भारत का 5G की दुनिया में प्रवेश

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5G उपरोक्त सारी क्रांतियों को बौना साबित करेगा. 4G के मुक़ाबले इसकी स्पीड 100 गुना होगी. यानी पलक झपकते 3 घंटे की मूवी 3 सेकण्ड में आपके मोबाइल में डाउनलोड हो जाएगी. डॉक्टर रोबोटिक सर्जरी कर सकेंगे. 3D वीडियो कॉलिंग की कल्पना शायद साकार हो जाएगी. 

भारत 10 प्रतिशत आर्थिक विकास दर की ओर अग्रसर

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आर्थिक गतिविधियों, विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में हुए सुधार के चलते भारत में रोजगार भी पिछले 14 वर्षों में सबसे तेज गति से बढ़ा है। सेवा क्षेत्र में व्यापार, होटल और रेस्तरां, परिवहन, भंडारण और संचार आदि से जुड़ी गतिविधियों जैसी कई तरह की अन्य गतिविधियां भी शामिल रहती हैं। वैसे तो उद्योग क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियों में सुधार दृष्टिगोचर है परंतु सेवा क्षेत्र में आए उच्छाल के चलते आज भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी है। ब्रिटेन को विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के स्थान से नीचे लाकर भारत अब विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत से आगे अब केवल अमेरिका, चीन, जापान एवं जर्मनी हैं। ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है वर्ष 2030 के पूर्व भारत अमेरिका एवं चीन के बाद विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

स्वामी विवेकानन्द का शिकागो भाषण, भविष्य का रोडमैप

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स्वामी जी ने जब शिकागो में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा था कि राष्ट्रवाद का मूल, धर्म व संस्कृति के विचारों में ही बसता है, तब सम्पूर्ण पाश्चात्य विश्व ने उनके इस विचार से सहमति व्यक्त की थी और भारत के इस युग पुरुष के इस विचार को अपने-अपने देशों में जाकर प्रचारित और प्रसारित करते हुए भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट किया था। पिछले ही वर्षों मे जब बाइबिल की 400 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर ब्रिटिश प्रधानमन्त्री डेविड कैमरन ने कहा था कि ब्रिटेन एक ईसाई राष्ट्र है और इसे कहने में किसी को कोई भय या संकोच नहीं होना चाहिएब्रिटिश प्रधानमन्त्री ने कहा था कि ब्रिटेन एक ईसाई राष्ट्र है और इसे कहने में किसी को कोई भय या संकोच नहीं होना चाहिए; तब निश्चित ही उनकी इस घोषणा की पृष्ठभूमि में विवेकानंद जी का यह विचार ही था।

युद्ध से बढ़ेंगी मुश्किल

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच चीन और ताइवान में भी गम्भीर स्थितियां पैदा हो गई हैं। चीन और ताइवान सम्पूर्ण विश्व में सेमी कंडक्टर चिप के सबसे बड़े सप्लायर हैं इसलिए यदि इनके बीच युद्ध की स्थिति आती है तो समूचे कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और वाहन उद्योग पर उसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। भारत में शीघ्र ही शुरू होने जा रही 5जी सेवाओं पर भी इसके प्रतिकूल प्रभाव पड़ेंगे।

मुद्रा स्फीति के मोर्चे पर आई अच्छी खबर

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माह जुलाई 2022 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति की दर भारत में पिछले 5 माह के सबसे निचले स्तर 6.71 प्रतिशत तक नीचे आ गई है, यह जून 2022 माह में 7.01 प्रतिशत थी। इसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की महंगाई दर में आई कमी है। हालांकि मूलभूत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर तो पिछले 10 माह के सबसे निचले स्तर  अर्थात 5.79 प्रतिशत पर आ गई है। माह जून 2022 की तुलना में माह जुलाई 2022 में ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में मुद्रा स्फीति की दर में सुधार हुआ है। यह हम सभी भारतीयों के लिए हर्ष का विषय हो सकता है कि भारत में मुद्रा स्फीति की दर में सुधार दरअसल वस्तुओं की आपूर्ति में हुए सुधार के चलते सम्भव हुआ है। अर्थात, पहिले देश में लगातार बढ़ रही महंगाई के कारणों में 65 प्रतिशत कारण आपूर्ति पक्ष के कारक जिम्मेदार थे जो अब घटकर 58 प्रतिशत पर आ गए हैं। भारत में वस्तुओं की आपूर्ति में बहुत सुधार हुआ है और अब चूंकि समय पर वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ी है जिसके चलते मुद्रा स्फूर्ति की दर में भी कमी दृष्टिगोचर हुई है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर आपूर्ति सम्बंधी विघ्न भी कुछ कम हुए हैं। इसके कारण मुद्रा स्फीति के बढ़ने में मांग सम्बंधी कारकों का प्रभाव 40 प्रतिशत हो गया है।

भारत में क्यों है मंदी की शून्य सम्भावना

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अभी हाल ही में एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निवेश प्रबंधन एवं वित्तीय सेवा कम्पनी मोर्गन स्टेनली के अर्थशास्त्रियों ने एक प्रतिवेदन जारी कर कहा है कि वित्तीय  वर्ष 2022-23 में भारत एशिया में सबसे मजबूत  अर्थव्यवस्था बन कर उभरने जा रहा है। इनके अनुमान के अनुसार भारतीय  अर्थव्यवस्था वित्तीय  वर्ष 2022-23 में 7 प्रतिशत से…

उत्तर प्रदेश बनेगा वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था

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अब उत्तर प्रदेश के प्रबुद्ध नागरिकों के पास दो विकल्प हैं। असंभव से दिखने वाले इस लक्ष्य की आलोचना करें या फिर व्यापक जनहित के साथ-साथ अपने ख़ुद के लाभ के लिए भी योगी सरकार को इसे हासिल करने में मदद करें। अर्थव्यवस्था जब इस अभूतपूर्व दर से सुधरेगी तो इसका लाभ हर किसी को होगा। वास्तव में यह लक्ष्य प्राप्त करना किसी एक दो या चार लोगों के बस की बात नहीं। सरकार अकेले इसे नहीं कर सकती। दुनिया के बड़े से बड़े कंसल्टेंट यदि यह कर पाते तो आज दुनिया में एक भी देश ग़रीब ना होता। भारत को एक ट्रिलियन डॉलर इकनॉमी बनने में 55 साल लगे थे। बीते पाँच वर्षों में केंद्र सरकार ने भारत की जीडीपी में एक ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा जोड़े हैं। प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य के अनुरूप यदि भारत को पाँच ट्रिलियन डॉलर इकनॉमी बनना है तो पहले उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर इकनॉमी बनना ही होगा। यह लक्ष्य कठिन ज़रूर हो सकता है लेकिन असंभव क़तई नहीं।

मौद्रिक समीक्षा पर महंगाई का साया

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वैसे,अभी भी समग्र मांग एवं निवेश के लिहाज से अनिश्चितता का माहौल दिखरहा है। विश्व की लगभग सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अपनी वृद्धि रफ्तार को दुरुस्त करने की को​शिश कर रही हैं और भारत भी मामले में अपवाद नहीं है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था अन्य देशों की तुलना में ज्यादा मजबूत है। इसलिए, ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। फिर भी,महंगाई के दबाव में भारतीय कंपनियां भी अपने उत्पादों की कीमत बढ़ाने के लिए मजबूर हैं, जिससे महंगाई का बोझ अंतत: ग्राहकों को उठाना पड़ रहा है। 

सरेंडर होते पड़ोसियों के बीच मजबूत भारत

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सुकून की बात यह है की जहां भारत के पडोसी बुरी तरह से परेशान हैं वहां भारत की स्थिति उनसे बेहतर है. भारत का रुपया भी अन्य देशों की तुलना में कम दर से गिरा है डॉलर के मुकाबले. भारत के सनातन और माइक्रो इकॉनमी का जाल इस तरह बुना है की यह बड़े से से बड़े झटके को भी बर्दाश्त करने की क्षमता अभी भी बनाये हुआ है. 70 फीसदी इकॉनमी एग्रो होने के कारण और एग्रो में आत्मनिर्भर होने के कारण भारत के पास यह आत्मविश्वास है कि वह भूखा नहीं सोयेगा और यही आत्मविश्वास और इससे उपजा हौसला इसे लड़ाई में आगे रखे हुए है. भारत की कैपेसिटी बिल्डिंग के तहत जो भी योजनाएं चलाई गईं खासकर के आधारभूत ढांचे का, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत इन सब ने इस लड़ाई में मजबूती से भारत का साथ दिया है, यही कारण है की इस वैश्विक मंदी में भी भारत अभी भी मजबूती से लड़ रहा है जबकि आसपास के देश सरेंडर कर रहें हैं. 

केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के चलते सम्पन्न हो रहे हैं भारतीय किसान

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भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का एक अलग स्थान है क्योंकि देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी अभी भी गावों में निवास करती है एवं अपनी आजीविका के लिए मुख्यतः कृषि क्षेत्र पर ही निर्भर है। कोरोना महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्र विपरीत रूप से प्रभावित हुए थे एवं इन सभी आर्थिक क्षेत्रों में ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई थी।

केंद्र सरकार द्वारा लिए जा रहे हैं आर्थिक निर्णय

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केंद्र सरकार द्वारा निर्यात एवं आयात कर सम्बंधी लिए गए उक्त निर्णयों की प्रत्येक 15 दिवस पश्चात समीक्षा की जाएगी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं और यदि आने वाले समय में कच्चे तेल के दाम कम होने लगते हैं तो उक्त नियमों में परिवर्तन भी सम्भव होगा।

भारत की अर्थव्यवस्था लगातार सुदृढ़…..

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भारत की अर्थव्यवस्था लगातार सुदृढ़ हो रही है यह इससे भी सिद्ध होता है कि देश का वस्तु एवं सेवा कर संग्रहण जून 2022 में वार्षिक आधार पर 56 प्रतिशत बढ़ा है। सरकार को इस वित्त वर्ष जून 2022 में जीएसटी से कुल 1.44 लाख करोड़ की राशि प्राप्त हुई है। यह कलेक्शन के मामले में दूसरा सबसे अच्छा महीना है। इसके पहले मई 2022 में 1.41 लाख करोड़ रुपए की उगाही हुई थी।

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