हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
भारत–अमेरिका ट्रेड डील  : आर्थिक अवसर या रणनीतिक दबाव?

भारत–अमेरिका ट्रेड डील : आर्थिक अवसर या रणनीतिक दबाव?

India US trade deal

by हिंदी विवेक
in आर्थिक, ट्रेंडींग
0
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य की घोषणा इस समझौते के दीर्घकालिक महत्व को रेखांकित करती है, यद्यपि इसकी समय-सीमा और कार्ययोजना अभी स्पष्ट नहीं है। भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर कुछ टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं में कमी के संकेत दिए हैं, परंतु कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी नीतिगत सीमाओं को बनाए रखा है।

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित व्यापार समझौता लगभग ग्यारह महीनों तक चले कूटनीतिक तनाव और अनिश्चितता के बाद सामने आया है। इस अवधि में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध पिछले दो दशकों में अपने न्यूनतम स्तर पर पहुँच गए थे। ऐसे परिदृश्य में यह समझौता केवल व्यापारिक हितों तक सीमित न होकर भारत की आर्थिक नीति, ऊर्जा सुरक्षा तथा वैश्विक रणनीतिक स्थिति को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बनकर उभरा है।

Modi silent as Trump praises and warns on oil, tariffs - Deshabhimani

इस समझौते का केंद्रीय आर्थिक पक्ष अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ में उल्लेखनीय कटौती से संबंधित है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार भारत पर लागू कुल 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह टैरिफ संरचना दो भागों में विभाजित थी— 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और रूस से कच्चे तेल के आयात के कारण लगाया गया 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ। पेनल्टी टैरिफ का हटना भारत के लिए केवल आर्थिक राहत नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का भी संकेत देता है।

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 100 अरब डॉलर रहा। टैरिफ में कटौती के परिणामस्वरूप भारतीय निर्यात में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की संभावना व्यक्त की जा रही है। टेक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण, ऑटोमोबाइल कलपुर्जे, फार्मास्यूटिकल्स तथा इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे क्षेत्र इस समझौते से विशेष रूप से लाभान्वित हो सकते हैं। अमेरिकी उपभोक्ता बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमतों में अपेक्षित कमी से निर्यात विस्तार और रोजगार सृजन की संभावनाएँ बढ़ेंगी।

टेक्सटाइल क्षेत्र पर इस समझौते का प्रभाव विशेष रूप से उल्लेखनीय हो सकता है। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में यह उद्योग बड़े पैमाने पर श्रम-आधारित है। अमेरिकी बाजार में मांग में वृद्धि से इन राज्यों में उत्पादन, आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि संभव है। वित्तीय बाजारों की सकारात्मक प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि निवेशक इस समझौते को अल्पकाल में भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए अनुकूल मान रहे हैं।

हालाँकि इस समझौते के आर्थिक लाभों के साथ कुछ रणनीतिक और संरचनात्मक चिंताएँ भी जुड़ी हुई हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण भारत की ऊर्जा नीति में संभावित परिवर्तन है। अमेरिकी पक्ष के अनुसार भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद को सीमित करने पर सहमति जताई है, जिसके परिणामस्वरूप पेनल्टी टैरिफ को हटाया गया। इसके विकल्प के रूप में भारत द्वारा अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत का प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रियायती दरों पर रूसी तेल के आयात ने भारत को अपनी ऊर्जा लागत नियंत्रित करने और घरेलू महंगाई पर अंकुश लगाने में सहायता की। वर्ष 2024–25 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत थी। ऐसे में रूस से आयात में कटौती भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी कच्चा तेल रूसी तेल की तुलना में प्रति बैरल 10 से 15 डॉलर अधिक महँगा हो सकता है। इससे भारत का आयात व्यय बढ़ने और ईंधन कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका है, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और समग्र मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है।

Trump, Modi agree to trade deal: US lowers tariffs on India to 18%

इस समझौते का भू-राजनीतिक आयाम भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। अमेरिका इसे रूस पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ाने की व्यापक नीति के हिस्से के रूप में देख रहा है। यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में यह समझौता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को पश्चिमी रणनीतिक हितों के अनुरूप पुनर्संरचित करने का प्रयास भी प्रतीत होता है। इस संदर्भ में यह प्रश्न प्रासंगिक हो जाता है कि भारत अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता को किस सीमा तक बनाए रख सकेगा।

भारत की विदेश नीति पारंपरिक रूप से बहुपक्षीय संतुलन पर आधारित रही है। भारत ने अमेरिका, रूस और अन्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखते हुए अपनी स्वायत्तता को संरक्षित करने का प्रयास किया है। किंतु वर्तमान समझौते ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या भारत अपनी ऊर्जा और रक्षा नीति में क्रमिक रूप से अमेरिका-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की ओर अग्रसर है।

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य की घोषणा इस समझौते के दीर्घकालिक महत्व को रेखांकित करती है, यद्यपि इसकी समय-सीमा और कार्ययोजना अभी स्पष्ट नहीं है। भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर कुछ टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं में कमी के संकेत दिए हैं, परंतु कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी नीतिगत सीमाओं को बनाए रखा है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार भारतीय किसानों और दुग्ध उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है।

भारत–अमेरिका ट्रेड समझौता आर्थिक अवसरों के साथ-साथ रणनीतिक चुनौतियों का भी प्रतिनिधित्व करती है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत किस प्रकार अल्पकालिक व्यापारिक लाभों को सुरक्षित रखते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन स्थापित करता है। यही संतुलन इस समझौते को भारत के लिए एक स्थायी आर्थिक एवं कूटनीतिक उपलब्धि में परिवर्तित कर सकता है।

– डॉ. संतोष झा

Share this:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
Tags: #IndiaUSTradeDeal #TradeRelations #EconomicGrowth #GlobalTrade #IndiaUSPartnership #Trade2026 #BilateralTrade #InvestmentOpportunities #TradeNegotiations #FutureOfTrade

हिंदी विवेक

Next Post
जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष बने महेंद्र नाहटा

जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष बने महेंद्र नाहटा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0