भारत के डिजिटल मॉडल को कई देश अपना रहे हैं। भारत सरकार ने हाल ही में इंडिया स्टैक पर सहयोग हेतु 23 देशों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। जिनमें यूपीआई, डिजिटल भुगतान, डिजीलॉकर, उमंग आदि शामिल हैं। भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल पर 8 से अधिक देश काम कर रहे हैं।
आधार कार्ड से लेकर इंडिया स्टैक तक की यात्रा भारत के डिजिटल परिवर्तन की एक ऐतिहासिक गाथा है। यह यात्रा एक बायोमेट्रिक पहचान पत्र आधार के रूप में शुरू होकर अब एक समावेशी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में बदल गई है। इंडिया स्टैक का उद्देश्य देश के बेहतर विकासात्मक और व्यावसायिक परिणामों को सक्षम बनाने के लिए विभिन्न डिजिटल समाधानों को एक साथ लाना है।
वर्ष 2009 में विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की स्थापना और वर्ष 2010 में पहले आधार कार्ड के साथ इसकी शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य निवासियों को एक अद्वितीय (यूनिक) डिजिटल पहचान प्रदान करना था, जो बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट, आइरिस) पर आधारित हो। इसने कागजी कार्यवाही को कम किया और पहचान की तत्काल पुष्टि की नींव रखी।
आधार-आधारित वित्तीय समावेश (वर्ष 2011 से 2014) इसका अगला कदम था।
जन धन योजना (2014) के अंतर्गत लाखों गरीबों के बैंक खाते खोले गए, जिससे वित्तीय समावेश को गति मिली। पेपरलेस और डिजिटल सेवाओं का और विस्तार वर्ष 2015 से प्रारम्भ हुआ। आधार आधारित ई केवाईसी शुरू किया गया, जिससे बैंकिंग और अन्य सेवाओं में केवाईसी की लागत घट गई।
वर्ष 2015 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजीलॉकर लॉन्च किया, जिससे नागरिक अपने कागजात सुरक्षित रूप से डिजिटल रूप से संग्रहीत और साझा कर सकें। इसके बाद आधार धारकों को किसी भी कागजात पर डिजिटल हस्ताक्षर करने की सुविधा मिली। वर्ष 2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस लॉन्च किया गया, जिसने रियल-टाइम मोबाइल भुगतान में क्रांति ला दी।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डेटा साझा करने के लिए अकाउंट अग्रीगेटर फ्रेमवर्क तैयार किया गया, जिसमें विभिन्न वित्तीय संस्थानों (बैंक, म्यूचूअल फंड, बीमा) आदि में बिखरे अपने वित्तीय डेटा को एक साथ देखने और सहमति से किसी अन्य संस्था को साझा करने की अनुमति दी जाती है।
भारत के इस डिजिटल पब्लिक इंफ्रस्ट्रक्चर की बदौलत आज 1.4 बिलियन से अधिक आधार नामांकन हैं और यूपीआई 10 बिलियन से अधिक मासिक लेनदेन कर रहा है। भारत सरकार ने हाल ही में इंडिया स्टैक पर सहयोग हेतु 23 देशों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये देश हैं- आर्मेनिया, सिएरा लियोन, सूरीनाम, अंटीगुआ और बरबुडा, पापुआ न्यू गिनी, त्रिणीनाद और टोबैगो, तंजानिया, केन्या, क्यूबा, कोलम्बिया, लाओ पीपुल्स, सेंट किट्स और नेविस, इथियोपिया, जमैका, गाम्बिया, फ़िजी, गुयाना, वेनेजुएला, श्री लंका, ब्राजील, लेसोथो, मालदीव और मंगोलिया।
डिजिटल भुगतान- भारत का यूपीआई इस समझौते के पहले से ही 8 से अधिक देशों में काम कर रहा है। इनमें यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और कतर शामिल हैं।
डिजीलॉकर – इसके उपयोग के लिए क्यूबा, केन्या, यूएई और लाओ पीपुल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ने विशेष समझौते किए हैं।
व्यापक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर- ऊपर वर्णित 23 देश व्यापक रूप से आधार, यूपीआई, कोविन, एपीआई सेतु, उमंग और डिजीलॉकर समेत अन्य डिजिटल समाधानों के मिश्रण को अपना रहे हैं।
आगे की रणनीतियां
भारत की जी20 अध्यक्षता (2023) के दौरान शुरू किया गया ग्लोबल डीपीआई रिपॉजटरी एक वैश्विक ज्ञान मंच के रूप में कार्य कर रहा है। भारत का उद्देश्य ‘ग्लोबल डिजिटल साउथ’ के सिरमौर के रूप में स्थापित होना और एक ओपन-सोर्स और सुरक्षित डिजिटल पारिस्थितिक तंत्र तैयार करना है। इसमें तकनीक का हस्तानांतरण और प्रतिकृतिकरण शामिल है। यूपीआई के वैश्विक विस्तार से भारतीयों के लिए कम लागत में पैसे भेजना सम्भव हो सकेगा।
भारत इन 23 देशों में अपने स्टैक के आधार पर स्थानीय स्टार्टअप को प्रशिक्षित और विकसित कर रहा है। इसके अलावा भारत का उद्देश्य पश्चिमी देशों की कॉर्पोरेट केंद्रित प्रणालियों और चीन की निगरानी केंद्रित प्रणालियों के बीच स्वयं को एक बेहतर विकल्प (स्टैक) के रूप में प्रस्तुत करना है।
आगे की रणनीति मुख्य रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कम्प्यूटिंग क्षमता, जन-केंद्रित सेवाओं और डीपीआई के वैश्विक विस्तार पर केंद्रित है। ऊर्जा क्षेत्र के लिए इंडिया एनर्जी स्टैक का साझा डिजिटल ढांचा तैयार किया जा रहा है। मेघराज क्लाउड के साथ डेटा और साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा। फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारत आधारभूत से अनुप्रयोग आधारित विकास की तरफ बढ़ रहा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था प्राप्त करना है।
‘इंडिया स्टैक ग्लोबल’ भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है ताकि मित्र राष्ट्र इसे अपने देश में अपना सकें। वर्तमान में इसमें 18 प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। *आधार- बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल पहचान।
*यूपीआई- रीयल टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली।
*कोविन- टीकाकरण सेवाओं के सम्पूर्ण प्रबंधन के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
*एपीआई सेतु- एपीआई के माध्यम से सरकारी डेटा और सेवाओं को सुरक्षित और मानकीकृत तरीके से साझा करने में सक्षम बनाता है।
*आरोग्य सेतु- स्वास्थ्य सलाह और स्वास्थ्य सम्बंधी सेवाओं की पहुंच को सुगम बनाता है।
*सरकारी ई-मार्केटप्लेस- सरकारी संस्थाओं द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की पारदर्शी और कुशल खरीद के लिए ऑनलाइन मंच प्रदान करता है।
*डिजीलॉकर- नागरिकों के इलेक्ट्रॉनिक कागजातों को सहेजने और साझा करने के लिए।
*उमंग- मोबाइल और वेब प्लेटफॉर्म जो सरकारी सेवाओं की एकल विंडो पहुंच प्रदान करता है।
*दीक्षा- एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म जो शिक्षकों और शिक्षार्थियों तक ई सामग्री और शैक्षणिक संसाधनों को पहुंचाता है।
*ई-संजीवनी- टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म जो ग्रामीण क्षेत्रों में दूरस्थ चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराता है।
*ई-अस्पताल- ऑनलाइन अस्पताल प्रबंधन प्रणाली।
*ई-ऑफिस- सरकारी कार्यालयों में इलेक्ट्रॉनिक फाइल प्रबंधन। *ई-कोर्ट- अदालती प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाना।
*पोषण ट्रैकर- पोषण सेवा वितरण की वास्तविक समय में निगरानी। *एनसीडी प्लेटफॉर्म- प्रमुख गैर संक्रामक रोगों की जांच, निदान और प्रबंधन।
*स्किल इंडिया डिजिटल हब- कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार का एकीकृत प्लेटफॉर्म।
*सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली – सरकारी निधियों और लाभ हस्तांतरण की निगरानी के लिए।
*पीएम गतिशक्ति- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म।
-प्रज्ञा गौतम
