| बजट ऐसा चाहिए- जो सर्वसमावेशी होने के साथ विकास व संवेदनशीलता, गति एवं संतुलन, आकांक्षा और अनुशासन इन सभी के बीच सामंजस्य स्थापित करे। यह बजट केवल आज की आवश्यकताओं को नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अपेक्षाओं को भी सम्बोधित करें। |
भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के साथ-साथ भारत ने विकसित भारत 2047 का स्पष्ट संकल्प लिया है। यह संकल्प केवल आय के आंकड़ों, राजकोषीय घाटे या निवेश प्रवाह तक सीमित नहीं है बल्कि इसका वास्तविक अर्थ है हर नागरिक के जीवन में गुणात्मक सुधार, खुशहाली, अवसरों की समानता, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि और विकास का समान वितरण। ऐसे में बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं रह जाता, वह राष्ट्र की प्राथमिकताओं, दृष्टि और संवेदनशीलता का घोषणापत्र बन जाता है। विकसित भारत 2047 की दिशा में ले जाने वाला बजट वही होगा जो सर्वसमावेशी हो- जो किसान, श्रमिक, उद्यमी, युवा, महिला, वरिष्ठ नागरिक, मध्यम वर्ग और वंचित समुदाय सभी की आकांक्षाओं को एक सूत्र में पिरो सकेगा और उनकी बात करेगा।
समावेशी विकास की पहली बुनियाद ग्रामीण भारत और कृषि से रखनी होगी। भारत की आत्मा गांवों में बसती है और विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। बजट से अपेक्षा है कि कृषि को केवल सब्सिडी-आधारित क्षेत्र न मानकर उसे आय-वृद्धि, मूल्य-संवर्धन और जोखिम-प्रबंधन के आधुनिक मॉडल से जोड़ा जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रभावी व्यवस्था, फसल बीमा का सरल एवं त्वरित दावा-निपटान, सिंचाई व जल-संरक्षण और कृषि-प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन ये सभी कदम किसानों की आय को स्थिर और बढ़ाने में सहायक होंगे। साथ ही कृषि-स्टार्टअप, एग्री-टेक और किसान-उद्यमिता को वित्त और बाजार तक आसान पहुंच देना समय की मांग है। कृषि को युवाओं के लिए आकर्षक बना कुछ विशेष पैकेज देने होंगे ताकि एमबीए किया हुआ युवा भी कृषि को एक उद्यम के रूप में प्राथमिकता में रखे।

दूसरा यह बजट रोजगार, उद्यमिता और युवाओं के सपनों का बजट हो, हम सबको मालूम है कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसका युवा वर्ग है। इसलिए विकसित भारत का बजट लाभदायक तभी होगा जब वह रोजगार खोजने वाले युवाओं को रोजगार सृजक बनने में सहायता करेगा। इसके लिए कौशल विकास को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना आवश्यक है। अप्रेंटिसशिप, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और डिजिटल कौशल इन पर लक्षित निवेश से रोजगार-क्षमता बढ़ेगी। एमएसएमई क्षेत्र के लिए सस्ती ऋण-व्यवस्था, क्रेडिट गारंटी, सरल अनुपालन और समयबद्ध भुगतान ये उपाय उद्यमिता को पंख देंगे। स्टार्टअप्स के लिए कर-स्थिरता, अनुसंधान-विकास पर प्रोत्साहन और वैश्विक बाजारों तक पहुंच भारत को नवाचार का वैश्विक केंद्र बना सकते हैं, जो अभी अमेरिका के पास है। अमेरिका की नीतियों के कारण बड़ी संख्या में रिवर्स पलायन हो रहा है, ये सभी युवा भारत के लिए सम्पत्ति हैं, इन्हें ध्यान में रखकर भारत को बजट में नीति बनानी पड़ेगी ताकि लौटकर जब वे आ ही रहें हैं तो उनके अनुभव से देश और युवाओं का लाभ करें।
बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य के माध्यम से मानव पूंजी में निवेश बढ़ाना पड़ेगा। विकसित राष्ट्रों की पहचान उनकी मानव पूंजी से होती है। बजट में शिक्षा को केवल व्यय नहीं बल्कि निवेश के रूप में देखना होगा। प्रारम्भिक शिक्षा में गुणवत्ता, शिक्षक-प्रशिक्षण, डिजिटल अवसंरचना और उच्च शिक्षा में अनुसंधान संस्कृति इन सब पर समग्र ध्यान रखना होगा। व्यावसायिक शिक्षा और उद्योग अकादमिक साझेदारी से रोजगार परक योग्यता बढ़ेगी।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, सस्ती दवाइयां, स्वास्थ्य-बीमा का विस्तार और प्रिवेंटिव केयर पर जोर ये कदम नागरिकों की उत्पादकता और जीवन-स्तर दोनों को सुधारेंगे। महिला सशक्तिकरण के विषय में विकसित भारत का बजट महिला केंद्रित की जगह महिला सक्षम होना चाहिए। महिलाओं की श्रम-भागीदारी बढ़ाने के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, क्रेच सुविधाएं, लचीले कार्य-घंटे और कौशल-उन्नयन की बात करने वाला होना चाहिए। महिला-उद्यमियों के लिए विशेष क्रेडिट लाइन, बाजार-सहायता और डिजिटल प्लेटफॉर्म आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग खोलेंगे। स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में निवेश से पीढ़ियों का भविष्य मजबूत होगा।
शहरीकरण और अवसंरचना में निवेश टिकाऊ विकास का मार्ग खोलेंगे। तेज शहरीकरण के साथ आवास, परिवहन, स्वच्छता और ग्रीन इंफ्रा की आवश्यकता बढ़ी है। बजट से अपेक्षा है कि वह स्मार्ट, समावेशी और पर्यावरण-अनुकूल शहरी विकास को बढ़ावा दे ना कि अंधाधुंध। प्रयास करे की शहरों की ओर पलायन रुके, इसलिए कस्बों को केंद्र में रखकर बजट बने ताकि कस्बें विकसित हों तो आस-पास के गांव तो सम्भाले ही सम्भालें पलायन रोककर शहर भी सम्भालें। कस्बे पहले से ही बने बनाए सैटेलाइट सिटी हैं, यह नए शहरीकरण को रोककर ग्रीन बसावट की अवधारणा को मजबूत करेगा। इसके लिए सस्ते आवास, सार्वजनिक परिवहन, जल-प्रबंधन और अपशिष्ट-निपटान वहां के जीवन की गुणवत्ता सुधारेंगे। साथ ही लॉजिस्टिक्स, रेल, सड़क, बंदरगाह और डिजिटल अवसंरचना में निवेश और इनकी कस्बों से कनेक्टिविटी उद्योग और व्यापार की लागत घटाकर प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा।
कर-व्यवस्था में मध्यम वर्ग का ध्यान रख उनका विश्वास जीतना होगा और इसे और सरल बनाना होगा। मध्यम वर्ग अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। एक सर्वसमावेशी बजट कर-प्रणाली में स्थिरता, सरलता और न्याय सुनिश्चित करेगा। प्रत्यक्ष करों में तर्कसंगत राहत, अनुपालन की सरल प्रक्रिया और कर-विवादों का त्वरित समाधान विश्वास को मजबूत करेंगे। अप्रत्यक्ष करों में पारदर्शिता और अनुपालन-सुगमता से व्यापार करना आसान होगा।
बजट में हरित अर्थव्यवस्था और जलवायु प्रतिबद्धता के लिए योजनाओं की घोषणा अपेक्षित है। विकसित भारत का मार्ग हरित होना चाहिए। नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऊर्जा-दक्षता एवं हरित हाइड्रोजन इन क्षेत्रों में निवेश से रोजगार भी बनेंगे और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। जलवायु अनुकूल कृषि, जल संरक्षण और जैव-विविधता की रक्षा दीर्घकालिक समृद्धि और सनातन अर्थशास्त्र की कुंजी हैं और अंत में यह सुशासन एवं वित्तीय अनुशासन की स्थापना उन्मुख होना चाहिए। अंततः बजट की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पारदर्शिता, डेटा आधारित निर्णय, समयबद्ध परियोजनाएं और उत्तरदायित्व सुशासन के स्तम्भ हैं। वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास उन्मुख व्यय आर्थिक स्थिरता और निवेशकों के विश्वास को मजबूत करेगा।
जब किसान समृद्ध होगा, युवा सशक्त होंगे, महिलाएं नेतृत्व करेंगी, उद्यम फले-फूलेंगे और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी विकसित भारत 2047 का सपना साकार होगा। ऐसे बजट से यही उम्मीद और अपेक्षा है कि वह हर भारतीय को विकास की यात्रा का सहभागी बनाए।
-पंकज जायसवाल
