हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
शत्रुबोध: कौन है सामाजिक विभाजन करनेवाले?

शत्रुबोध: कौन है सामाजिक विभाजन करनेवाले?

by हिंदी विवेक
in युवा, समाचार..
0
जाति या वर्ग के नाम पर जो लोग उन्माद फैला रहे हैं। एक-दूसरे को अगर जाने-अनजाने किसी भी रुप में आहत कर रहे हैं तो कृपया ये न करें। क्योंकि अगर हम अपनी जातीय पहचान और जातीय दंभ के नाम पर समाज को बांटेंगे तो ये देश को और समाज को बांटने वाला होगा।

हमारा देश इसीलिए महान है क्योंकि यहां भिन्न-भिन्न विचारधाराएं हैं। लेकिन जब बात राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की आती है तो समूचा समाज एकजुट होता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कुमारी मायावती का ये संदेश देखिए.

“विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों में जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किये गये हैं, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये मा. सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित।

जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता, अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।”

वास्तव में ये भावना ही हमारे भारतीय समाज को एक करती है। मायावती वो नेता हैं जो सामाजिक न्याय के नाम पर राजनीति में आईं। एक समय तक उनके कटु, तीक्ष्ण बयान भी सुने गए। लेकिन वो अपने तरह की राजनीति है, समाज ने उसे भी स्वीकारा। वो सत्ता के शीर्ष में भी रहीं। किंतु दूसरी ओर धारा 370 के हटाने से लेकर, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, ऑपरेशन सिंदूर और अब ‘यूजीसी विवाद’ इन सबमें में राष्ट्रीयता के स्वर को मुखरता से रखा है।

क्योंकि वो जानती हैं कि ‘देश प्रथम’ की भावना के साथ ही समाज चल सकता है। राजनीति अपनी जगह है। सत्ता अपनी जगह है, लेकिन सबसे श्रेष्ठ होती है राष्ट्रीय एकता। मायावती जी ने उसी भाव और प्रतिबद्धता को बारंबार समाज के बीच प्रकट किया है। यही हमारे देश की सुंदरता है।

वहीं सर्वोच्च नियामक संस्था सुप्रीम कोर्ट बारंबार ये बताता है कि संविधान निर्माताओं की दृष्टि का पालन हर किसी को करना पड़ेगा। उन लोगों से बारंबार निवेदन है जो सुप्रीम कोर्ट के यूजीसी गाइडलाइन को लेकर दिए गए निर्णय को अपने-अपने चश्मे से देख रहे हैं।

UGC की गाइडलाइन का ‘जातीय चश्मे’ से समर्थन और विरोध करने वालों से निवेदन है कि  कृपया इसे अहं का विषय न बनाएं। ये न तो किसी जाति या वर्ग की जीत है और न किसी की हार।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ‘सत्यमेव जयते’ के ध्येय वाक्य पर आधारित है। ये समूचा समाज हमारा अपना है। किसी के साथ कोई भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।

जो व्यक्ति, दल या नेता ‘आरक्षित और अनारक्षित वर्ग’ के नाम पर विद्वेष और विभाजन फैलाएं। उन्हें पहली फुर्सत में हमें और आपको ही नकारना होगा।

आप और हम ये समझें कि जहां भी सामाजिक विभाजन की बात आएगी। अलगाव की बात आएगी। हम सब हर उस व्यक्ति और विचार के ख़िलाफ़ खड़े होंगे। जो हमारी एकता को तोड़ना चाहते हैं। ये हमारा प्रथम कर्तव्य है।

यूजीसी की नई गाइडलाइन का विरोध इसीलिए है क्योंकि ये संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। ये गाइडलाइन सामाजिक समरसता को तोड़ने वाली और वर्ग के आधार पर विभाजन फैलाने वाली थी।‌

सुप्रीम कोर्ट के यूजीसी की नई गाइडलाइन पर अभी लगाए गए स्टे और टिप्पणी ने ये बताया है कि कोई भी नियम, कानून, दिशानिर्देश  सामाजिक एकता, सुरक्षा और भेदभाव दूर करने के लिए लाए जाते हैं, न कि विभाजन फैलाने के लिए। अशांति और उपद्रव के फैलाने के लिए।UGC New Rules के खिलाफ गरमाई सियासत, आज सुप्रीम सुनवाई; इन कानून के बाद  क्या यूपी विधानसभा चुनाव में होगा बड़ा उलटफेर?

जाति या वर्ग के नाम पर जो लोग उन्माद फैला रहे हैं। एक-दूसरे को अगर जाने-अनजाने किसी भी रुप में आहत कर रहे हैं तो कृपया ये न करें। क्योंकि अगर हम अपनी जातीय पहचान और जातीय दंभ के नाम पर समाज को बांटेंगे तो ये देश को और समाज को बांटने वाला होगा। सही का साथ, ग़लत का विरोध करना ही चाहिए।

दूषित राजनीति, स्वार्थी तत्व और भारत विरोधी गैंग तैयार बैठी है कि कब हम और आप कोई चूक करें। फिर वो देश में अशांति और वैमनस्य फैलाने में जुट जाएं। सुप्रीम कोर्ट के नए निर्णय के बाद से एक गैंग सक्रिय हो गई है। टूलकिट शुरू हो गई हैं कि – जातीय आधार पर लोगों की भावनाओं को हवा दी जाए। किसी को बड़ा और किसी को छोटा

बनाने की पुरज़ोर कोशिशें जारी हो गई हैं। लच्छेदार शब्दों, इमोशनल ढंग से संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने का अभियान भी बड़ी ही चतुराई से शुरू हो चुका है। क्योंकि वो ये चाहते हैं कि विभाजन की चिंगारी से समाज को झुलसने के लिए छोड़ दिया जाए। अतएव सावधानी और सतर्कता रखिए।

ये समय ‘शब्दों और बौद्धिक युद्ध’ का है। देश और समाज के शत्रु घात लगाए बैठे हैं कि  कब आपको उद्वेलित किया जाए। कब जातिगत आधार पर समाज को निशाना बनाया जाए। एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए सोशल मीडिया में कंटेट भी ख़ूब सर्कुलेट किए जा रहे हैं। हम सबकी जो शाश्वत पहचान भारतीय होने की है। हिन्दू होने की है। उसे कमतर दिखाने और जातीय पहचान को बड़ा दिखाने का अभियान भी शातिर बदमाश शुरू कर चुके हैं।

युवाओं से विशेष निवेदन है कि  धैर्य के साथ काम करें। आपक समर्थन और विरोध अपनी जगह हो सकता है। आक्रोश और उत्साह अपनी जगह है। लेकिन हम कहीं भी कोई ऐसी बात न कहें, न लिखें, न किसी की ऐसी बात सुनें जो किसी भी प्रकार के विभाजन को हवा देने वाली हो। क्योंकि स्वार्थी राजनीति, विभाजन फैलाने वाले लोग हमें आपस में लड़ा देंगे।

इसमें उनके स्वार्थ होंगे। उसमें वो कामयाब हो जाएंगे। लेकिन समाज में अगर भेदभाव या जातीय विभाजन की खाई बनी तो उसे पाटने में न जाने कितना समय लग जाएगा। इससे व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की हानि होनी तय है। क्या हम ये स्वीकार करेंगे?

संपूर्ण हिन्दू समाज हमारा अपना समाज है। संविधान और कानून की परिभाषा में हम  ST/ SC/ OBC/ GENERAL/ EWS आदि की कैटेगरी में गिने जा सकते हैं। हमारी अलग-अलग जातीय पहचानें हो सकती हैं।

लेकिन हम ये याद रखें कि हम सबकी एक विराट पहचान हिन्दू होने की है। ये पहचान राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी हिन्दू होने की है। हमारे बीच में सहमतियां-असहमतियां हो सकती हैं। हम अपनी समस्याओं के हल अपने बीच मिल, बैठकर निकालेंगे। लेकिन कभी भी विचलित नहीं होंगे। उत्तेजना में भेदभाव या विभाजन की बातें नहीं आने देंगे। चाहे ये बात यूजीसी प्रकरण की हो। याकि दूसरी बातों की।

हम ये ध्यान रखें कि सामाजिक समस्याओं का हल कोई भी सरकार और प्रशासन नहीं ला सकते हैं। समाज की समस्याओं का हल समाज को ही खोजना पड़ेगा। हम सब भारत माता की संतानें हैं। ये कभी न भूलें।

हम ये ध्यान रखें कि अगर हम संगठित हैं, सशक्त हैं तो  हमारा राष्ट्र सशक्त और सर्वसमर्थ है। अब तय हमें करना है कि हम देश और समाज को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।

– कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

 

 

Share this:

  • Click to share on X (Opens in new window) X
  • Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Click to share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
Tags: #ugc #modi #india #youth #reach #read

हिंदी विवेक

Next Post
यूजीसी: स्पष्टता और संतुलन आवश्यक- एबीवीपी

यूजीसी: स्पष्टता और संतुलन आवश्यक- एबीवीपी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0