मर्दानी 3 एक अच्छे सब्जेक्ट पर बनी फ़िल्म होते हुए भी कैसे ढके छुपे रूप से अपना अजेंडा परोसती है, ये मैं आपको बताता हूँ। पर इसके आगे स्पॉइलर्स हैं, अगर आप फ़िल्म का टिकेट्स ले चुके हैं तो यहीं से यू टर्न ले लीजिए। मर्दानी 3 में दिखाया गया है कि शिवानी शिवाजी राव को जिस अम्मा से लड़ना है, वो खुद किसी समय चाइल्ड ट्राफिकिंग का शिकार हुई थी, पर आज वो बड़ी सी बिंदी लगाकर बच्चों की जान का सौदा करती है।
लेकिन वो जिनसे काम करवा रही है, उनके पास छिपने के लिए जामा-मस्जिद से बेहतर जगह नहीं है। मतलब मैं मणिरत्नम की ‘दिल-से’ से ग़ौर करता आ रहा हूँ कि फ़िल्मों में कोई किडनैपिंग, कोई आतंकी या किसी भी किस्म का काला धँधा होगा तो वो जामा मस्जिद के आसपास होगा!
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ये तो हुआ एक, अब दूसरा देखिए कि बड़ी बिंदी वाली अम्मा ने जिस लड़के का हाथ कटवाया था, वो भी बड़ा होकर अम्मा का साथ देने लगता है। इस लड़के का नाम फ़िल्म में – रामानुजन है। समझे आप? रामा-नुजन! नहीं समझे? कोई बात नहीं, आगे समझेंगे!ये रामानुजन त्रेता ट्रस्ट के नाम से एनजीओ चलाता है, जहाँ ये दिखावे के लिए भीख माँगते बच्चों को रेस्क्यू करता है, पर हक़ीकत में ये 8 से 11 साल की लड़कियों पर एक्सपेरिमेंट करके उनसे अरबों डॉलर कमाना चाहता है।
इस एक्सपेरिमेंट में मारी गई बच्चियों भट्टी में झोंकने का काम भी इसी का है। अगर आप त्रेता और रामानुजन से भी नहीं समझे, तो अब समझेंगे कि इस रामानुजन की साइंस लैब कोलंबो श्रीलंका में है। और तो और, इसका जो बचपन में हाथ काटा गया था, वो ‘राइट हैंड’ था।
इस सुपर विलन को पकड़वाने के लिए फ़ातिमा नाम की सच्ची देशभक्त पुलिस ऑफिसर खुद अपने कँधे पर गोली मार लेती है। इस रामानुजन को पकड़ने के लिए शिवानी शिवाजी रॉय के साथ जाफ़र, सोढी और जिम्पा टीम बनाते हैं। मर्दानी 3 के ट्रेलर में दिखाया जाता है कि एक देश जहाँ देवी पूजी जाती है वहाँ हर हफ़्ते हज़ारों लड़कियाँ गायब हो जाती हैं।
क्यों भैया?
सभी का खून शामिल है न यहाँ की मिट्टी में, क्या इस देश में जीजस के आगे कैन्डल नहीं जलाई जाती?
क्या दिन में पाँच बार इबादत नहीं होती इस देश में?
क्या गुरुजी के शबद नहीं सुनते हम इस देश में?
अरे इस डेढ़ सौ करोड़ की आबादी वाले देश में मात्र 10 हज़ार यहूदी होंगे,
पर उनके लिए भी प्रार्थना स्थल (Synagogues) है हमारे देश, हमारी मुंबई में!
मैं दावे से कहता हूँ कि मर्दानी 3 गर्ल चाइल्ड मिसिंग के मुद्दे को बहुत अच्छे से उठाती है।
पर इसमें जबरन रामानुजन को त्रेता से जोड़कर आगे श्रीलंका में उसकी लंका बनाने जैसे अजेंडे डालने की कोई ज़रूरत ही नहीं थी!
जामामस्जिद एरिया को अपराध का अड्डा दिखाने की कोई ज़रूरत ही नहीं थी!
क्राइम पर कंट्रोल के लिए, क्राइम को क्राइम की तरह देखा जाए तो ही इस देश का भला हो सकता है!
हिडन एजेंडा परोसकर पतली गली से निकलने वाला टाइम अब जा चुका है,
अब बिना बिजली वाले गाँव में पानी की टंकी और बम गोली तोप से बचाने वाला सात सौ छियासी का बिल्ला पकड़े जाते हैं।
बाक़ी 60 करोड़ की लागत में बनी मर्दानी 3 अभी तक 16 करोड़ की नेट कलेक्शन कर पाई है। अगर सोमवार को कम से 5 करोड़ का कलेक्शन नहीं हुआ तो बजट के आधे पैसे निकालना भी मुश्किल हो जायेगा।
एक ज़रूरी मुद्दे पर बनी महिला प्रधान फ़िल्म फिर कमाई के मामले में फिसड्डी साबित होगी।
– सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’
