलना में कंटेंट-सिस्टम का प्रभाव बढ़ेगा और प्रयोगधर्मिता को प्रोत्साहन मिलेगा। दक्षिण भारतीय सिनेमा अपनी तकनीकी उत्कृष्टता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास के साथ अखिल भारतीय प्रभाव को और सुदृढ़ करता दिखेगा। पौराणिक, ऐतिहासिक और लोक-कथात्मक विषयों की प्रस्तुति वैश्विक दर्शक तक पहुंचेगी।
समग्रतः वर्ष 2026 को भय या अतिउत्साह के चश्मे से देखने की बजाय विवेक और संतुलन की दृष्टि से समझना अधिक समीचीन है। ज्योतिषीय संकेत बताते हैं कि यह समय टकराव से अधिक परिवर्तन, विनाश से अधिक पुनर्गठन और अधीरता से अधिक धैर्य की मांग करता है। भारतीय परम्परा का यह सूत्र यहां स्मरणीय है कि काल संकेत देता है, दिशा मनुष्य तय करता है।
-प्रो. अलकेश चतुर्वेदी

