| संसद में संवाद से समाधान खोजा जाना चाहिए, किंतु कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जिस तरह से सड़क पर घमासान करने की धमकी दी तथा सत्र सुचारू रूप से चलने नहीं दिया, उससे स्पष्ट होता है कि वे नेपाल-बांग्लादेश की तरह देश में भी अराजकता, हिंसा, दंगा कराना चाहते हैं। |
संसद का शीतकालीन सत्र दिसम्बर 2025, भारतीय लोकतंत्र की जीवंतता का साक्षी बना। एक ओर सरकार ने आर्थिक सुधार, सामाजिक सुरक्षा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रामीण रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत कर देश के समग्र विकास की दिशा स्पष्ट की। वहीं दूसरी ओर विपक्ष का निरंतर हंगामा, अवरोध और सड़क पर उतरने की धमकी लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर गम्भीर प्रश्नचिह्न छोड़ गया। विशेष रूप से ग्रामीण रोजगार से जुड़े ‘वीबी-जी राम जी’ विधेयक को लेकर उत्पन्न विवाद ने संसद बनाम सड़क की राजनीति को पुनः उजागर कर दिया।
शीतकालीन सत्र 2025: एक समग्र परिदृश्य
सत्र का केंद्रीय उद्देश्य विकास, सुरक्षा और सुशासन रहा। सरकार ने कई संशोधनात्मक एवं संरचनात्मक विधेयकों के माध्यम से नीति निरंतरता बनाए रखने का प्रयास किया। विपक्ष ने इन विधेयकों को लेकर सरकार की मंशा पर प्रश्न उठाए, किंतु विरोध का स्वर प्रायः संवाद के स्थान पर अवरोध में परिवर्तित हो गया। परिणामस्वरूप संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हुईं।
शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत प्रमुख विधेयक
इस सत्र में प्रस्तुत एवं पारित विधेयक निम्नलिखित हैं।
- मणिपुर माल एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025
- पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कर-प्रणाली में सुधार।
- केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 राजस्व संग्रह को सुदृढ़ करने और कर प्रशासन में पारदर्शिता।
- स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 स्वास्थ्य अवसंरचना को राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ने का प्रयास।
- विनियोग (संख्यांक 4) विधेयक, 2025 सरकार के वित्तीय व्यय को संवैधानिक स्वीकृति।
- निरसन और संशोधन विधेयक, 2025 अप्रासंगिक कानूनों की समाप्ति और विधिक प्रणाली का सरलीकरण।
- सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधि संशोधन) विधेयक, 2025 सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार और बीमा समावेशन।
- भारत के रूपांतरण हेतु नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन एवं अभिवर्धन विधेयक, 2025 स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जलवायु दायित्वों की पूर्ति।
- ‘वीबी-जी राम जी’ विधेयक: ग्रामीण रोजगार की नई दिशा
इस सत्र का सबसे चर्चित और विवादित विधेयक ‘वीबी-जी राम जी’ रहा, जिसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं के लिए स्थाई और कौशल-आधारित रोजगार है।
ग्राम-आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त करना
पलायन को रोककर स्थानीय विकास को बढ़ावा देना
सरकार के अनुसार यह विधेयक केवल रोजगार योजना नहीं बल्कि ग्रामीण भारत के रूपांतरण का खाका है।
सरकार का पक्ष: विकास और आत्मनिर्भरता
सरकार ने इसे अंत्योदय और आत्मनिर्भर भारत की भावना से प्रेरित बताया। यह विधेयक वर्तमान योजनाओं की कमियों को दूर कर परिणामोन्मुखी रोजगार पर केंद्रित है।
- ग्रामीण संसाधनों, स्थानीय उद्योगों और कौशल विकास को एकीकृत करने की दृष्टि।
- सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण युवाओं को सम्मानजनक आजीविका मिलेगी।
विपक्ष का नकारात्मक हो-हल्ला और धमकीपूर्ण भाषा
दुर्भाग्यवश इस विधेयक पर विपक्ष का विरोध लोकतांत्रिक चर्चा की सीमाओं को लांघता दिखाई दिया।
- सदन में लगातार नारेबाजी और वेल में उतरना
- सरकार पर ग्रामीण अधिकार छीनने जैसे आरोप
कुछ नेताओं द्वारा सड़क पर देख लेने जैसी असंसदीय और धमकीपूर्ण भाषा व विधेयक वापसी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी। यह रवैया न केवल संसदीय मर्यादाओं के विरुद्ध है बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर इसके नकारात्मक प्रभाव
संसद जैसे सर्वोच्च मंच की गरिमा और विश्वसनीयता प्रभावित होती है। नीति आधारित विमर्श के स्थान पर उत्तेजना और टकराव हावी हो जाता है। जनता में यह संदेश जाता है कि संसद समाधान का नहीं, संघर्ष का मंच है। सड़क की राजनीति को बढ़ावा मिलना लोकतंत्र को कमजोर करता है। असहमति और अराजकता के बीच की रेखा धुंधली होती जाती है।
विपक्ष की भूमिका: अधिकार के साथ उत्तरदायित्व विरोध करना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है, किंतु धमकी, अवरोध और चर्चा से पलायन लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व के विपरीत है। अपेक्षा यह है कि विपक्ष वैकल्पिक नीति, संशोधन और ठोस सुझाव प्रस्तुत करे। केवल नकारात्मक राजनीति से न ग्रामीण हित सधते हैं, न लोकतंत्र मजबूत होता है।
सरकार और विपक्ष: संतुलन की अनिवार्यता
- सरकार को बहुमत के साथ संवाद और समावेशन का मार्ग अपनाना चाहिए।
- विपक्ष को विरोध को संवैधानिक मर्यादाओं में रखना चाहिए।
- संसद को अवरोध नहीं, राष्ट्रनिर्माण के विमर्श का केंद्र बनाना समय की मांग है।
संसद का शीतकालीन सत्र, दिसम्बर 2025 यह स्पष्ट करता है कि भारतीय लोकतंत्र में चुनौती कानून बनाने की नहीं बल्कि संवाद की संस्कृति बनाए रखने की है। ‘वीबी-जी राम जी’ विधेयक सहित प्रस्तुत कानून ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हित की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, किंतु विपक्ष का नकारात्मक हंगामा और सड़क की धमकी लोकतांत्रिक परम्पराओं के लिए चिंताजनक संकेत है। लोकतंत्र की मजबूती सरकार के साथ-साथ जिम्मेदार और रचनात्मक विपक्ष पर भी निर्भर करती है। संसद को संघर्ष नहीं, समाधान का मंच बनाना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।
– उदयभान सिंह

