हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
USA WAR

अमेरिका: पूरी दुनिया से दुश्मनी क्यों ?

पूरी दुनिया को अपना दुश्मन क्यों बना रहा अमेरिका ?

by हिंदी विवेक
in ट्रेंडींग, देश-विदेश
0

वास्तव में यह नया वर्ष देश व दुनिया को हर्ष की बजाय अशान्ति, अराजकता, अपराध, अन्याय, अनिश्चितता, अवनति अवमान्य, असहज और अहंकार से भरे अमेरिकी तेवर दिखा रहा है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बेनेजुएला पर हमला करके वहाँ के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सहित उनके निजी निवास से उठवा लिया और अपनी दबंगई दिखाते हुए कहा, ‘‘हमें इसे पुन: करना होगा, हम पुन: इसे कर सकते हैं और हमें कोई रोक नहीं सकता है।’’

आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की यह ट्रम्प चाल न केवल उनके पतन के साथ शुरू होगी, बल्कि अमेरिकी की बनी बनायी शाख को वह आघात पहुंचेगा जिसने उसकी परिकल्पना भी नही की होगी। जिस तरह से डोनाल्ड द्रम्प ने अंतर्राष्ट्रीय नियमों एवं कानूनों की अवहेलना की है, इसकी उनको समय पर भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। साम्राज्यवादी व्यवस्था का प्रतिरोध जब शुरु होगा तो महाशक्तियों की मनमानी का न केवल अन्त होगा, बल्कि सदियों पुराना इतिहास दोहराया जायेगा।
हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जिस प्रकार से बड़े अहम भरे अन्दाज में कहा कि वेनेजुएला अमेरिका को पांच करोड़ बैरल तेल देगा और उसकी बिक्री वह स्वयं करेगा, वास्तव में उसकी दादागिरी, दबंगयी का दम्भभरा शर्मनाक उदाहरण है।

कैंजा करने की घटिया एवं घिनौनी कार्यवाही के बाद उसके घातक और अराजकता-पूर्ण इरादे भी अब जग जाहिर हो गये हैं। कितना हास्यास्पद लगता है, ट्रम्प का यह आरोप कि वेनेजुएला पर हमला करने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ा कि वहाँ से अमेरिका में मादक पदार्थों की अनवरत तस्करी हो रही थी, इसके साथ ही निकोलस मादुरो की दमनकारी नीतियों के कारण वेनेजुएला के लोग अवैध रूप से अमेरिका में भागकर आ रहे थे। वास्तव में उसके ‘कहीं है निगाहें और कही पर है निशाना’ के इरादे स्पष्ट नजर आते हैं।

वेनेजुएला में आश्चर्यचकित करने वाले बड़े सैन्य अभियान से बेहद उत्साहित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मैक्सिको, कोलम्बिया, प्रयामा, क्यूबा, ईरान, डेनमार्क और ग्रीन लैण्ड को लेकर भी अपने घातक इरादे भी उजागर कर दिये।

इसके साथ ही अपने तेज तर्रार व तीखे तेवर से इन देशों को धमकी भी दे दी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कोलम्बिया, मैक्सिको और क्यूबा बढ़ती हुई ड्रग्स तस्करी और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण हमारे लिए एक खतरा बनते जा रहे हैं।

Behind Trump's push to acquire Greenland — as urgent meeting sought | SBS  News

अगर इन देशों ने अपने व्यवहार में समय रहते बदलाव नही किया तो हम अब कार्यवाही के लिए तैयार हैं। सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील क्षेत्र ग्रीनलैण्ड को लेकर भी अपना दावा दोहराया। इसके साथ ही उन्होने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ‘‘मुमरो सिद्धान्त’’ जिसका स्पष्ट नारा था ‘‘अमेरिका अमेरिकियो के लिए’’ और यह कहता था कि ‘‘यूरोप अमेरिका में अब और हस्तक्षेप न करे।’’ मुनरो सिद्धान्त संयुक्त राज्य अमेरिका की एक प्रमुख विदेश नीति है जो 1923 में राष्ट्रपति जेम्स मुनरो द्वारा यूरोपीय उपनिवेशवाद के विरुद्ध पश्चिमी गोलार्ध (अमेरिका) में शुरू की गई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की निगाहें ग्रीनलैण्ड में एक लम्बे समय से लगी हुई है, इसीलिए बार-बार कह रहे हैं कि ग्रीनलैण्ड की जरूरत है और इसको लेकर रहेगे। यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यन्त आवश्यक है।

आर्कटिक क्षेत्र में रूस तथा चीन की उपस्थिति बढ़ रही है। यह रणनीतिक मामला है। ग्रीनलैण्ड हर जगह रुसी तथा चीनी जलयानों से घिरा हुआ है और डेनमार्क सुरक्षा करने में सक्षम नहीं होगा।

ग्रीनलैण्ड का सामरिक महत्व इसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है (उत्तरी अमेरिका और यूरोप के मध्य), आर्कटिक में निगरानी क्षमता (जैसे पिटुफिक स्पेस बेस), नये समुद्री मार्गों पर नियन्त्रण व निगरानी तथा दुर्लभ खनिज संसाधनों की मौजूदगी के कारण है जिससे यह अमेरिका और नाटो देशों के लिए रूस व चीन जैसे प्रतिद्वन्द्वियों के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण चौकी बन जाता है। यह अमेरिका और रूस (मास्को) के बीच लगभग समान दूरी पर है, जो इसे शीतयुद्ध के दौरान और भी एक महत्वपूर्ण अग्रिम चौकी बनाता है।

ग्रीनलैण्ड अमेरिका का सबसे उत्तरी अड्डा है और प्रक्षेपास्त्र चेतावनी, प्रक्षेपास्त्र रक्षा तथा अन्तरिक्ष निगरानी हेतु बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे रूस अथवा चीन से आने वाले प्रक्षेपास्त्रो (मिसाइलों) को ट्रैक किया जा सकता है।

ग्रीनलैण्ड उस क्षेत्र (ग्रीनलैण्ड- आइसलैण्ड-यूनाइटेड किंगडम गैप) की निगरानी में सक्रिय सहयोग प्रदान करता है। जहाँ से नाटो (नार्थ एटलान्टिक ट्रिटी आर्गेनाइजेशन) रुसी सैनिक की गतिविधियों पर नजर रखता है। इसके अलावा ग्रीनलैण्ड की भौगोलिक स्थिति यूरोप एवं एशिया के बीच अमेरिका को विशेष प्रतिष्ठा प्रदान करती है।

ग्रीन लैण्ड का लगभग 80: भाग बर्फ से ढका हुआ है, जिसका अर्थ है कि अधिकांष लोग राजधानी नुउक के आस-पास दक्षिणी पश्चिमी तट पर रहते हैं। अमेरिका यहीं के दुर्लभ प्रतिक संसाधन जैसे- खनिज, यूरेनियम और लौह अयस्क खनन अपनी कातिर व शातिर निगाहें लगाये हुए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसमें तेल और गैस के महत्वपूर्ण भण्डार भी हो सकते हैं। ट्रम्प की चाल व नजरें मूल्यवान खनिज संसाधनों पर टिकी हैं।

निर्विवाद रूप से सत्य है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जो अपनी कूटनीतिक व राजनीतिक पैंतरेबाजी अपना रहे हैं, जिसके कारण अब अन्तर्राष्ट्रीय व्यवहार के नियमों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। वास्तव में ट्रम्प की वेनेजुएला में की गई कार्यवाही दुनिया भर की सत्तावादी शक्तियों के लिए एक घातक मिशाल कायम कर सकती है। उनकी अराजकता व अडियल रवैया विश्व व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है।

ट्रम्प अपनी दबंगयी दिखाकर दुनिया में दादागीरी, दबंगयी व दबाव की दहशत पैदा करके अन्य देशों को दबाने के लिए उकसाने का काम कर रहे है। उनके इस मनमाने व्यवहार के कारण दुनिया/विनाश की ओर तेजी से बढ़ने को मजबूर हो जायेगी। ट्रम्प से सतत, सतर्क व सजग रहने की जरूरत है।
दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। ट्रम्प के इस व्यवहार तथा कार्यवाही के फलस्वरूप नियम आधारित ट्रान्स अटलान्टिक व्यवस्था में आखिरकार बची-खुची आस्था एवं आशा भी पूर्ण रूप से तिरोहित हो गयी है।

ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका ने वैश्विक मंच पर एक बड़ा और विवादास्पद निर्णय ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा एक प्रेसिडेन्यिल मेमोरंडम पर हस्ताक्षर करके अब अमेरिका को 66 अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का आदेश पारित कर दिया गया है। इसके तहत ट्रम्प प्रशासन द्वारा 35 गैर संयुक्त राष्ट्र संगठन और 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं को शामिल किया है जो अमेरिकी राष्ट्रीय हितो, सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि या सम्प्रभुता के विपरीत मानी गयी। इनमें सबसे उल्लेखनीय एवं महत्वपूर्ण संस्था संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेशन (यूएमएफसीसीसी) है, जो सभी प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय जलवायु समझौतों का आधार बनने वाली मूल सन्धि है।

इस सन्धि का जून 1992 में रियो अर्थ समिट में अपनाया गया था और उसी वर्ष जार्ज एच डब्लू बुश के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अमेरिकी सीनेट द्वारा इसे मंजूरी दी गयी थी। ट्रम्प की अस्थिर सोच का ही प्रमाण है कि जरा-जरा सी बात पर तुनक मिजाज दिखाकर जरा (बुढापा) का प्रत्यक्ष प्रभाव न केवल उन्हें स्वयं को, अमेरिका को और विश्व व्यवस्था को पूरी तरह तहस-नहस कर देगा। उनके द्वारा पैदा किया तनाव एक के बाद एक शान्त नहीं हो पाता है। वेनेजुएला पर हमला ग्रीनलैण्ड की धमकी और अब अमेरिका ने रूसी झण्डा लगे तेल टैंकर को जब्त कर लिया।

अमेरिका की अराजकतापूर्ण अनवरत कार्यवाहियों के कारण ही वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियायें सामने आयी है। रूस, चीन, पश्चिमी देश सहित अनेक राष्ट्रों ने ट्रम्प की गतिविधियों पर न केवल नाराजगी व्यक्त की है, बल्कि वे भी सतर्क व सजग होकर सशक्त कार्यवाही करने को मजबूर हो रहे हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार यूरोपीय राष्ट्र भी मुखर होकर आवाज उठाने को बाध्य है। अमेरिकी आक्रामक नीतियों के बीच ट्रम्प का यह कहना कि उन्हें अब अन्तर्राष्ट्रीय कानून एवं नियम को आवश्यकता नहीं है। यह स्पष्ट इशारा है कि दुनिया एक बार पुन: ‘साम्राज्यवाद के युग’ में प्रवेश करने जा रही है।
ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि वह वेनेजुएला की अन्तरिम सरकार को नीति निर्देशित करेगा और अमेरिकी मांगो की अवहेलना किये जाने पर सैनिक कार्यवाही की ‘दूसरी लहर’ की बार-बार धमकी भी दी है।

Trump doubles down on acquiring Greenland for 'world peace' amid Vance  visit | Fox News

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने विगत दिन अपने सैन्य व्यय में आधे से अधिक वृद्धि का प्रस्ताव रखा और सोशल मीडिया पर कहा कि रक्षा बजट 2027 तक बढकर 1.5 ट्रिलियन डालर हो जाना चाहिए।

ट्रम्प ने देश के सबसे बड़े सैन्य ठेकेदारों में से एक, रेथियॉन को भी धमकी दी और कहा कि वह रक्षा उद्योग में कार्यकारी अधिकारियों के वेतन में कटौती करेगें।
यह सच है कि ट्रम्प के ‘मुनरो सिद्धान्त’ की आक्रामक महत्वाकाक्षायें विश्व व्यवस्था के लिए घातक संकेत है। इसका मूल उद्देश्य अमेरिका का सैन्य व राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करना, वेनेजुएला, क्यूबा व कोलम्बिया जैसे देशों की सरकारों पर दबाव रखना तथा अमेरिकी हितो के विरुद्ध जाने वाले शासन को हटाने की धमकी देना है।

मुनरो सिद्धान्त (2026) ट्रम्प की विदेश नीति का आक्रामक संस्करण है, जो अमेरिका को पश्चिमी गोलार्ध में ‘‘सर्वोच्च शक्ति’ घोषित करना है। यह नीति अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विवादित है क्योंकि इसे साम्राज्यवादी द़ृष्टिकोण माना जा रहा है। अमेरिकी की इस नीति का प्रभाव भारत की विदेश नीति व उर्जा सुरक्षा पर भी पड़ेगा, क्योंकि भारत वेनेजुएला तथा लैटिन अमेरिकी देशों से तेल आयात करता है।

डोनाल्ड ट्रम्प की हाल की नीतियों एवं नियम ने वैश्विक व्यवस्था को एक गंभीर संकट में डाल दिया है- विशेष रूप से सैनिक कार्यवाही, धमकी भरी घोषणाओं और विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को अलग करने से। इसके कारण ही बहुपक्षीय सहयोग भी संकट के दौर से गुजर रहे हैं।
टैरिफ बढ़ाकर व्यापार युद्ध बढ़ाना, यूरोप की सभ्यता विनाश की चेतावनी, अटलांटिक महासागर में रूसी झण्डा लगे तेल टैंक पर अधिकार जमाना, ग्रीनलैण्ड पर अधिकार की चेतावनी ने एक बार दुनिया के देशों को हैरत में डाल दिया है। इसके साथ ही बहुपक्षीय संस्थाओं को कमजोर किया, शक्ति आधारित राजनीति को मान्यता दी तथा आर्थिक व रणनीतिक दबाव को सामान्य बनाया।

पेरिस जलवायु समझौते व ईरान परमाणु डील से हटना, डब्ल्यूटीओ तथा डब्ल्युएचओ संस्थाओं पर दबाव से नियम आधारित विश्व व्यवस्था कमजोर हुई है, जिससे साम्राज्यवाद पोषित होगा। इसे अमेरिकी प्रभुत्व का इसे टिपिंग पॉइंट कहा जाता है, क्योंकि ट्रम्प ने दुनिया को दबंगई, दादागिरी व दबाव दिखाकर, अमेरिका की अपनी ही बनायी वैश्विक व्यवस्था को भंग कर दिया है।
– डॉ. सुरेन्द्र कुमार मिश्र

Share this:

  • Click to share on X (Opens in new window) X
  • Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Click to share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
Tags: #USAGreenLand #SustainableUSA #LandConservation #EcoFriendlyAmerica #GreenSpaces #ProtectOurLand #SustainableDevelopment #ClimateActionUSA #NaturePreservation #GreenFuture

हिंदी विवेक

Next Post
सबसे आगे होंगे हिंदी-स्तानी

सबसे आगे होंगे हिंदी-स्तानी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0