पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर अटैक करना और उसे युद्ध बताना दरअसल पाकिस्तान की वो खीझ है जो बलूचिस्तान में हो रहा है.
दरअसल बलूचिस्तान वाले हिस्सों में हथियारों की होड़ बढ़ रही है, प्रांत के कई हिस्से पाकिस्तानी आर्मी के कंट्रोल से बाहर हो रहे है, इनके लिए सबसे बड़ी परेशानी ये है कि इनके पास पाकिस्तानी आर्मी से भी एडवांस वेपन है.
जाहिर सी बात है कि इनका पोर्ट पर कब्जा है नहीं, जो भी वेपन, बारूद सप्लाई हो रही है वो अफगानिस्तान के रास्ते से ही हो रहा है.
लेकिन यहां पर सोचने वाली बात है कि आखिर अफगानिस्तान ऐसा कर क्यों रहा है? वो पाकिस्तान से दुश्मनी मोल ले ही क्यों रहा है?

इसका जवाब अफगानिस्तान के नक्शे में मिलता है, दरअसल अफगानिस्तान एक लैंडलॉक्ड कंट्री है, उसके पास समुद्र तक जाने के लिए दो ही रास्ते है एक ईरान दूसरा पाकिस्तान.
लेकिन जब पाकिस्तान अमेरिका को खुश करने के लिए अपने ही पड़ोसी देश पर सेना के साथ घुस गया तो ये बात अफगानिस्तान को खल गई.
इतना नरसंहार और अव्यवस्था फैलाने के बाद भी अफगानिस्तान अपने दुश्मन के पोर्ट से अपने देश तक माल लाने के लिए मजबूर था.

लिमिट क्रॉस तब हुई जब कंगाल पाकिस्तान ने पोर्ट से उनके देश तक पहुंचाने का मनमाना पैसे वसूलने लगी.
वे जानते है कि जब तक अफगानिस्तान के पास समुद्री सीमा नहीं होगी तब तक अफगानिस्तान खास तरक्की नहीं करेगा, इसलिए हमेशा डूरंड रेखा को मानने से इनकार किया जाता है और अपने पश्तून इलाकों को बढ़ा चढ़ा कर मांग की जाती रही है.
जब अफगानिस्तान में अमेरिका की कठपुतली सरकार गिरी तब तालिबानियों ने बलूचिस्तान को अशांत करना शुरू कर दिया.
उनके लिए बलूचिस्तान का अलग देश बनना फायदे का सौदा है.
हालांकि पाकिस्तानियों ने वॉर छेड़कर बता दिया है कि सीमाओं से छेड़छाड़ होने पर वे तो डूबेंगे ही लेकिन साथ में लेकर डूबेंगे, यहीं बात भारत भी जानता है इसलिए POK पर शांत बैठा है.

